
सोनम वांगचुक ने 26वें दिन तोड़ा अनशन, CJP और सोनम वांगचुक के रास्ते अलग?
देश में जारी शिक्षा व्यवस्था के संकट और पेपर लीक विवाद के बीच केंद्र सरकार को एक बड़ी सफलता मिली है। 26 दिनों से अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक ने सरकार की लिखित गारंटी के बाद अपना अनशन तोड़ दिया।
देश की चरमराती शिक्षा व्यवस्था, लगातार होते पेपर लीक और नीट परीक्षा से जुड़े विवादों को लेकर संसद से लेकर सड़कों तक जारी छात्र आंदोलन में गुरुवार देर रात एक बड़ा मोड़ आया। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संसद मार्च के बाद से देशव्यापी रूप ले चुके इस छात्र आंदोलन को नियंत्रित करने में नरेंद्र मोदी सरकार को पहली बड़ी कामयाबी हासिल हुई है। 26 दिनों से अनशन पर बैठे मशहूर शिक्षाविद और पर्यावरणविद सोनम वांगचुक ने आखिरकार सरकार के प्रतिनिधियों द्वारा तीन प्रमुख मांगों पर लिखित आश्वासन मिलने के बाद गुरुवार की देर रात अपनी भूख हड़ताल समाप्त कर दी।
हालांकि, जिस मोड़ पर सरकार ने राहत की सांस ली थी, ठीक वहीं से इस आंदोलन की दिशा दो हिस्सों में बंटती नजर आ रही है। CJP के मुखिया अभिजीत दीपके ने सोनम वांगचुक के साथ अपनी रणनीतिक प्राथमिकताओं को अलग करते हुए ऐलान किया है कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे तक जंतर-मंतर पर उनका धरना-प्रदर्शन पूरी मुस्तैदी से जारी रहेगा।
जेपी नड्डा खुद पहुंचे अस्पताल, पढ़कर सुनाया सरकारी आश्वासन पत्र
सोनम वांगचुक की बिगड़ती सेहत को देखते हुए केंद्र सरकार ने इस मामले को सुलझाने के लिए सीधे अपने कद्दावर मंत्रियों को मैदान में उतारा। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह खुद सरकार का आधिकारिक आश्वासन पत्र लेकर गुरुग्राम के उस निजी अस्पताल पहुंचे, जहां वांगचुक भर्ती थे।
अस्पताल के कमरे में जेपी नड्डा ने सोनम वांगचुक को पत्र सौंपने से पहले उसे पूरे सम्मान के साथ पढ़कर सुनाया। इसके बाद नड्डा ने अपने हाथों से वांगचुक को जूस पिलाकर उनका 26 दिनों से चला आ रहा कठिन अनशन तुड़वाया।
सरकार की ओर से दिए गए मुख्य आश्वासनों में तीन बातें शामिल हैं:
छात्रों पर मुकदमे नहीं: संसद मार्च और जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले छात्रों पर कोई पुलिस केस या कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी।
नीट सुसाइड मामलों में मुआवजा: पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ी के तनाव के कारण जान गंवाने वाले नीट अभ्यर्थियों के परिवारों को सरकार द्वारा उचित और सम्मानजनक मुआवजा दिया जाएगा।
संसद में चर्चा: आगामी सत्र में देश की शिक्षा व्यवस्था और पेपर लीक की रोकथाम पर संसद के भीतर एक सार्थक और विस्तृत बहस कराई जाएगी।
हिंसा की आशंका से चिंतित वांगचुक, बोले- 'जल्द जारी करूंगा वीडियो'
26 दिनों की लंबी भूख हड़ताल के बाद अनशन तोड़ने वाले सोनम वांगचुक ने सोशल मीडिया पर एक भावुक पोस्ट साझा की। इस पोस्ट में वे आंदोलन के दौरान संभावित हिंसा को लेकर काफी आशंकित और चिंतित नजर आए।
वांगचुक ने लिखा, “यह निर्णय देश में संभावित हिंसा को रोकने और विभिन्न शर्तों पर लंबी बातचीत के बाद लिया गया है। मैं बहुत जल्द एक विस्तृत वीडियो बनाकर इन शर्तों और पूरी प्रक्रिया के बारे में देश की जनता को बताऊंगा। इस बीच, मेरी आप सभी से हाथ जोड़कर अपील है कि किसी भी प्रकार की उकसावे वाली कार्रवाई या हिंसा को रोकने के लिए पूरी तरह सतर्क और अनुशासित रहें।”
बता दें कि सोनम वांगचुक को पहले जंतर-मंतर से उठाकर दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया था, लेकिन बाद में उनकी इच्छा के अनुसार उन्हें गुरुग्राम के एक निजी अस्पताल में शिफ्ट किया गया था।
CJP और वांगचुक के रास्ते क्यों हुए अलग?
अनशन भले ही टूट गया हो, लेकिन यह स्पष्ट हो गया है कि सोनम वांगचुक और कॉकरोच जनता पार्टी की प्राथमिकताओं में बड़ा अंतर आ चुका है। जहां सोनम वांगचुक छात्रों की सुरक्षा, आर्थिक सहायता और संवाद की प्रक्रिया पर ध्यान केंद्रित कर रहे थे, वहीं CJP इस मुद्दे पर कड़ा राजनीतिक रुख अपनाए हुए है।
CJP चीफ अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया पर और फिर एक वीडियो संदेश जारी कर वांगचुक के असाधारण साहस, त्याग और देशभक्ति की जमकर सराहना की। दीपके ने कहा कि वांगचुक ने अपनी जान दांव पर लगाकर सोई हुई देश की अंतरात्मा को जगाने का काम किया है। उन्होंने कहा कि वांगचुक का जीवन देश के लिए अमूल्य है और उनके अनशन समाप्त करने से पूरे देश की चिंता दूर हुई है।
लेकिन इसके साथ ही दीपके ने साफ कर दिया कि जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान अपने पद से इस्तीफा नहीं दे देते, तब तक जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण सत्याग्रह जारी रहेगा। पार्टी ने शुक्रवार को देश के हर जिले में व्यापक विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया है, जिसे प्रमुख विपक्षी दलों का भी जोरदार समर्थन मिल रहा है।
आगे क्या? बातचीत के दूसरे दौर पर टिकीं निगाहें
शुक्रवार को दिन में केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और कॉकरोच जनता पार्टी के शीर्ष नेताओं के बीच दूसरे दौर की बातचीत प्रस्तावित है। हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर न तो सरकार अपने कदम पीछे खींचने के मूड में है और न ही CJP अपने स्टैंड में कोई लचीलापन दिखाने को तैयार है। ऐसे में अनशन भले ही समाप्त हो गया हो, लेकिन छात्रों का यह गुस्सा आने वाले दिनों में देश के जिला मुख्यालयों पर बड़े जनांदोलन का रूप ले सकता है।

