
सोनम वांगचुक बोले: छात्र आंदोलन के आगे झुकी सरकार, गांधीवादी राह जीती
एक्टिविस्ट ने केंद्रीय मंत्रियों की मौजूदगी में अपना 26 दिन का अनशन खत्म करने के फैसले का बचाव करते हुए कहा कि यह सरकार द्वारा प्रदर्शनकारियों की मांगों को स्वीकार करने का प्रतीक है और शिक्षा सुधारों की बस शुरुआत है।
Sonam Wangchuk: नीट-UG पेपर लीक विवाद और जंतर-मंतर पर 36 दिनों तक चले ऐतिहासिक छात्र आंदोलन के खत्म होने के बाद प्रसिद्ध जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने सोमवार को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की समाधि राजघाट जाकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। 26 दिनों का अनशन समाप्त करने और अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद वांगचुक ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि इस आंदोलन की सफलता ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि आज भी गांधी जी का अहिंसक मार्ग पूरी तरह प्रासंगिक है। केंद्रीय मंत्रियों जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह के हाथों अनशन तोड़ने पर हो रही आलोचनाओं का जवाब देते हुए वांगचुक ने स्पष्ट किया कि लद्दाखी परंपरा के अनुसार जब सरकार का कोई वरिष्ठ प्रतिनिधि आपके हाथों अनशन तुड़वाता है, तो इसे सरकार का झुकना और आंदोलनकारियों की मांगों की स्वीकारोक्ति माना जाता है।
"लद्दाख में इसे जीत माना जाता है" – अनशन पर वांगचुक का स्पष्टीकरण
केंद्रीय मंत्रियों की मौजूदगी पर उठ रहे सवालों पर सोनम वांगचुक ने लद्दाखी संस्कृति और परंपरा का हवाला देते हुए स्थिति साफ की।
झुकने का प्रतीक: उन्होंने कहा कि लद्दाख में जब कोई सरकारी प्रतिनिधि या वरिष्ठ नेता आंदोलनकारी को जूस पिलाकर अनशन खत्म करवाता है, तो माना जाता है कि सरकार ने आपकी मांगों के आगे घुटने टेक दिए हैं।
सफल प्रयोग: उन्होंने कहा कि दिल्ली में भले ही इसे अलग नजरिए से देखा जाए, लेकिन यह आंदोलनकारियों की नैतिक जीत का प्रतीक है।
गांधीवादी विचार की ताकत: वांगचुक ने कहा कि लोग कहते थे कि इस सरकार पर अहिंसक हथियारों का असर नहीं होगा, लेकिन दूसरों को चोट पहुंचाने के बजाय खुद को कष्ट देकर कठिन से कठिन दिल को भी पिघलाया जा सकता है।
"धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा महज शुरुआत, शिक्षा सुधार असली लक्ष्य"
पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर पूछे गए सवाल पर वांगचुक ने कहा कि यह आंदोलन का अंतिम पड़ाव नहीं बल्कि केवल एक शुरुआत है।
पारदर्शी व्यवस्था की मांग: उन्होंने कहा कि देश में बेहतर शिक्षा सुधार लागू होने चाहिए और किसी भी नए कानून को संसद में व्यापक चर्चा के बाद ही पास किया जाना चाहिए।
भय और भ्रष्टाचार मुक्त भारत: वांगचुक ने कहा कि देश में डर और भ्रष्टाचार का माहौल खत्म होना चाहिए, ताकि जनता अपनी सरकार से बेखौफ होकर प्यार कर सके।
संवैधानिक अधिकार: उन्होंने उम्मीद जताई कि केंद्र सरकार अपने लिखित आश्वासनों को पूरा करेगी और शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले छात्रों के खिलाफ दर्ज मुकदमे वापस लिए जाएंगे।
अस्पताल से मिली छुट्टी, 23 जुलाई को समाप्त हुआ था अनशन
उल्लेखनीय है कि सोनम वांगचुक 28 जून को जंतर-मंतर पर सीजेपी के आंदोलन में शामिल हुए थे और 26 दिनों तक भूख हड़ताल पर रहे थे।
पुलिसिया कार्रवाई: 18 जुलाई को दिल्ली पुलिस ने उन्हें जबरन हिरासत में लेकर सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया था, जिसके बाद अदालत के आदेश पर उन्हें गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल शिफ्ट किया गया।
सोमवार को मिली छुट्टी: स्वास्थ्य में सुधार के बाद सोमवार को उन्हें मेदांता अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया।
आंदोलन का समापन: केंद्र सरकार द्वारा सीजेपी की मुख्य मांगें स्वीकार किए जाने और NTA सुधार समिति के गठन के बाद 25 जुलाई (शनिवार) को 36 दिनों से जारी यह आंदोलन आधिकारिक रूप से समाप्त हो गया था।
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