
सोनिया गांधी की किताब छापने से पेंगुइन ने क्यों किया इनकार?
सोनिया गांधी की यह किताब लंबे समय से चर्चा में है। इसे उनके जीवन, परिवार, राजनीति और भारत में बिताए दशकों के अनुभवों का बेहद निजी और विस्तृत दस्तावेज माना जा रहा है।
कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी की बहुप्रतीक्षित संस्मरण पुस्तक को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने सोनिया गांधी की किताब Belonging: A Journey of Love in India को भारत में प्रकाशित न करने का फैसला किया है।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने मैन्युस्क्रिप्ट के एक हिस्से में कुछ संपादकीय बदलाव और कटौती का सुझाव दिया था। सोनिया गांधी ने इन बदलावों को स्वीकार नहीं किया। इसके बाद पेंगुइन इंडिया ने किताब को भारत में प्रकाशित नहीं करने का फैसला किया।
किताब को लेकर उत्सुकता
सोनिया गांधी की यह किताब लंबे समय से चर्चा में है। इसे उनके जीवन, परिवार, राजनीति और भारत में बिताए दशकों के अनुभवों का बेहद निजी और विस्तृत दस्तावेज माना जा रहा है। किताब का अंतरराष्ट्रीय प्रकाशन अमेरिका की अल्फ्रेड ए. नॉफ की ओर से किया जाना है, जो पेंगुइन रैंडम हाउस का ही हिस्सा है। किताब की रिलीज 10 नवंबर के लिए तय है और शुरुआती प्रिंट रन एक लाख प्रतियों का बताया गया है।
खास बात यह है कि किताब को केवल राजनीतिक संस्मरण के तौर पर नहीं देखा जा रहा। प्रकाशक की ओर से जारी विवरण में सोनिया गांधी ने कहा था कि उनके परिवार के बारे में बहुत कुछ लिखा गया है, लेकिन उनके परिवार के लोगों की प्रेरणाओं, फैसलों और मानवीय कमजोरियों को समझने वाली कहानियां बहुत कम सामने आई हैं। उन्होंने यह भी कहा था कि उनकी कहानी पाठकों को उन सामाजिक और राजनीतिक बदलावों को देखने का एक अलग नजरिया देगी, जिन्हें उन्होंने छह दशकों तक करीब से महसूस किया। यही वजह है कि किताब को लेकर राजनीतिक और साहित्यिक, दोनों हलकों में काफी उत्सुकता है।
दूसरे प्रकाशकों में किताब छापने की होड़
अब पेंगुइन इंडिया के पीछे हटने के बाद भारत में इस किताब के प्रकाशन अधिकारों को लेकर दूसरे प्रकाशकों की दिलचस्पी बढ़ गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, हार्पर कॉलिन्स इस किताब को भारत में प्रकाशित और वितरित करने के समझौते के काफी करीब है। यानी पेंगुइन के साथ बातचीत खत्म होने के बावजूद किताब का भारत में आना फिलहाल रुकता हुआ नहीं दिख रहा है।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बड़ा सवाल जरूर खड़ा कर दिया है—आखिर मैन्युस्क्रिप्ट के उस हिस्से में ऐसा क्या था, जिसे लेकर संपादकीय बदलाव और कटौती की जरूरत महसूस की गई? और सोनिया गांधी ने उन बदलावों को स्वीकार करने से इनकार क्यों किया?
अब सबकी नजर इस बात पर है कि किताब आखिर भारत में किस प्रकाशक के जरिए सामने आती है और जब यह प्रकाशित होगी, तो इसमें सोनिया गांधी अपने जीवन, गांधी परिवार और भारतीय राजनीति के किन पहलुओं पर खुलकर बात करती हैं।
प्रकाशक की सफाई
अब पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने इस पूरे मामले पर सफाई दी है। कंपनी ने कहा कि भारत में Belonging की प्रकाशक पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया नहीं है। साथ ही उसने कहा कि यह कहना कि लेखिका ने संपादकीय बदलाव स्वीकार नहीं किए, इसलिए किताब प्रकाशित नहीं की गई—पूरी स्थिति को सही तरीके से पेश नहीं करता।
पेंगुइन ने यह भी कहा कि तथ्यों की जांच करना और किताब के हित में लेखकों को सुझाव देना प्रकाशन प्रक्रिया का सामान्य हिस्सा है।

