
NEET आंदोलन पर SC का बड़ा फैसला, नाबालिगों को रिहा करने के निर्देश
NEET पेपर लीक विरोध प्रदर्शन पर पुलिस कार्रवाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। CJI सूर्यकांत ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन अधिकार है और आरोप सही मिले तो स्वतंत्र जांच होगी।
नीट-यूजी पेपर लीक मामले को लेकर हुए छात्र प्रदर्शनों पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को प्रदर्शनकारियों को बड़ी राहत दी। सर्वोच्च अदालत ने स्पष्ट किया कि जिन प्रदर्शनकारियों का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है, उनके खिलाफ किसी भी तरह की दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए। अदालत ने संबंधित अधिकारियों को ऐसे लोगों की रिहाई सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन एक अभिन्न हिस्सा है और नागरिकों को अपनी बात रखने का संवैधानिक अधिकार है। अदालत ने छात्र आंदोलनों के दौरान पुलिस कार्रवाई से जुड़े आरोपों की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच की आवश्यकता पर जोर दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि जांच में यह सामने आता है कि किसी भी पक्ष ने आवश्यकता से अधिक बल प्रयोग किया या निर्धारित प्रोटोकॉल और कानून का उल्लंघन किया, तो संबंधित लोगों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए और कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए।
CJI ने दोहराया—विरोध प्रदर्शन करना अधिकार
सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने कहा कि केवल विरोध प्रदर्शन होने के आधार पर पुलिस बल प्रयोग या लाठीचार्ज नहीं कर सकती। उन्होंने दोहराया कि संविधान नागरिकों को शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार देता है और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के नाम पर इस अधिकार का मनमाना हनन स्वीकार नहीं किया जा सकता।पीठ ने संकेत दिए कि छात्रों, महिलाओं, वकीलों और पत्रकारों के साथ कथित पुलिस बर्बरता के आरोपों की जांच के लिए एक स्वतंत्र उच्चस्तरीय समिति गठित की जा सकती है।
पूरे देश के लिए एक समान प्रोटोकॉल पर विचार
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि देशभर में विरोध-प्रदर्शनों और भीड़ नियंत्रण के लिए एक समान (यूनिफॉर्म) प्रोटोकॉल बनाए जाने की आवश्यकता है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं से निपटने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश उपलब्ध हों।
कोर्ट ने जवाबदेही तय करने पर दिया जोर
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने कहा कि प्रदर्शनकारियों और पुलिस—दोनों पक्षों से जुड़े आरोपों की निष्पक्ष एवं स्वतंत्र जांच होनी चाहिए।सुनवाई के दौरान CJI ने कहा, "जिसने भी बर्बरता की है या कानून को अपने हाथ में लिया है, उसे जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। सभी आरोपों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच आवश्यक है।"
पुलिसकर्मियों पर हमले की भी होगी जांच
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह भी जांच का विषय होना चाहिए कि करीब 250 पुलिसकर्मियों पर हुए हमले प्रदर्शनकारी छात्रों ने किए थे या प्रदर्शन के दौरान कुछ असामाजिक तत्व भी हिंसा में शामिल थे।केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि प्रदर्शन के दौरान हत्या, दुष्कर्म और एनडीपीएस कानून के मामलों में आरोपी कुछ असामाजिक तत्व भी भीड़ में शामिल हो गए थे और हिंसा के लिए वही जिम्मेदार थे। उन्होंने कहा कि छात्रों द्वारा पुलिस पर हमला स्वीकार्य नहीं हो सकता।
20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान हुई थी हिंसा
गौरतलब है कि 20 जुलाई को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के आह्वान पर दिल्ली में संसद मार्च निकाला गया था। हजारों प्रदर्शनकारी संसद भवन की ओर बढ़े, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए कई स्थानों पर बल प्रयोग किया।इस दौरान लाठीचार्ज, आंसू गैस के गोले छोड़े जाने और कथित रूप से पैलेट गन के इस्तेमाल के आरोप भी सामने आए। सोशल मीडिया पर वायरल कई वीडियो के बाद पुलिस कार्रवाई को लेकर व्यापक बहस छिड़ गई। फिलहाल इस पूरे मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में जारी है।

