अनशन से वांगचुक का स्वास्थ्य बिगड़ा, 20 जुलाई के संसद मार्च से पहले बढ़ी हलचल
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अनशन से वांगचुक का स्वास्थ्य बिगड़ा, 20 जुलाई के संसद मार्च से पहले बढ़ी हलचल

जंतर-मंतर पर 16 दिन से भूख हड़ताल कर रहे सोनम वांगचुक का वजन 8.2 किलो घट गया है। बिगड़ती सेहत के बीच बुद्धिजीवियों ने अनशन खत्म करने और सरकार से बातचीत की अपील की।


शिक्षाविद् और जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल के 16वें दिन उनका स्वास्थ्य लगातार बिगड़ता जा रहा है। जंतर-मंतर पर जारी इस आंदोलन के दौरान उनका वजन 8.2 किलोग्राम कम हो गया है और उनके रक्त में ग्लूकोज़ का स्तर घटकर 67 mg/dL रह गया है। यह जानकारी कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने सोमवार (13 जुलाई) को दी। पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने केंद्र सरकार से प्रदर्शनकारियों की मांगों पर तुरंत ध्यान देने की अपील करते हुए कहा कि "मानव जीवन दांव पर लगा है।"

इसी बीच दिन में कई प्रतिष्ठित नागरिकों ने प्रदर्शनकारियों से अपनी भूख हड़ताल समाप्त करने की अपील की। इनमें लेखिका अरुंधति रॉय, अभिनेता नसीरुद्दीन शाह, रत्ना पाठक शाह, अर्थशास्त्री जयति घोष सहित अनेक बुद्धिजीवी शामिल थे। हालांकि उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग का पूरा समर्थन भी किया।

संयुक्त बयान में हस्ताक्षरकर्ताओं ने कहा कि वे सरकार के खिलाफ इस आंदोलन का नेतृत्व करने के लिए प्रदर्शनकारियों के प्रति "अत्यंत आभारी" हैं, लेकिन उनकी लगातार बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति को लेकर गहरी चिंता भी व्यक्त करते हैं।बयान में कहा गया, "हम आपके उद्देश्य, दृढ़ संकल्प और साहस को सलाम करते हैं, जिसके साथ आप देशभर के छात्रों और युवाओं के लिए इस आंदोलन का नेतृत्व कर रहे हैं।"

भूख हड़ताल समाप्त करने की अपील

प्रदर्शनकारियों से उपवास समाप्त करने का आग्रह करते हुए बयान में कहा गया "हम आपसे अनुरोध करते हैं कि आगे की लंबी और कठिन लड़ाई को ध्यान में रखते हुए कृपया तुरंत अपनी भूख हड़ताल समाप्त करने पर विचार करें। यह संघर्ष एक मैराथन है, स्प्रिंट नहीं। आने वाले दिनों में हमें आपकी शक्ति, नेतृत्व और मार्गदर्शन की आवश्यकता होगी।"

सोनम वांगचुके के समर्थकों ने आशंका जताई कि यदि सरकार उनकी मांगों पर ध्यान नहीं देती, तो भूख हड़ताल पर बैठे लोगों की स्वास्थ्य स्थिति और अधिक गंभीर हो सकती है।उन्होंने दिल्ली के लोगों से भी 20 जुलाई को संसद के मानसून सत्र की शुरुआत के अवसर पर सीजेपी द्वारा प्रस्तावित संसद मार्च में बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील की।

इस बयान पर अरुंधति रॉय, नसीरुद्दीन शाह, रत्ना पाठक शाह और जयति घोष के अलावा शिक्षाविद् अनुराधा चेनॉय, निवेदिता मेनन, तनिका सरकार, आदित्य निगम, फिल्म निर्माता संजय काक, सामाजिक कार्यकर्ता ललिता रामदास, कविता श्रीवास्तव, नारीवादी मधु भूषण तथा सांस्कृतिक कार्यकर्ता अरुंधति घोष के हस्ताक्षर भी हैं।

AISA कार्यकर्ता दीपक अस्पताल में भर्ती

ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) के कार्यकर्ता दीपक, जो 28 जून से भूख हड़ताल पर थे, उनकी तबीयत बिगड़ने के बाद सोमवार को राम मनोहर लोहिया (RML) अस्पताल में भर्ती कराया गया।AISA ने बताया कि पिछले तीन दिनों में दीपक का लगभग 15 प्रतिशत वजन कम हो गया तथा उनका रक्तचाप गिरकर 80/40 mm Hg रह गया। अंगों को नुकसान पहुंचने के खतरे को देखते हुए डॉक्टरों ने उन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती होने की सलाह दी।

बाद में संगठन ने जानकारी दी कि डॉक्टरों के अनुसार दीपक हाइपोवोलेमिक शॉक (Hypovolemic Shock) से गुजर रहे हैं। यह एक गंभीर स्थिति है, जिसमें शरीर के महत्वपूर्ण अंगों तक पर्याप्त रक्त नहीं पहुंच पाता। फिलहाल उनका इलाज जारी है।

अन्य सदस्य जारी रखेंगे अनिश्चितकालीन उपवास

सीजेपी जंतर-मंतर पर NEET परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रही है।सोनम वांगचुक 28 जून को इस आंदोलन में शामिल हुए थे और तभी से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं। सोमवार को उनका रक्तचाप 107/70 mm Hg दर्ज किया गया।संगठन ने बताया कि उसके अन्य सदस्य नेहा, मनीष और आमीन भी अपनी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल जारी रखेंगे।

