
राम मंदिर चंदा गड़बड़ी केस: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र, यूपी सरकार और ट्रस्ट को भेजा नोटिस
राम मंदिर दान में कथित गड़बड़ी के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र, यूपी सरकार और राम जन्मभूमि ट्रस्ट को नोटिस जारी कर SIT से स्टेटस रिपोर्ट और CCTV फुटेज सुरक्षित रखने को कहा।
अयोध्या स्थित श्री राम जन्मभूमि मंदिर को मिले दान और चढ़ावे में कथित वित्तीय गड़बड़ी के आरोपों पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार और श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को नोटिस जारी किया है। शीर्ष अदालत ने सभी पक्षों से जवाब तलब करते हुए मामले की स्वतंत्र और न्यायिक निगरानी में जांच की मांग वाली याचिकाओं पर जवाब दाखिल करने को कहा है।
SIT से मांगी स्टेटस रिपोर्ट
भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) से मामले की स्टेटस रिपोर्ट तलब की है। अदालत ने एसआईटी को अपने गठन और अब तक हुई जांच की विस्तृत जानकारी भी रिपोर्ट के साथ प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट ने मामले से जुड़े सीसीटीवी फुटेज और अन्य संभावित साक्ष्यों को सुरक्षित रखने के भी निर्देश दिए हैं, ताकि जांच के दौरान कोई महत्वपूर्ण सबूत नष्ट न हो।
अगले सोमवार होगी अगली सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई अगले सोमवार के लिए निर्धारित की है। तब तक केंद्र सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार, श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट और एसआईटी को अपना-अपना जवाब और रिपोर्ट अदालत के समक्ष पेश करनी होगी।
किन याचिकाओं पर हो रही सुनवाई?
सुप्रीम कोर्ट जनहित याचिकाओं के एक समूह पर सुनवाई कर रहा है, जिनमें राम मंदिर ट्रस्ट को मिले दान और चढ़ावे के प्रबंधन में कथित वित्तीय अनियमितताओं की स्वतंत्र और अदालत की निगरानी में जांच की मांग की गई है।इन याचिकाओं में अधिवक्ता नरेंद्र कुमार गोस्वामी की रिट याचिका, अजय कुमार राय और अन्य की ओर से दायर आपराधिक रिट याचिका तथा राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) सांसद सुधाकर सिंह की अलग याचिका शामिल हैं।
याचिकाकर्ताओं की क्या है मांग?
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाया गया दान और चढ़ावा सार्वजनिक धार्मिक न्यास की संपत्ति है, इसलिए उसके प्रबंधन में पूरी पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए।अधिवक्ता नरेंद्र कुमार गोस्वामी की याचिका में मंदिर को मिले दान से जुड़े सभी अभिलेखों और साक्ष्यों को सुरक्षित रखने, चढ़ावे के प्रबंधन में पारदर्शिता बढ़ाने और कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की गई है।
याचिका में यह भी कहा गया है कि किसी सार्वजनिक मंदिर में देवता को चढ़ाया गया दान एक पवित्र न्यास संपत्ति होता है। ऐसे में उसका प्रबंधन करने वाले व्यक्ति कानूनी रूप से न्यासी की भूमिका निभाते हैं और उन पर पारदर्शिता, जवाबदेही तथा संपत्ति के संरक्षण की जिम्मेदारी होती है।
पहले तत्काल सुनवाई से किया था इनकार
इससे पहले, न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति शील नागू की पीठ के समक्ष इस मामले का उल्लेख किया गया था। उस समय याचिकाकर्ता ने आरोपों की गंभीरता का हवाला देते हुए तत्काल सुनवाई की मांग की थी, लेकिन अदालत ने तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया था। अब मामले पर नियमित सुनवाई शुरू हो चुकी है और शीर्ष अदालत ने सभी संबंधित पक्षों से जवाब तलब किया है।

