Zee के सुभाष चंद्रा का लोन हेयरकट, CJP ने पूछा- आम जनता का क्या?
x

Zee के सुभाष चंद्रा का लोन हेयरकट, CJP ने पूछा- आम जनता का क्या?

ज़ी ग्रुप के सुभाष चंद्रा का 22,000 करोड़ का लोन 6 करोड़ में सेटल होने पर विवाद। कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजित दिपके ने उठाए टैक्सपेयर के सवाल।


Zee Group Loan HairCut: ज़ी मीडिया ग्रुप (Essel Group) के चेयरमैन और पूर्व राज्यसभा सांसद सुभाष चंद्रा के लोन सेटलमेंट का मामला देश भर में तूल पकड़ता जा रहा है। 22,000 करोड़ रुपये से अधिक के भारी-भरकम कर्ज को महज 6 करोड़ रुपये में सेटल (Haircut) किए जाने की खबरों के बाद सोशल मीडिया से लेकर आम जनता के बीच भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है।


हाल ही में जंतर-मंतर पर प्रदर्शनों से सुर्खियों में आई कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजित दिपके ने एक वीडियो जारी कर देश की बैंकिग व्यवस्था, सरकार और टैक्सपेयर्स के पैसों के दुरुपयोग पर तीखे सवाल खड़े किए हैं।


अभिजित दिपके की अपील: "क्या आम नागरिक को मिलेगी ऐसी छूट?"
सोशल मीडिया पर वायरल अपने वीडियो संदेश में अभिजित दिपके ने देश के मध्यम वर्ग, युवाओं और नौकरीपेशा टैक्सपेयर्स के दर्द को सामने रखा। उन्होंने सवाल किया कि उद्योगपतियों और आम नागरिकों के लिए देश का कानून और बैंकिंग नियम अलग-अलग क्यों हैं?

दिपके द्वारा उठाए गए 4 मुख्य बिंदु:
₹22,000 करोड़ का कर्ज सिर्फ ₹6 करोड़ में खत्म:

एक तरफ जहां किसी बिजनेसमैन का 22,000 करोड़ रुपये का कर्ज महज 6 करोड़ रुपये लेकर पूरी तरह निपटा दिया जाता है, वहीं आम नागरिक जिंदगी भर अपनी ईएमआई (EMI) चुकाने के दबाव में पिसता रहता है।

होम और कार लोन का उदाहरण:

दिपके ने आम आदमी से सवाल पूछते हुए कहा "सोचिए, अगर आपने 50 लाख रुपये का होम लोन लिया हो और बैंक आपसे कहे कि सिर्फ 50 हजार रुपये दे दो और आपका लोन माफ? या 10 लाख रुपये का कार लोन लिया हो और केवल 10 हजार रुपये देकर खाता बंद हो जाए, तो क्या बैंक ऐसा करेगा? आपको तो मूलधन के साथ-साथ भारी ब्याज भी चुकाना पड़ता है।"

स्टूडेंट्स और एजुकेशन लोन का दर्द:

उन्होंने अपने व्यक्तिगत अनुभव का हवाला देते हुए कहा कि देश के लाखों युवा जो पढ़ाई के लिए एजुकेशन लोन लेते हैं, उन्हें एक-एक रुपये का ब्याज चुकाना पड़ता है। लेकिन सुभाष चंद्रा जैसे बड़े उद्योगपतियों को यह 'स्पेशल फैसिलिटी' दी जाती है।

टैक्सपेयर्स की जेब पर सीधा डाका:

दिपके ने आरोप लगाया कि बैंकों द्वारा माफ किया गया 22,000 करोड़ रुपये का यह विशाल घाटा अंततः देश के आम नागरिकों से टैक्स के रूप में वसूला जाएगा। बैंकिंग सिस्टम और कॉरपोरेट-सरकारी नेक्सस का सच यही है।

क्या है पूरा मामला और क्यों मचा है बवाल?
सुभाष चंद्रा और उनके एस्सेल ग्रुप (Essel Group) पर विभिन्न सरकारी व निजी बैंकों तथा वित्तीय संस्थानों का हजारों करोड़ रुपये का बकाया था। खबर सामने आई कि एकमुश्त समाधान प्रक्रिया के तहत बेहद मामूली रकम (हेयरकट) लेकर बकाया लोन खातों को एनपीए (NPA) से हटाकर सेटल कर दिया गया है।

इस फैसले ने एक बार फिर देश में कॉरपोरेट लोन राइट-ऑफ और बैंकिंग एनपीए (NPA) नीति पर गंभीर बहस छेड़ दी है।


Read More
Next Story