सोनिया गांधी खुद बताएंगी अपनी कहानी,  ‘Belonging’ में मिलेगी निजी सफर की झलक
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सोनिया गांधी खुद बताएंगी अपनी कहानी, ‘Belonging’ में मिलेगी निजी सफर की झलक

अपनी निजता को लेकर सदैव सतर्क रहने वाली नेता के रूप में जानी जाने वाली सोनिया गांधी के लिए "बिलॉन्गिंग: अ जर्नी ऑफ लव"उस चुप्पी को तोड़ने की एक सचेत कोशिश है।


वरिष्ठ कांग्रेस नेता सोनिया गांधी ने अपने सार्वजनिक जीवन का अधिकांश समय विभिन्न पहचानों के साथ बिताया है—नेहरू-गांधी परिवार की इटली में जन्मी बहू, कांग्रेस की प्रमुख नेता और वह राजनेता, जिन्होंने 2004 में प्रधानमंत्री का पद ठुकरा दिया था। अब, जब उनकी यादों पर आधारित पुस्तक ‘"बिलॉन्गिंग: अ जर्नी ऑफ लव" (Belonging: A Journey of Love) 10 नवंबर को प्रकाशित होने जा रही है, तो पार्टी के नेताओं और लेखकों का मानना है कि यह पुस्तक वह पक्ष उजागर कर सकती है, जो पहले शायद ही कभी सामने आया हो—उन पहचानों के पीछे छिपी वास्तविक महिला।

राजनीतिक पहचान के पीछे की महिला

सोनिया गांधी को “मजबूत इरादों वाली महिला” बताते हुए एआईसीसी के मीडिया एवं प्रचार विभाग के अध्यक्ष पवन खेड़ा ने कहा कि यह पुस्तक पाठकों को उनकी राजनीतिक पहचान के पीछे छिपे इंसान को जानने का अवसर प्रदान करेगी।

खेड़ा ने सोशल मीडिया पर लिखा, “वह डटी रहीं, कभी खुद को पीड़ित नहीं दिखाया और न ही अपने साथ हुई क्रूरता या कड़वाहट को अपनी पहचान बनने दिया। उन्होंने गरिमापूर्ण चुप्पी बनाए रखी। उन्होंने 2004 और 2009 में कांग्रेस को दो शानदार जीत दिलाईं। उन्हें मात्र ‘इटैलियन-भारतीय राजनेता’ और ‘गांधी परिवार की मुखिया’ तक सीमित नहीं किया जा सकता।”कांग्रेस की सोशल मीडिया एवं डिजिटल प्लेटफॉर्म की अध्यक्ष सुप्रिया श्रीनेत ने इस संस्मरण को कहानियों और महत्वपूर्ण जानकारियों का संभावित ‘खजाना’ बताया है। उन्होंने इसे भारत के राजनीतिक और सामाजिक इतिहास की कुछ सर्वाधिक महत्वपूर्ण घटनाओं का प्रत्यक्षदर्शी वृत्तांत करार दिया।

अपनी निजता को लेकर सदैव सतर्क रहने वाली नेता के रूप में जानी जाने वाली सोनिया गांधी के लिए ‘बिलॉन्गिंग’ उस चुप्पी को तोड़ने की एक सचेत कोशिश है। 544 पृष्ठों की यह पुस्तक सामान्य राजनीतिक चर्चाओं से हटकर उन निजी अनुभवों, रिश्तों, क्षतियों और निर्णयों पर प्रकाश डालती है, जिन्होंने इटली से भारतीय राजनीति के केंद्र तक उनके सफर को आकार दिया।

इटली से भारत तक
अल्फ्रेड ए. नॉफ द्वारा प्रकाशित पुस्तक ‘बिलॉन्गिंग’ सोनिया गांधी के जीवन-यात्रा को दर्शाती है—इटली के एक छोटे से नगर में उनके बचपन से लेकर भारत में राजीव गांधी की पत्नी और इंदिरा गांधी की बहू के रूप में बिताए गए वर्षों तक।

