
बांकीपुर में तेजस्वी यादव का 48 घंटे का मिशन, क्या बदलेगा चुनावी खेल?
बिहार के बांकीपुर उपचुनाव के अंतिम दो दिनों में तेजस्वी यादव ने आरजेडी उम्मीदवार के समर्थन में रोड शो और जनसंपर्क अभियान शुरू किया। उनका लक्ष्य बीजेपी के गढ़ में मुकाबले को त्रिकोणीय बनाना है।
बिहार की राजनीति में बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव को लेकर सियासी सरगर्मी चरम पर है। चुनाव प्रचार के अंतिम दो दिनों में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के कार्यकारी अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने अचानक मैदान में उतरकर मुकाबले को नया मोड़ देने की कोशिश शुरू कर दी है। उनका लक्ष्य आरजेडी प्रत्याशी रेखा कुमारी उर्फ रेखा गुप्ता के पक्ष में माहौल बनाना और अब तक बीजेपी और जन सुराज पार्टी के बीच सिमटते दिख रहे मुकाबले को त्रिकोणीय बनाना है।
BJP के सबसे मजबूत गढ़ में RJD की चुनौती
पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट को लंबे समय से बीजेपी का सबसे सुरक्षित गढ़ माना जाता है। 1996 से इस सीट पर बीजेपी का कब्जा रहा है और आरजेडी अब तक यहां जीत दर्ज नहीं कर सकी है।इस उपचुनाव में बीजेपी ने नीरज कुमार सिन्हा को उम्मीदवार बनाया है, जबकि जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर भी पूरी ताकत के साथ मैदान में हैं। ऐसे में चुनावी मुकाबला मुख्य रूप से बीजेपी और जन सुराज के बीच माना जा रहा था, लेकिन तेजस्वी यादव की सक्रियता ने चुनाव को नया राजनीतिक आयाम दे दिया है।
दो दिन में रोड शो और जनसंपर्क अभियान
प्रचार के आखिरी 48 घंटों में तेजस्वी यादव ने लगातार रोड शो और जनसंपर्क अभियान का कार्यक्रम बनाया है।सोमवार को उन्होंने मीठापुर से अभियान की शुरुआत की और चांदपुर बेला, सिपारा, विग्रहपुर, पोस्टल पार्क, चिरैयाटांड़ पुल, गोरियाटोली, लालजी टोला, पीरमुहानी, उमा सिनेमा, आयुर्वेदिक कॉलेज, लोहानीपुर, साहित्य सम्मेलन, दरियापुर, खेतान मार्केट और बिरला मंदिर होते हुए सब्जीबाग चौराहे तक रोड शो किया।मंगलवार को भी उनका रोड शो पुराना हड़ताली मोड़, बोरिंग रोड, राजापुर पुल, पुलिस लाइन, लोदीपुर, इनकम टैक्स गोलंबर और किदवईपुरी जैसे इलाकों से होकर गुजरने वाला है।
क्या है तेजस्वी की रणनीति?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि तेजस्वी यादव इस सीमित समय में पारंपरिक बड़ी रैलियों के बजाय सीधे संवाद, रोड शो, नुक्कड़ सभाओं और स्थानीय कार्यकर्ताओं के साथ बैठकों पर जोर दे रहे हैं।उनकी कोशिश खासतौर पर शहरी और युवा मतदाताओं तक पहुंचने की है। बेरोजगारी, प्रतियोगी परीक्षाओं और स्थानीय विकास जैसे मुद्दों के जरिए वे उन मतदाताओं को साधने की कोशिश कर रहे हैं, जो बदलाव की उम्मीद रखते हैं।
RJD के सामने कठिन चुनौती
हालांकि, बांकीपुर में आरजेडी की राह आसान नहीं मानी जा रही। दशकों से बीजेपी के मजबूत संगठन और शहरी मतदाताओं के पारंपरिक समर्थन के कारण यह सीट विपक्ष के लिए हमेशा चुनौतीपूर्ण रही है।इसके अलावा जन सुराज पार्टी भी इस चुनाव में पूरी ताकत झोंक रही है, जिससे मुकाबला और दिलचस्प हो गया है। ऐसे में तेजस्वी यादव की एंट्री का उद्देश्य सिर्फ एक सीट जीतना नहीं, बल्कि विपक्षी खेमे में नई ऊर्जा भरना और चुनावी मुकाबले को त्रिकोणीय बनाना भी माना जा रहा है।
अब सबकी नजर नतीजों पर
प्रचार के लिए अब सिर्फ दो दिन का समय बचा है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या तेजस्वी यादव का यह '48 घंटे का इमरजेंसी कैंपेन' बांकीपुर के चुनावी समीकरण बदल पाएगा, या फिर बीजेपी अपना मजबूत किला बचाने में सफल रहेगी। इसका जवाब अब उपचुनाव के नतीजे ही देंगे।

