
TISS दीक्षांत समारोह: CJI सूर्यकांत की जगह टाटा मेमोरियल के निदेशक चीफ गेस्ट
TISS मुंबई के 86वें दीक्षांत समारोह में CJI सूर्यकांत की जगह डॉ. सी एस प्रमेश होंगे मुख्य अतिथि। जानिए NALSAR और NLSIU में क्यों हुआ CJI का विरोध।
CJI Suryakant: टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (TISS), मुंबई ने अपने 86वें दीक्षांत समारोह (86th Convocation) की नई तारीख का ऐलान कर दिया है। आगामी 22 अगस्त को आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम में अब भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत की जगह टाटा मेमोरियल अस्पताल के निदेशक डॉ. सी एस प्रमेश मुख्य अतिथि होंगे।
2 अगस्त का कार्यक्रम हुआ था स्थगित
गौरतलब है कि इससे पहले 2 अगस्त को आयोजित होने वाले दीक्षांत समारोह में मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया था। लेकिन संस्थान ने कार्यक्रम से ठीक दो दिन पहले, यानी 31 जुलाई को, "अपरिहार्य परिस्थितियों" का हवाला देते हुए दीक्षांत समारोह को अचानक स्थगित कर दिया था।
समय का अभाव या विरोध की आशंका?: सूत्रों के हवाले से आई रिपोर्ट में कहा गया है कि CJI कार्यालय ने TISS को सूचित किया था कि नवंबर तक मुख्य न्यायाधीश का शेड्यूल पूरी तरह व्यस्त है, जिसके चलते वह समारोह में शामिल नहीं हो सकेंगे। हालांकि, मीडिया रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया कि CJI के खिलाफ छात्रों के संभावित विरोध-प्रदर्शन की आशंका को देखते हुए दीक्षांत समारोह टाला गया था।
NALSAR से NLSIU तक: CJI के खिलाफ छात्रों का बढ़ता आक्रोश
CJI सूर्यकांत को मुख्य अतिथि बनाए जाने को लेकर देश के शीर्ष लॉ विश्वविद्यालयों में विरोध के सुर तेज देखे गए हैं:
NLSIU (बेंगलुरु) में विरोध: नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी के छात्रों और पूर्व छात्रों ने आगामी दीक्षांत समारोह में CJI सूर्यकांत और बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा की उपस्थिति का कड़ा विरोध किया। क्लास ऑफ 2026 के 165 स्नातक छात्रों, 409 वर्तमान छात्रों और 128 पूर्व छात्रों द्वारा हस्ताक्षरित बयान में BCI की उस कार्रवाई की कड़ी निंदा की गई, जिसमें NALSAR के छात्रों का नामांकन रोकने का असंवैधानिक प्रयास किया गया था।
NALSAR (हैदराबाद) के छात्रों की आपत्ति: नालसार यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ के 2026 बैच के छात्रों ने अपने कुलपति को पत्र लिखकर CJI को दीक्षांत समारोह में बुलाने पर आपत्ति जताई थी।
जंतर-मंतर छात्र आंदोलन का असर: छात्रों के आक्रोश का मुख्य कारण 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर 'चलो संसद' प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा छात्रों पर किए गए कथित बर्बर लाठीचार्ज और पैलेट गन इस्तेमाल के मामले में सुप्रीम कोर्ट की पीठ द्वारा जल्द सुनवाई की याचिका को खारिज करना था।
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