
अनशन तोड़ने को तैयार सोनम वांगचुक, सरकार के सामने रखीं 3 बड़ी शर्तें
सोनम वांगचुक ने अनशन खत्म करने के लिए शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही और सांसदों से आश्वासन समेत तीन शर्तें रखीं। संसद मार्च से पहले उनका पत्र सामने आया।
सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने अपना भूख हड़ताल समाप्त करने के लिए सरकार के सामने तीन प्रमुख शर्तें रखी हैं। उन्होंने 19 जुलाई को लिखे एक पत्र में कहा कि यदि सरकार शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में ठोस कदम उठाती है, तो वह 20 जुलाई को अपना अनशन समाप्त करने पर विचार कर सकते हैं।
यह पत्र ऐसे समय सामने आया है, जब सोमवार से संसद का मॉनसून सत्र शुरू हो रहा है और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के बैनर तले संसद मार्च की तैयारी की गई है।
अस्पताल से लिखा पत्र
वांगचुक ने पत्र में दावा किया कि वह सफदरजंग अस्पताल में "अवैध हिरासत" की स्थिति में हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अस्पताल में उनकी गतिविधियों, भाषण और लोगों से बातचीत पर भी रोक लगाई गई है।
अनशन खत्म करने के लिए क्या हैं तीन शर्तें?
वांगचुक ने अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए कहा कि यदि निम्नलिखित शर्तें पूरी होती हैं, तो वह अपना अनशन समाप्त कर सकते हैं।
1. शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही
सरकार हाल के पेपर लीक जैसे मामलों में शिक्षा व्यवस्था की जवाबदेही स्वीकार करे और इस मुद्दे को गंभीरता से उठाए।
2. संसद के बाहर सांसदों का आश्वासन
यदि वह और CJP नेतृत्व संसद के द्वार तक पहुंचते हैं, तो विभिन्न राजनीतिक दलों के सांसद और नेता उनसे मिलकर भरोसा दें कि शिक्षा में जवाबदेही का मुद्दा संसद में उठाया जाएगा।
3. अस्पताल में आकर मुलाकात
यदि स्वास्थ्य कारणों से वह संसद तक नहीं पहुंच पाते, तो सांसद और विभिन्न दलों के नेता अस्पताल आकर उनसे मिलें और यही आश्वासन दें।
पत्नी गीतांजलि ने भी दोहराई मांग
रविवार को जंतर-मंतर पर वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंग्मो ने कहा कि यदि राजनीतिक दलों के नेता अस्पताल जाकर सोनम वांगचुक से मिलते हैं और उन्हें भरोसा दिलाते हैं कि संसद के मॉनसून सत्र में शिक्षा क्षेत्र में जवाबदेही का मुद्दा उठाया जाएगा, तो वह अपना अनशन समाप्त कर देंगे।
शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अपील
गीतांजलि ने बताया कि सोनम वांगचुक ने अपने समर्थकों से सोमवार को प्रस्तावित 'चलो संसद' मार्च को पूरी तरह शांतिपूर्ण और अनुशासित तरीके से निकालने की अपील की है।उन्होंने कहा कि आंदोलन का इस्तेमाल किसी भी गलत उद्देश्य के लिए नहीं होना चाहिए।
कैसी है सोनम वांगचुक की तबीयत?
गीतांजलि के अनुसार, सोनम वांगचुक की हालत फिलहाल स्थिर है।उन्होंने बताया कि उन्होंने वांगचुक को किसी निजी अस्पताल में स्थानांतरित कराने के लिए उच्च न्यायालय में प्रयास किया, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली।
संसद मार्च से पहले CJP का दावा
CJP के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने दावा किया कि संसद मार्च से पहले ही जंतर-मंतर और उसके आसपास करीब 20,000 लोग जुट चुके हैं।उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि अब शिक्षा व्यवस्था और पेपर लीक जैसे मुद्दों पर सरकार, विशेषकर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, को जवाबदेही तय करनी होगी।
क्या है पूरा मामला?
सोनम वांगचुक शिक्षा व्यवस्था में सुधार, पेपर लीक जैसे मामलों में जवाबदेही तय करने और संबंधित मुद्दों को संसद में उठाने की मांग को लेकर लंबे समय से अनशन पर हैं। अब उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि यदि सरकार या सांसद उनकी मांगों पर सार्वजनिक आश्वासन देते हैं, तो वह अपना अनशन समाप्त करने को तैयार हैं।