यह संस्मरण 1965 में कैम्ब्रिज में राजीव गांधी से उनकी मुलाकात से आरंभ होता है, जब वे मात्र 19 वर्ष की छात्रा थीं। इसमें उन्होंने एक सर्वथा नई संस्कृति में स्वयं को ढालने—हिंदी सीखने, साड़ी पहनने और भारतीय भोजन से परिचित होने—तथा देश के सर्वाधिक प्रतिष्ठित राजनीतिक परिवारों में से एक में धीरे-धीरे अपनी जगह बनाने की प्रक्रिया का वर्णन किया है।पुस्तक में उनकी “प्रभावशाली सास” और भारत की प्रथम महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के साथ उनके संबंधों का भी उल्लेख है।

नॉफ के विवरण के अनुसार, यह संस्मरण सोनिया के उस सफर को प्रस्तुत करता है, जब वे राजीव के साथ आत्मविश्वास अर्जित कर रही थीं और तभी गांधी परिवार पर एक के बाद एक कई दुखद घटनाएँ घटित हुईं। राजीव के छोटे भाई संजय गांधी की हवाई दुर्घटना में मृत्यु के पश्चात 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या हो गई। इसके बाद सोनिया की आशंकाओं के बावजूद राजीव ने प्रधानमंत्री का पद स्वीकार किया। सात वर्ष बाद एक और त्रासदी ने उनके जीवन को नया मोड़ दिया, जब चुनाव प्रचार के दौरान एक आत्मघाती हमलावर ने राजीव गांधी की हत्या कर दी।

राजनीतिक विरासत
इस संस्मरण का सर्वाधिक ध्यान आकर्षित करने वाला अंश सोनिया गांधी का वह अपना बयान होगा, जिसमें उन्होंने 2004 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के नेतृत्व वाले संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) की विजय के पश्चात प्रधानमंत्री का पद अस्वीकार करने के अपने निर्णय की व्याख्या की है। इस निर्णय पर दो दशकों से अधिक समय से बहस होती रही है, किंतु यह संस्मरण इसके पीछे की वजहों पर उनका अपना दृष्टिकोण प्रस्तुत करने का वादा करता है।

उनका निजी पक्ष
परिवार को मात्र उसकी राजनीतिक विरासत के माध्यम से देखने के बजाय सोनिया ने परिवार की कमजोरियों, संबंधों, सुखों और दुखों पर ध्यान केंद्रित करने का प्रयास किया है।

सोनिया गांधी ने नोफ़ के ज़रिए जारी एक बयान में कहा, “मेरे परिवार के बारे में बहुत कुछ लिखा गया है, लेकिन कुछ ही कहानियां उनके इरादों, उनके कामों और यहाँ तक कि उनकी इंसानी कमियों की सच्चाई तक पहुँच पाईं। कई मायनों में, यह किताब उनकी इंसानियत को एक श्रद्धांजलि है। मेरी कहानी पढ़ने वालों को उन सामाजिक और राजनीतिक बदलावों का एक अनोखा नज़रिया भी देती है जो मैंने अपने खूबसूरत देश में छह दशकों में देखे हैं।”

‘अपनी ज़िंदगी के बारे में लिखना मेरे लिए आसान नहीं’
सोनिया गांधी ने कहा, “अपनी ज़िंदगी के बारे में लिखना मेरे लिए आसान नहीं था। इसका मतलब था खुद को सबके सामने खोलना, और उन पलों व अनुभवों को साझा करना जिन्हें मैंने हमेशा अपने मन में गहराई से छिपाकर रखा था।” “फिर भी, जैसे-जैसे मैं राजनीति की दुनिया से दूर होती गई और मैंने जो कुछ भी देखा था, उस पर पीछे मुड़कर देखा, तो मेरी कहानी में गुंथे हुए प्यार और वफ़ादारी के धागे खुद-ब-खुद साफ़ होने लगे—इटली के एक छोटे से शहर में बिताए मेरे बचपन की सादगी से लेकर, भारत में राजीव गांधी की पत्नी और प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की बहू के तौर पर बिताए सालों की जटिलताओं तक।”

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