चंद्रशेखरन के बाद टाटा संस का अगला चेयरमैन कौन? जानिए चयन की पूरी प्रक्रिया
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चंद्रशेखरन के बाद टाटा संस का अगला चेयरमैन कौन? जानिए चयन की पूरी प्रक्रिया

एन चंद्रशेखरन फरवरी 2027 में टाटा संस के चेयरमैन पद से हटेंगे। जानिए उनके उत्तराधिकारी का चयन कैसे होगा और टाटा ट्रस्ट्स की इसमें क्या भूमिका होगी।


टाटा ग्रुप में बुधवार (12 अगस्त) का दिन बड़े बदलाव की सूचना लेकर आया। टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने साफ कर दिया है कि वह फरवरी 2027 में अपना मौजूदा कार्यकाल पूरा होने के बाद चेयरमैन पद पर दोबारा नियुक्ति नहीं चाहते। उनके इस फैसले ने टाटा समूह के अगले चेयरमैन को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

चंद्रशेखरन ने फरवरी 2017 में टाटा संस के चेयरमैन का पद संभाला था। तब से वह करीब एक दशक तक समूह का नेतृत्व कर चुके हैं। उनके कार्यकाल में टाटा समूह ने विमानन, इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर, डिजिटल कारोबार और बैटरी जैसे नए क्षेत्रों में बड़े निवेश किए। एयर इंडिया को टाटा समूह में वापस लाना भी इसी दौर का एक बड़ा फैसला रहा।

सबसे बड़ा सवाल है कि चंद्रशेखरन के बाद टाटा संस की कमान किसके हाथ में जाएगी और उसे चुनने की प्रक्रिया क्या होगी?

टाटा संस के नियमों में चेयरमैन के चयन के लिए एक विशेष व्यवस्था है। इसमें टाटा ट्रस्ट्स की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। टाटा ट्रस्ट्स के पास टाटा संस की करीब 66 प्रतिशत हिस्सेदारी है। इसलिए नए चेयरमैन के चयन में ट्रस्ट्स की राय निर्णायक मानी जाती है।

नए चेयरमैन के चयन के लिए एक सेलेक्शन कमेटी बनाई जाएगी। यह समिति संभावित उम्मीदवारों के नामों पर विचार करेगी और एक नाम की सिफारिश करेगी। इसके बाद टाटा संस का निदेशक मंडल यानी बोर्ड उस नियुक्ति को मंजूरी देगा। पहले उम्मीदवारों पर विचार होगा, चयन समिति नाम की सिफारिश करेगी और फिर टाटा संस का बोर्ड अंतिम मंजूरी देगा।

2016 में साइरस मिस्त्री को टाटा संस के चेयरमैन पद से हटाए जाने के बाद नए चेयरमैन की तलाश शुरू हुई थी। उस समय एक चयन समिति बनाई गई और इसी प्रक्रिया के तहत एन चंद्रशेखरन के नाम पर सहमति बनी थी।

इस बार मामला आसान नहीं
इस बार मामला इतना आसान नहीं है। चंद्रशेखरन के उत्तराधिकारी का चुनाव ऐसे समय में हो रहा है जब टाटा समूह के भीतर नेतृत्व और कामकाज को लेकर कई अहम सवाल मौजूद हैं।

टाटा ट्रस्ट्स और टाटा संस के बीच कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों पर मतभेद की खबरें सामने आती रही हैं। इनमें टाटा संस की भविष्य की दिशा, कारोबार में पूंजी लगाने की रणनीति, कुछ कंपनियों के घाटे और कंपनी के संचालन से जुड़े सवाल शामिल हैं।

यही वजह है कि अगले चेयरमैन का चुनाव केवल किसी एक व्यक्ति को पद देने का मामला नहीं होगा। यह टाटा समूह की आने वाले वर्षों की कारोबारी दिशा भी तय कर सकता है।

अगला चेयरमैन कौन हो सकता है?
फिलहाल आधिकारिक तौर पर किसी नाम की घोषणा नहीं हुई है। यह भी जरूरी नहीं है कि अगला चेयरमैन टाटा समूह के भीतर से ही आए। चयन समिति किसी अनुभवी आंतरिक अधिकारी या किसी बाहरी कारोबारी को भी उम्मीदवार के तौर पर देख सकती है।

हालांकि, जिस व्यक्ति को यह जिम्मेदारी मिलेगी, उसके सामने कई बड़ी चुनौतियां होंगी। उसे एयर इंडिया के कारोबार को मजबूत करना होगा। टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर कारोबार में किए जा रहे बड़े निवेश को आगे बढ़ाना होगा। साथ ही टाटा समूह की अलग-अलग कंपनियों के बीच पूंजी और कारोबारी प्राथमिकताओं का संतुलन भी बनाना होगा। नए चेयरमैन को सिर्फ एक बड़ा कारोबारी नहीं, बल्कि इतने बड़े और विविध समूह को एक दिशा में आगे ले जाने वाला नेतृत्वकर्ता होना होगा।

चंद्रशेखरन ने अभी पद क्यों नहीं छोड़ा?
चंद्रशेखरन का मौजूदा कार्यकाल फरवरी 2027 तक है। इसलिए उनका फैसला तत्काल नेतृत्व परिवर्तन नहीं है। उन्होंने टाटा संस के बोर्ड को अपने निर्णय की जानकारी देते हुए यह संकेत दिया है कि समूह के लिए नेतृत्व को लेकर स्पष्टता जरूरी है। इससे नए चेयरमैन की तलाश समय रहते शुरू की जा सकेगी और नेतृत्व परिवर्तन अचानक नहीं होगा। ध्यान देने वाली बात यह है कि टाटा संस की 18 अगस्त को वार्षिक आम बैठक होने वाली है। चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति भी इस बैठक से जुड़े प्रमुख मुद्दों में थी।

अब आगे क्या होगा?
अब टाटा संस को नए चेयरमैन की तलाश की औपचारिक प्रक्रिया शुरू करनी होगी। सबसे पहले चयन समिति और संभावित उम्मीदवारों को लेकर प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। इसके बाद उम्मीदवार के नाम पर टाटा ट्रस्ट्स और टाटा संस के बोर्ड के स्तर पर सहमति बनाने की कोशिश होगी।

अगर सब कुछ तय प्रक्रिया के मुताबिक चलता है, तो नए चेयरमैन की घोषणा चंद्रशेखरन के कार्यकाल के समाप्त होने से पहले की जा सकती है, ताकि जिम्मेदारी का हस्तांतरण व्यवस्थित तरीके से हो सके।

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