ईरान के खिलाफ ट्रंप की आर्थिक जंग,सभी देशों को दी ये चेतावनी
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ईरान के खिलाफ ट्रंप की आर्थिक जंग,सभी देशों को दी ये चेतावनी

अमेरिका पहले से ही ईरान पर कई तरह के प्रतिबंध लगा चुका है। लेकिन अमेरिकी प्रशासन का मानना है कि प्रतिबंधों के बावजूद ईरान अलग-अलग रास्तों से अपना तेल बेचने और विदेशी मुद्रा हासिल करने में कामयाब रहा है।


अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ कारोबार करने वाले देशों और संस्थाओं को कड़ी चेतावनी दी है। ट्रंप ने कहा है कि जो भी देश ईरान को आर्थिक या वित्तीय मदद पहुंचाने में शामिल होगा, उसे गंभीर आर्थिक परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।

ट्रंप की इस चेतावनी का मकसद ईरान की कमाई के उन रास्तों को बंद करना है, जिनके जरिए उसे अंतरराष्ट्रीय बाजार से पैसा मिलता है। खास तौर पर ईरान के तेल कारोबार, तेल की कथित तस्करी, वित्तीय लेन-देन और दूसरे कारोबारी नेटवर्क अमेरिकी निशाने पर हैं।

दरअसल, अमेरिका पहले से ही ईरान पर कई तरह के प्रतिबंध लगा चुका है। लेकिन अमेरिकी प्रशासन का मानना है कि प्रतिबंधों के बावजूद ईरान अलग-अलग रास्तों से अपना तेल बेचने और विदेशी मुद्रा हासिल करने में कामयाब रहा है। ऐसे में अब वॉशिंगटन उन देशों और कंपनियों पर भी दबाव बढ़ाना चाहता है, जो ईरान के साथ कारोबार जारी रखते हैं।

पहले भी धमकी दे चुके हैं ट्रंप
यह पहली बार नहीं है जब ट्रंप ने ईरान के व्यापारिक साझेदारों को निशाना बनाने की बात कही है। जनवरी 2026 में भी उन्होंने ईरान के साथ कारोबार करने वाले देशों पर 25 प्रतिशत अमेरिकी टैरिफ लगाने की धमकी दी थी। उस समय चीन समेत कई देशों ने इस कदम का विरोध किया था।

लेकिन मौजूदा चेतावनी का संदर्भ ज्यादा गंभीर है। ईरान और अमेरिका के बीच महीनों से चल रहा संघर्ष अब क्षेत्रीय व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति को भी प्रभावित कर रहा है। खासकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर तनाव ने वैश्विक तेल बाजार पर दबाव बढ़ाया है। यह जलमार्ग दुनिया के लिए बेहद अहम है, क्योंकि बड़ी मात्रा में तेल और गैस की आवाजाही इसी रास्ते से होती है।

चीन की भूमिका अहम
इस पूरे घटनाक्रम में चीन की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। चीन ईरान के तेल का सबसे बड़ा खरीदार है और इसलिए अगर अमेरिका ईरान के साथ कारोबार करने वालों पर व्यापक आर्थिक कार्रवाई करता है, तो उसका असर बीजिंग के साथ उसके रिश्तों पर भी पड़ सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक चीन पर ज्यादा दबाव डालना अमेरिका के लिए आर्थिक और कूटनीतिक दोनों लिहाज से चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

UAE का बड़ा ऐलान
इसी बीच संयुक्त अरब अमीरात ने ईरान के साथ व्यापार और वित्तीय लेन-देन रोकने का ऐलान किया है। यह फैसला ऐसे समय आया है जब क्षेत्र में सैन्य तनाव फिर बढ़ा है। UAE लंबे समय से ईरान के लिए एक महत्वपूर्ण व्यापारिक और वित्तीय केंद्र रहा है, इसलिए उसके इस कदम को तेहरान पर बढ़ते आर्थिक दबाव के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

हालांकि बड़ा सवाल यही है कि क्या आर्थिक दबाव ईरान को झुकने पर मजबूर कर पाएगा। अगर अमेरिका ने ईरान के प्रमुख व्यापारिक साझेदारों पर भी कार्रवाई शुरू की, तो इसका असर सिर्फ तेहरान पर नहीं, बल्कि अमेरिका के अपने व्यापारिक और कूटनीतिक रिश्तों पर भी पड़ सकता है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि ट्रंप की चेतावनी सिर्फ बयान तक सीमित रहती है या वास्तव में नए और कड़े आर्थिक प्रतिबंधों में बदलती है।

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