
स्वास्थ्य पर बोले वांगचुक- कमजोरी है, लेकिन अनशन जारी रहेगा
दिल्ली के जंतर-मंतर पर 19वें दिन भी सोनम वांगचुक का अनशन जारी है। उन्होंने अनशन खत्म करने से इनकार करते हुए 20 जुलाई के संसद मार्च में शामिल होने की अपील की।
जंतर-मंतर पर पिछले 19 दिनों से अनशन कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने स्पष्ट कर दिया है कि वह फिलहाल अपना अनशन समाप्त नहीं करेंगे। विपक्षी नेताओं, फिल्मी हस्तियों, आम लोगों और अदालत में दायर अपीलों के बावजूद उन्होंने कहा कि उनकी मांगें पूरी होने तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
अनशन खत्म करने से नहीं बदलेगी स्थिति
अनशन के 18वें दिन जारी किए गए एक वीडियो संदेश में वांगचुक ने कहा कि उन्हें हजारों लोगों के संदेश मिले हैं, जिनमें उनसे अनशन समाप्त करने की अपील की गई है। उन्होंने कहा कि कई वरिष्ठ लोगों, नेताओं और शुभचिंतकों ने चिंता जताई है, जबकि कुछ लोगों ने अदालत से उन्हें जबरन भोजन कराने की मांग भी की है।
वांगचुक ने कहा कि यदि वह अभी अनशन तोड़ देते हैं, तो इससे सरकार को यह संदेश जाएगा कि जवाबदेही तय करने की कोई जरूरत नहीं है। उनके अनुसार, इससे आंदोलन का उद्देश्य कमजोर पड़ जाएगा और सरकार बिना जवाब दिए आगे बढ़ जाएगी।
'कमजोरी है, लेकिन जान का खतरा नहीं'
स्वास्थ्य को लेकर उठ रही चिंताओं पर वांगचुक ने कहा कि उनका शरीर जरूर कमजोर हो रहा है, लेकिन उनकी स्थिति इतनी गंभीर नहीं है कि अगले कुछ दिनों में जान का खतरा हो। उन्होंने बताया कि अनशन के दौरान लगातार मेडिकल जांच कराई जा रही है और अब तक अधिकांश रिपोर्ट सामान्य रही हैं।उन्होंने कहा कि 18वें दिन कराई गई ईसीजी रिपोर्ट भी संतोषजनक रही। हालांकि मांसपेशियों में कमजोरी आ रही है, लेकिन उनका दिल और शरीर की मूल कार्यक्षमता अभी भी ठीक है। वांगचुक ने विश्वास जताया कि वह अभी कई दिनों तक अनशन जारी रखने में सक्षम हैं।
20 जुलाई को संसद मार्च में शामिल होने की अपील
सोनम वांगचुक ने लोगों से अनशन खत्म करने की अपील करने के बजाय 20 जुलाई को प्रस्तावित संसद मार्च में बड़ी संख्या में शामिल होने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि यदि भारी संख्या में लोग जुटेंगे तो सरकार तक एक मजबूत संदेश पहुंचेगा।
स्कूलों और विश्वविद्यालयों से भी की विशेष अपील
वांगचुक ने स्कूलों और विश्वविद्यालयों से भी 20 जुलाई को "एक्सपीरियेंशियल एजुकेशन डे" के रूप में मनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि छात्र इस अवसर पर लोकतंत्र और राजनीतिक विज्ञान का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त कर सकते हैं।उनके मुताबिक, यह केवल एक प्रदर्शन नहीं बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया को समझने और उसका हिस्सा बनने का अवसर होगा। उन्होंने कहा कि छात्र इतिहास के एक महत्वपूर्ण क्षण के साक्षी बन सकते हैं और सीख सकते हैं कि लोकतंत्र में जनता अपनी आवाज किस तरह बुलंद करती है।

