
शर्मिला धनखड़ ने रचा इतिहास, भारत को मिला पहला पैरा एथलेटिक्स गोल्ड
कॉमनवेल्थ गेम्स में शर्मिला धनखड़ ने भारत का पहला पैरा एथलेटिक्स गोल्ड जीता। शिल्पा शायला को ब्रॉन्ज और वल्लूरी अजय बाबू ने वेटलिफ्टिंग में सिल्वर मेडल हासिल किया।
भारत की पैरा एथलीट शर्मिला धनखड़ ने सोमवार को कॉमनवेल्थ गेम्स में इतिहास रचते हुए देश के लिए पहला पैरा एथलेटिक्स स्वर्ण पदक जीत लिया। ग्लासगो में आयोजित महिलाओं की शॉट पुट F57 स्पर्धा में उन्होंने 9.81 मीटर का सीजन का सर्वश्रेष्ठ थ्रो कर गोल्ड मेडल अपने नाम किया। इस जीत के साथ भारत का पैरा एथलेटिक्स में कॉमनवेल्थ गेम्स पदक का 20 साल लंबा इंतजार भी खत्म हो गया।
शर्मिला का यह स्वर्ण भारत के लिए मौजूदा खेलों का दूसरा गोल्ड मेडल भी है। इससे पहले वह इसी साल फाजा इंटरनेशनल पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में भी स्वर्ण जीत चुकी हैं। 2022 के बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स में वह चौथे स्थान पर रही थीं, लेकिन इस बार उन्होंने शानदार वापसी करते हुए इतिहास अपने नाम कर लिया।
नाटकीय घटनाक्रम के बाद शिल्पा को मिला ब्रॉन्ज
महिलाओं की इसी शॉट पुट F57 स्पर्धा में भारत की शिल्पा शायला ने भी कांस्य पदक जीता। हालांकि, उनका पदक बेहद नाटकीय घटनाक्रम के बाद पक्का हुआ।शिल्पा ने 7.26 मीटर का व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया था, लेकिन शुरुआती नतीजों में वह चौथे स्थान पर थीं। तीसरे स्थान पर नाइजीरिया की यूचेरिया इयियाजी को रखा गया था।
इसके बाद भारतीय दल ने आधिकारिक आपत्ति दर्ज कराई। समीक्षा के दौरान नाइजीरियाई खिलाड़ी के एकमात्र वैध थ्रो को फाउल करार दिया गया, जिसके बाद रैंकिंग में बदलाव हुआ और शिल्पा को चौथे स्थान से तीसरे स्थान पर प्रमोट करते हुए ब्रॉन्ज मेडल दे दिया गया।
मेडल मिलने के बाद शिल्पा भावुक हो गईं और उनकी आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े। उन्होंने शर्मिला धनखड़ के साथ इस ऐतिहासिक उपलब्धि का जश्न मनाया। हालांकि, नाइजीरिया की ओर से इस फैसले के खिलाफ काउंटर प्रोटेस्ट किए जाने की संभावना जताई जा रही है।
दो साल की उम्र में पोलियो, अब बनीं गोल्ड मेडलिस्ट
F57 वर्गीकरण उन पैरा एथलीटों के लिए होता है, जिनके निचले अंगों में दिव्यांगता, अंगों की कमी या मांसपेशियों की ताकत में कमी होती है।शर्मिला धनखड़ को महज दो साल की उम्र में बाएं पैर में पोलियो हो गया था। कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने खेल को अपना लक्ष्य बनाया और अब कॉमनवेल्थ गेम्स में देश को पहला पैरा एथलेटिक्स गोल्ड दिलाकर इतिहास रच दिया।
वल्लूरी अजय बाबू ने वेटलिफ्टिंग में जीता सिल्वर
भारत के पदक अभियान में वल्लूरी अजय बाबू ने भी शानदार प्रदर्शन करते हुए पुरुषों की 79 किलोग्राम वेटलिफ्टिंग स्पर्धा में रजत पदक अपने नाम किया।अजय बाबू ने कुल 330 किलोग्राम वजन उठाया और स्वर्ण पदक से महज एक किलोग्राम पीछे रह गए। मलेशिया के एरी हिदायत मुहम्मद ने 331 किलोग्राम के कुल वजन के साथ गोल्ड मेडल जीता।
पिता के पदचिह्नों पर बेटे की बड़ी उपलब्धि
अजय बाबू की सफलता इसलिए भी खास रही क्योंकि उन्होंने अपने पिता श्रीनिवास राव की उपलब्धि को आगे बढ़ाया। श्रीनिवास राव ने 2010 दिल्ली कॉमनवेल्थ गेम्स में पुरुषों की 56 किलोग्राम वेटलिफ्टिंग स्पर्धा में कांस्य पदक जीता था।अब 16 साल बाद उनके बेटे ने रजत पदक जीतकर परिवार की पदक परंपरा को नई ऊंचाई दी। आखिरी लिफ्ट तक चले रोमांचक मुकाबले में अजय बाबू स्वर्ण के बेहद करीब पहुंचे, लेकिन एक किलोग्राम के अंतर से चूक गए।इन पदकों के साथ भारत की कुल पदक संख्या 10 पहुंच गई है, जिसमें 2 स्वर्ण पदक शामिल हैं।