सरकार से बातचीत शुरू करने की मांग

प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए सीजेपी संस्थापक अभिजीत दिपके ने सवाल उठाया कि लंबे समय से चल रहे आंदोलन और प्रदर्शनकारियों की बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति के बावजूद सरकार ने अब तक उनसे बातचीत क्यों शुरू नहीं की।उन्होंने कहा, "मैं सरकार से अनुरोध करता हूं कि इसे अहंकार की लड़ाई न बनाए, क्योंकि यहां मानव जीवन दांव पर लगा है। गलती स्वीकार करना कमजोरी नहीं, बल्कि परिपक्वता, जवाबदेही और सही दिशा में सुधार का संकेत है। हमारी केवल एक ही मांग है—जवाबदेही।"

सरकार की उदासीनता पर सवाल

दिपके ने आरोप लगाया कि सोनम वांगचुक की लगातार बिगड़ती स्थिति के बावजूद केंद्र सरकार ने उनसे संवाद स्थापित करने की कोई पहल नहीं की।उन्होंने कहा, "यह कैसी सरकार है? सोनम वांगचुक इसी देश के नागरिक हैं। उन्होंने अपने कार्यों से भारत को वैश्विक पहचान दिलाई है। आज वे देश के छात्रों के लिए संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन सरकार ने उनसे मिलने के लिए एक भी मंत्री या प्रतिनिधिमंडल नहीं भेजा। सरकार की यह पूरी उदासीनता बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।"

उन्होंने यह भी कहा कि रमन मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित शिक्षाविद् और नवप्रवर्तक वांगचुक के स्वास्थ्य को लेकर सरकार की चिंता न होना दुखद है।

दिपके ने कहा,"अगर उनकी जान की कोई कीमत नहीं है, तो फिर हमारी क्या होगी... हम तो कॉकरोच हैं।"उन्होंने बताया कि संगठन ने कई बार वांगचुक से उपवास समाप्त करने का आग्रह किया, लेकिन उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि जब तक सरकार उनकी मांगें स्वीकार नहीं करती, वे पीछे नहीं हटेंगे।

अन्ना हज़ारे के आंदोलन से तुलना

सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल 16वें दिन में प्रवेश कर चुकी है। इस दौरान इसकी तुलना वर्ष 2011 में जनलोकपाल की मांग को लेकर अन्ना हज़ारे के 12 दिन के अनशन से भी की जा रही है।अन्ना हज़ारे ने 5 अप्रैल 2011 को अनशन शुरू किया था और चार दिन बाद सरकार द्वारा समिति गठित किए जाने के बाद उसे समाप्त कर दिया था। बाद में अगस्त 2011 में उन्होंने पुनः 12 दिनों तक भूख हड़ताल की थी।

जब दिपके से पूछा गया कि अन्ना हज़ारे का आंदोलन 12 दिन में समाप्त हो गया था, जबकि वांगचुक अब भी उपवास पर क्यों हैं, तो उन्होंने कहा,"वह एक अलग भारत था... आज के भारत में मानव जीवन की उतनी कीमत नहीं रह गई है।"उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारी अभी भी सरकार की प्रतिक्रिया का इंतजार कर रहे हैं और उम्मीद करते हैं कि सरकार स्थिति को और गंभीर होने देने के बजाय बातचीत शुरू करेगी।

20 जुलाई के संसद मार्च में विपक्षी दलों की भागीदारी

दिपके ने बताया कि 20 जुलाई, यानी संसद के मानसून सत्र के पहले दिन, जंतर-मंतर से संसद तक प्रस्तावित मार्च में कई विपक्षी दलों के नेताओं के शामिल होने की संभावना है।

सीजेपी की प्रवक्ता विजेता दहिया ने कहा कि जब तक सरकार परीक्षा अनियमितताओं से प्रभावित छात्रों की अनदेखी करती रहेगी, तब तक सोनम वांगचुक से भूख हड़ताल समाप्त करने का अनुरोध करना संभव नहीं है।

उन्होंने देशभर के लोगों से संसद मार्च में शामिल होने की अपील करते हुए कहा कि व्यापक जनसमर्थन ही सरकार को प्रदर्शनकारियों से बातचीत के लिए मजबूर कर सकता है।संगठन ने इस मार्च के समर्थन में मिस्ड कॉल अभियान शुरू करने और "आई सपोर्ट सोनम" सोशल मीडिया अभियान में भाग लेने की भी अपील की।

आतिशी और अन्य नेताओं ने जताया समर्थन

इससे पहले दिन में आम आदमी पार्टी (AAP) के एक प्रतिनिधिमंडल ने, जिसका नेतृत्व दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी कर रही थीं, जंतर-मंतर पहुंचकर आंदोलन को समर्थन दिया।

सीपीआई(एम) सांसद अमरा राम तथा आंध्र प्रदेश और राजस्थान के पार्टी नेताओं ने भी प्रदर्शनकारियों के प्रति एकजुटता व्यक्त की।आतिशी ने सोशल मीडिया मंच X पर लिखा कि बार-बार होने वाले पेपर लीक देश के करोड़ों युवाओं के भविष्य को बर्बाद कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सोनम वांगचुक और कई छात्र पिछले 16 दिनों से केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर भूख हड़ताल पर बैठे हैं। उन्होंने लिखा, "युवाओं के अधिकारों की इस लड़ाई में हम उनके साथ हैं। इस तानाशाही भाजपा सरकार को झुकना ही पड़ेगा।"

गौरतलब है कि सीजेपी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के साथ-साथ कथित परीक्षा अनियमितताओं के कारण आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को एक करोड़ रुपये मुआवजा देने की भी मांग कर रही है। संगठन ने 20 जुलाई को संसद तक शांतिपूर्ण मार्च का भी ऐलान किया है।

(एजेंसी इनपुट्स सहित)

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