
UPI पर MDR को लेकर घमासान, राहुल के ‘टैक्स’ वाले वार पर BJP का पलटवार
UPI के कुछ कारोबारी लेनदेन पर 15 अक्टूबर से MDR लागू होने को लेकर कांग्रेस और बीजेपी आमने-सामने हैं। राहुल गांधी ने फैसले पर सवाल उठाए हैं, जबकि बीजेपी ने संसदीय समिति की सिफारिश का हवाला देकर कांग्रेस के विरोध पर पलटवार किया है।
UPI पर Merchant Discount Rate यानी MDR लागू करने के फैसले को लेकर कांग्रेस और बीजेपी के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इस फैसले का विरोध करते हुए इसे ‘UPI टैक्स’ बताया और सरकार से इसे वापस लेने की मांग की है। बीजेपी ने पलटवार करते हुए कांग्रेस पर लोगों को गुमराह करने का आरोप लगाया है।
15 अक्टूबर से कुछ ट्रांजैक्शन पर एमडीआर
नए नियम के मुताबिक, 15 अक्टूबर से 2,000 रुपये से ज्यादा के कुछ कारोबारी UPI ट्रांजैक्शन पर 0.4 फीसदी तक MDR लागू होगा। 2,000 रुपये तक के UPI भुगतान इससे बाहर रहेंगे। व्यक्ति से व्यक्ति होने वाले ट्रांजैक्शन पर भी MDR नहीं लगेगा। 75,000 रुपये या उससे ज्यादा के ट्रांजैक्शन के लिए MDR की अधिकतम सीमा 300 रुपये तय की गई है।
सरकार का तर्क क्या है?
सरकार का कहना है कि MDR सीधे ग्राहकों से वसूला जाने वाला टैक्स नहीं है। इससे मिलने वाली रकम पेमेंट सिस्टम से जुड़े बैंकों और दूसरे हिस्सेदारों के बीच जाएगी। सरकार के मुताबिक, आम यूजर के लिए 2,000 रुपये तक के UPI भुगतान पर कोई शुल्क नहीं लगाया गया है।
राहुल गांधी ने अमेरिकी दबाव का आरोप लगाया
राहुल गांधी ने आरोप लगाया है कि UPI पर MDR लागू करने का फैसला अमेरिकी दबाव में लिया गया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फैसले को तत्काल वापस लेने की मांग की। वित्त मंत्रालय ने विदेशी दबाव के आरोप को खारिज किया है।
बीजेपी ने संसदीय समिति की रिपोर्ट का हवाला दिया
बीजेपी ने कांग्रेस के विरोध के जवाब में वित्त मामलों की स्थायी समिति की रिपोर्ट का हवाला दिया है। पार्टी का कहना है कि समिति ने UPI के लिए टिकाऊ और चरणबद्ध राजस्व मॉडल की सिफारिश की थी। रिपोर्ट 12 अगस्त को अपनाई गई थी और इसमें कांग्रेस के पांच सांसद भी शामिल थे।
कांग्रेस का जवाब
कांग्रेस का कहना है कि संसदीय समिति की सिफारिश को मौजूदा MDR व्यवस्था की मंजूरी के तौर पर पेश करना सही नहीं है। पार्टी ने सरकार पर असली मुद्दे से ध्यान भटकाने का आरोप लगाया है।

