
आजम खान के समर्थन में दिल्ली के जंतर-मंतर पर सपा का बड़ा प्रदर्शन
UP चुनाव से पहले दिल्ली के जंतर-मंतर पर सपा का प्रदर्शन। आजम खान की रिहाई और जौहर यूनिवर्सिटी के 38 कमरों को गिराने का नोटिस वापस लेने की मांग की गई।
Jantar Mantar Protest: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों की सरगर्मियों के बीच रविवार, 20 सितंबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने एक बड़ा विरोध-प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं के हाथों में बैनर और पोस्टर थे, जिन पर "मोहम्मद आजम खान को रिहा करो" के नारे लिखे थे। साथ ही, समर्थकों ने रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी के 38 भवनों/कमरों को गिराने के प्रशासनिक आदेश को तुरंत वापस लेने और आजम खान के बेटे अब्दुल्ला आजम के खिलाफ दर्ज मामलों को खत्म करने की मांग उठाई। बीते कुछ समय में यह पहला मौका है जब सपा ने आजम खान के मुद्दे पर दिल्ली के केंद्र में इस तरह का कोई विरोध-प्रदर्शन आयोजित किया है।
प्रशासनिक रोक और पुलिस बैरिकेडिंग
प्रदर्शन स्थल पर मौजूद एक सपा कार्यकर्ता ने बताया कि 20 सितंबर को जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने की प्रशासनिक अनुमति (Permission) ली गई थी। हालांकि, जब कार्यकर्ता मौके पर पहुंचे तो वहां भारी संख्या में पुलिस बल तैनात कर दिया गया था और बैरिकेडिंग कर दी गई थी। इसके बावजूद, कार्यकर्ताओं ने अपनी मांगों को लेकर आवाज उठाई और अधिकारियों को ज्ञापन सौंपने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई।
राष्ट्रपति से हस्तक्षेप की मांग: SC जज के नेतृत्व में SIT गठित हो
सपा के राष्ट्रीय सचिव और जौनपुर सदर के पूर्व विधायक मोहम्मद अरशद खान की ओर से राष्ट्रपति को एक पत्र भेजा गया है। पत्र में मुख्य रूप से निम्नलिखित मांगें रखी गई हैं:
जौहर यूनिवर्सिटी ध्वस्तीकरण पर रोक: पार्टी का कहना है कि 38 भवनों के ध्वस्तीकरण की कार्रवाई से केवल इमारतें ही प्रभावित नहीं होंगी, बल्कि हजारों विद्यार्थियों की शिक्षा, शिक्षकों के रोजगार और शोध कार्यों पर भी बुरा असर पड़ेगा। इसके वैधानिक आधार की समीक्षा होने तक कार्रवाई रोकी जाए।
350 मुकदमों की निष्पक्ष जांच: सपा का आरोप है कि 2019 में महज 3 से 4 महीने की अवधि के भीतर आजम खान, उनके बेटे अब्दुल्ला आजम और परिवार के खिलाफ लगभग 350 मुकदमे दर्ज किए गए, जो राजनीतिक प्रतिशोध को दर्शाता है।
समयबद्ध SIT जांच: पार्टी ने मांग की है कि सुप्रीम कोर्ट के किसी सेवारत या सेवानिवृत्त जज की अध्यक्षता में एक स्वतंत्र स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) बनाई जाए, जो 3-4 महीने में सभी मुकदमों की एक साथ जांच पूरी करे।
यूपी चुनाव से पहले बड़ा राजनीतिक दांव
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर प्रदेश चुनावों से ठीक पहले दिल्ली में किया गया यह प्रदर्शन समाजवादी पार्टी की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। आजम खान के मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठाकर पार्टी अपने कोर मुस्लिम वोट बैंक को एकजुट करने और सरकार के खिलाफ एक कड़ा संदेश देने की कोशिश कर रही है। प्रदर्शनकारियों ने उम्मीद जताई है कि एक निष्पक्ष जांच के बाद आजम खान और उनके परिवार को सभी मामलों में अदालत से राहत और बरी किया जाएगा।
Next Story

