डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर फिर फोड़ा टैरिफ बम, जबरन मजदूरी के नाम पर लगाया 10% नया टैरिफ!
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डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर फिर फोड़ा टैरिफ बम, 'जबरन मजदूरी' के नाम पर लगाया 10% नया टैरिफ!

अमेरिका ने जबरन मजदूरी से बने सामानों के आयात पर रोक लगाने में नाकामी का हवाला देते हुए भारत और 16 अन्य देशों पर 10% का नया टैरिफ लगा दिया है।


वैश्विक व्यापार के मोर्चे पर भारत और अमेरिका के वाणिज्यिक संबंधों को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है। अमेरिका ने भारत समेत दुनिया के 17 देशों से आयात होने वाले सामानों पर 10 प्रतिशत का नया टैरिफ लागू कर दिया है। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि यह कदम उन सामानों के उत्पादन पर उठाया गया है, जिनमें जबरन मजदूरी (Forced Labour) का इस्तेमाल किया गया था। इस नए फैसले का सीधा असर भारत के निर्यात क्षेत्र पर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।

अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर का बड़ा फैसला

अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) जेमिसन ग्रीर ने ट्रेड एक्ट (Trade Act) की धारा 301 के तहत कुल 60 देशों पर अलग-अलग टैरिफ लगाने के अंतिम कदम का ऐलान किया है। यह घोषणा उस वक्त की गई है जब सभी देशों पर लगे 10 प्रतिशत के अतिरिक्त वैश्विक टैरिफ की समय-सीमा समाप्त होने में महज एक दिन का वक्त बचा था।

अमेरिकी प्रशासन के मुताबिक, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देशों का पालन करते हुए USTR ने यह कार्रवाई की है। अमेरिका का आरोप है कि इन अर्थव्यवस्थाओं ने अपने यहाँ जबरन मजदूरी से तैयार किए गए सामान के आयात और निर्यात को प्रभावी ढंग से रोकने में ढिलाई बरती है।

12.5% की जगह अब 10% टैरिफ श्रेणी में आया भारत

जेमिसन ग्रीर ने अपने आधिकारिक बयान में कहा, "यह कदम मानवाधिकारों के हनन और व्यापार के गलत तरीकों को सुधारने की दिशा में एक बड़ी शुरुआत है, जिससे दुनियाभर में श्रमिकों के कल्याण को बढ़ावा मिलेगा।"

राहत की बात यह है कि इस सूची में भारत को कुछ हद तक रियायत मिली है। पहले भारत उन देशों की श्रेणी में शामिल था, जिन पर 12.5 प्रतिशत का टैरिफ लगाया जाना प्रस्तावित था। हालांकि, अब भारत, कनाडा, ब्रिटेन (UK), बांग्लादेश और पाकिस्तान सहित 17 देशों को 10 प्रतिशत टैरिफ वाली श्रेणी में रखा गया है।

भारत के नीतिगत बदलावों का दिखा असर

अमेरिकी फेडरल नोटिस में इस बात का खास उल्लेख किया गया है कि जून में जब प्रस्तावित टैरिफ की घोषणा हुई थी, तब भारत ने तुरंत कड़े कदम उठाए थे। भारत सरकार ने 14 जून को अपनी विदेश व्यापार नीति (Foreign Trade Policy) में संशोधन करते हुए जबरन मजदूरी से बनने वाले सामान के आयात पर आधिकारिक रूप से प्रतिबंध लगा दिया था।

भारत द्वारा उठाए गए इस सकारात्मक कदम के चलते ही अमेरिका ने भारत पर प्रस्तावित 12.5% के भारी शुल्क को घटाकर 10% करने का निर्णय लिया है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद शुरू हुई थी जांच

ट्रंप प्रशासन द्वारा यह नई कार्रवाई अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के एक हालिया फैसले के बाद देखने को मिली है। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने फरवरी में आपातकालीन शक्तियों (Emergency Powers) का इस्तेमाल कर लगाए गए पिछले साल के 'पारस्परिक टैरिफ' को गैर-कानूनी करार दे दिया था।

अदालत के इस फैसले के तोड़ के रूप में ट्रंप प्रशासन ने 1974 के ट्रेड एक्ट की धारा 301 के तहत दो अलग-अलग जांचें शुरू की थीं और सभी देशों पर अंतरिम रूप से 10% टैरिफ लागू किया था, जिसकी मियाद अब खत्म हो रही थी।

भारत ने जताया ऐतराज, द्विपक्षीय बातचीत जारी

भारत सरकार ने USTR द्वारा शुरू की गई दोनों जांचों और इस कार्रवाई पर अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। भारत का स्पष्ट रुख है कि जबरन मजदूरी या श्रम मानकों से जुड़े मुद्दों पर निष्पक्ष चर्चा होनी चाहिए। भारत ने कहा है कि इन संवेदनशील विषयों पर दोनों देशों के बीच जारी द्विपक्षीय व्यापार समझौते (Bilateral Trade Agreement) की मेज पर बातचीत की जानी चाहिए।

भारत-अमेरिका व्यापार पर क्या पड़ेगा असर?

अमेरिका, भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार और भारतीय निर्यात के लिए दुनिया का सबसे बड़ा बाजार है। वाणिज्य विभाग (Department of Commerce) के आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2025 में भारत और अमेरिका के बीच कुल द्विपक्षीय वस्तुओं का व्यापार लगभग 141 अरब अमेरिकी डॉलर (141 Billion USD) का रहा था।

इस कुल व्यापार में अकेले भारत का अमेरिका को निर्यात 87.3 अरब अमेरिकी डॉलर था। ऐसे में 10% का यह नया शुल्क भारतीय सामानों की कीमतों को अमेरिका में थोड़ा महंगा बना सकता है, जिससे भारतीय निर्यातकों के सामने नई व्यावसायिक चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं।

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