
एक राज्य का बदलेगा नाम, संसद में मचेगा घमासान, आज अमित शाह के एंट्री की उम्मीद!
मानसून सत्र में सोमवार की कार्यवाही हंगामेदार रहने के आसार हैं। जंतर-मंतर पर छात्रों पर पुलिस लाठीचार्ज और पैलेट गन के इस्तेमाल पर विपक्ष अमित शाह से संसद में सीधे जवाब और जवाबदेही पर अड़ा हुआ है।
संसद के मानसून सत्र में सोमवार की कार्यवाही बेहद हंगामेदार रहने वाली है। एक तरफ जहां पूरा विपक्ष जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारी छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई के मुद्दे पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से संसद में जवाब देने की मांग पर अड़ा हुआ है, वहीं दूसरी तरफ केंद्र सरकार कई महत्वपूर्ण विधेयकों को लोकसभा और राज्यसभा में पेश करने की तैयारी कर चुकी है। विपक्षी दलों, विशेषकर कांग्रेस और उसके सहयोगियों ने सरकार द्वारा प्रस्तावित विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक (FCRA Bill) का संसद के पटल पर पुरजोर विरोध करने का ऐलान किया है। इससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि संसद में सरकार और विपक्ष के बीच सीधा टकराव देखने को मिलेगा।
'छात्रों पर लाठी और पैलेट गन की जवाबदेही तय हो': राहुल गांधी का सीधा हमला
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर सरकार और गृह मंत्रालय के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट करते हुए कहा कि दिल्ली में निर्दोष छात्रों पर पुलिस द्वारा लाठियां, आंसू गैस और पैलेट गन चलाए जाने की घटना को 13 दिन बीत चुके हैं, लेकिन देश के गृह मंत्री अमित शाह ने इस पर अब तक एक शब्द भी नहीं कहा है।
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि देश के युवाओं और छात्रों पर हुए इस अत्याचार की जवाबदेही तय करनी होगी और गृह मंत्री को संसद में आकर इस मुद्दे पर देश को जवाब देना ही पड़ेगा। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी तंज कसते हुए कहा कि प्रधानमंत्री इस गंभीर मुद्दे पर माफी मांगने के बजाय दूसरों को 'क्षमा' बांटने का उपदेश दे रहे हैं।
इसके अलावा, राहुल गांधी ने प्रयागराज में आयोजित 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम का जिक्र करते हुए एक भावुक बात साझा की। उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम के दौरान उन्हें एक छात्र मिला, जिसकी आपबीती सुनकर यह साफ हो गया कि यह सिर्फ किसी एक छात्र की व्यक्तिगत विफलता नहीं है, बल्कि पूरी व्यवस्था की हार है। राहुल गांधी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वे देश के छात्रों की मांगों के साथ पूरी ताकत से खड़े हैं और उनके अधिकारों की लड़ाई को संसद से लेकर सड़क तक मजबूती से लड़ेंगे।
FCRA बिल और परिसीमन पर विपक्ष की तीखी आपत्ति
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने केरल के अलाप्पुझा में संवाददाताओं से बातचीत करते हुए प्रस्तावित FCRA संशोधन विधेयक पर अपनी पार्टी का रुख बिल्कुल साफ कर दिया। उन्होंने कहा कि यदि केंद्र सरकार संसद में इस विधेयक को पेश करती है, तो कांग्रेस और अन्य सभी विपक्षी दल एकजुट होकर इसका तीखा विरोध करेंगे।
केसी वेणुगोपाल ने आरोप लगाया कि प्रस्तावित FCRA कानून का मूल मकसद देश के धार्मिक अल्पसंख्यकों, नागरिक समाज संगठनों और गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) को निशाना बनाना और उनकी स्वायत्तता पर हमला करना है। उन्होंने कहा कि विपक्ष किसी भी कीमत पर इस कानून को संसद से पारित नहीं होने देगा।
संसद में जारी गतिरोध पर बात करते हुए वेणुगोपाल ने कहा कि जब छात्र पुलिस की बर्बरता पर सवाल उठा रहे हैं, तो सरकार को संसद के सामने पारदर्शी तरीके से यह स्पष्ट करना चाहिए कि आखिर छात्रों पर लाठीचार्ज करने, आंसू गैस के गोले छोड़ने और पैलेट गन का इस्तेमाल करने का आदेश किसने दिया था।
इसके साथ ही, कांग्रेस नेता ने केंद्र सरकार की परिसीमन (Delimitation) योजना पर भी गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि परिसीमन का सबसे प्रतिकूल और बुरा असर उन राज्यों पर पड़ेगा जिन्होंने देश के व्यापक हित में जनसंख्या नियंत्रण के उपायों को पूरी जिम्मेदारी और सफलता के साथ लागू किया है।
सरकार की विधायी कार्यसूची: कई अहम बिल पेश करने की तैयारी
एक तरफ जहां कांग्रेस और विपक्षी दल गृह मंत्री की जवाबदेही और छात्रों के न्याय की मांग को लेकर अड़े हुए हैं, वहीं दूसरी तरफ केंद्र सरकार संसद की कार्यसूची को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध दिख रही है।
सोमवार को लोकसभा की कार्यसूची में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से संबंधित दो महत्वपूर्ण विधेयक सूचीबद्ध किए गए हैं। इनमें पहला 'केरल नाम परिवर्तन विधेयक' है, जिसके जरिए केरल राज्य के नाम को आधिकारिक रूप से 'केरलम' करने का मार्ग प्रशस्त होगा। दूसरा बिल 'राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (संशोधन) विधेयक' है। इसके अतिरिक्त, राज्यसभा में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण भी देश के आर्थिक और वित्तीय ढांचे से जुड़ा एक महत्वपूर्ण विधेयक पेश करने जा रही हैं।
महाराष्ट्र के मुद्दों पर सुप्रिया सुले की पीएम से मुलाकात, FCRA पर NCP का कड़ा रुख
दूसरी ओर, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की कार्यकारी अध्यक्ष और सांसद सुप्रिया सुले की अगुवाई में पार्टी का एक प्रतिनिधिमंडल सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेगा। सुप्रिया सुले के अनुसार, यह मुलाकात मुख्य रूप से महाराष्ट्र के ज्वलंत विकास कार्यों, किसानों की समस्याओं और राज्य से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा के लिए रखी गई है।
हालांकि, एनसीपी (एसपी) ने भी FCRA बिल पर अपना रुख पूरी तरह से स्पष्ट कर दिया है। पार्टी के प्रवक्ताओं का कहना है कि FCRA विधेयक का मौजूदा स्वरूप पार्टी के मूल सिद्धांतों और लोकतांत्रिक विचारों के सर्वथा खिलाफ है, इसलिए सदन में वे इस बिल का विरोध करेंगे।
कुल मिलाकर, सोमवार को संसद में एक बार फिर भारी हंगामे और तीखी बहस के पूरे आसार हैं। क्या सरकार विपक्ष के भारी विरोध के बीच अपने प्रस्तावित विधेयकों को पारित कराने में सफल होगी, या फिर छात्रों के मुद्दे पर गृह मंत्री अमित शाह के जवाब की मांग को लेकर सदन की कार्यवाही ठप रहेगी, इस पर पूरे देश की नजर बनी हुई है।

