
सॉफ्ट हिंदुत्व की राह पर अखिलेश यादव, धार्मिक स्थलों से फूंकेंगे चुनावी शंखनाद
2027 के महामुकाबले के लिए बदला समाजवादी पार्टी का चुनावी तेवर; अयोध्या, मथुरा या काशी से शुरू हो सकती है 'पीडीए रथ यात्रा', बीजेपी के पारंपरिक कोर वोट बैंक में सेंध लगाने की बड़ी तैयारी।
Samajwadi PDA Rath Yatra: उत्तर प्रदेश में साल 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर समाजवादी पार्टी (सपा) के मुखिया अखिलेश यादव ने एक बेहद चौंकाने वाली और आक्रामक बिसात बिछानी शुरू कर दी है। सपा प्रमुख सितंबर के पहले हफ्ते से सूबे की सभी 403 विधानसभा सीटों पर 'समाजवादी पीडीए रथ यात्रा' निकालने जा रहे हैं। लेकिन इस बार राजनीतिक गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा यात्रा के रूट की नहीं, बल्कि अखिलेश यादव के बदले हुए राजनीतिक तेवरों की है। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, इस चुनावी रथयात्रा का आगाज अखिलेश यादव किसी बड़े हिंदू धार्मिक स्थल से करने वाले हैं। इसे सपा की तरफ से 'सॉफ्ट हिंदुत्व' के मोर्चे पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) को उसी के सबसे मजबूत गढ़ में घेरने की एक सोची-समझी और बड़ी रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।
अयोध्या, मथुरा या वाराणसी से शुरुआत पर मंथन
राजनीतिक हलकों में चल रही चर्चाओं के अनुसार, समाजवादी पार्टी इस ऐतिहासिक यात्रा की शुरुआत के लिए अयोध्या, मथुरा या वाराणसी (काशी) जैसे बड़े और संवेदनशील धार्मिक केंद्रों के नामों पर गंभीरता से विचार कर रही है। हालांकि, अंतिम स्थान को लेकर अभी पार्टी आलाकमान में मंथन जारी है, लेकिन इस रणनीति ने उत्तर प्रदेश का सियासी पारा एक साल पहले ही पूरी तरह गर्मा दिया है। राम मंदिर चंदा चोरी के मामले को लेकर संसद से सड़क तक बीजेपी को घेरने वाली सपा अब खुद को बहुसंख्यक समाज की आस्था के साथ जोड़कर यह संदेश देना चाहती है कि धर्म पर किसी एक राजनीतिक दल का एकाधिकार नहीं है।
403 सीटों पर सामाजिक और धार्मिक समीकरणों का नया मेल
अखिलेश यादव की यह रथयात्रा उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों से होकर गुजरेगी, जिसकी कमान वह खुद संभालेंगे। उनके साथ सांसद डिंपल यादव, नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडे और शिवपाल सिंह यादव जैसे दिग्गज भी जमीन पर मोर्चा संभालेंगे। इस यात्रा की मुख्य थीम भले ही पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक (PDA) का सामाजिक ताना-बाना हो, लेकिन इसके साथ सॉफ्ट हिंदुत्व का तड़का लगाकर सपा इस बार नया इतिहास रचना चाहती है। यात्रा का विशेष फोकस पश्चिमी यूपी के जाट और गुर्जर बहुल क्षेत्रों (जैसे बुलंदशहर और मुरादाबाद मंडल) पर रहेगा, जहां लोकसभा चुनाव में मिले फायदे को पार्टी 2027 की सत्ता में तब्दील करना चाहती है।
बीजेपी के कोर एजेंडे पर सपा का करारा प्रहार
लोकसभा चुनाव 2024 में मिली बड़ी सफलता के बाद अखिलेश यादव का हौसला बुलंद है। वह भली-भांति जानते हैं कि सिर्फ पारंपरिक वोट बैंक के भरोसे लखनऊ के सिंहासन तक पहुंचना मुश्किल है, इसलिए वे अब बीजेपी के कोर धार्मिक एजेंडे में ही सेंधमारी कर रहे हैं। इस रथयात्रा के जरिए सपा जहां एक तरफ राज्य की लचर कानून व्यवस्था और बेरोजगारी पर सरकार को घेरेगी, वहीं दूसरी तरफ धार्मिक स्थलों से शुरुआत कर बीजेपी के उस नैरेटिव को भी ध्वस्त करेगी जिसमें विपक्ष पर तुष्टिकरण के आरोप लगाए जाते हैं। सत्ताधारी बीजेपी ने भी जवाबी रणनीतियां बनानी शुरू कर दी हैं, जिससे यह साफ है कि 2027 की चुनावी जंग बेहद दिलचस्प और अभूतपूर्व होने वाली है।
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