
बंदर अब्बास से चाबहार तक अमेरिकी हमले, ईरान में मची तबाही
डोनाल्ड ट्रंप की चेतावनी के बाद अमेरिका ने ईरान के कई तटीय इलाकों पर सैन्य हमला किया। बंदर अब्बास, चाबहार और सीरिक में धमाके, सेंटकॉम ने कार्रवाई की पुष्टि की।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चेतावनी के बाद अमेरिका ने ईरान के खिलाफ एक बार फिर सैन्य कार्रवाई शुरू कर दी है। अमेरिकी हमलों के बाद ईरान के बंदर अब्बास, सीरिक, चाबहार, कोनारक और अन्य तटीय इलाकों में लगातार विस्फोटों की खबरें सामने आई हैं।
ईरानी समाचार एजेंसी मिजान के अनुसार, बंदर अब्बास और सीरिक में कई तेज धमाकों की आवाजें सुनी गईं। वहीं, मेहर समाचार एजेंसी ने भी बंदर अब्बास में हुए विस्फोटों की पुष्टि करते हुए बताया कि हमलों में दो मछुआरों की मौत हो गई।
रिपोर्टों के मुताबिक, चाबहार और कोनारक के आसपास भी कई धमाके हुए, जिसके बाद ईरान का एयर डिफेंस सिस्टम सक्रिय हो गया। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी इरना के अनुसार, ताजा हमलों के बाद चाबहार के कुछ हिस्सों में बिजली आपूर्ति बाधित हो गई।
सरकारी चैनल प्रेस टीवी के अनुसार, अबू मूसा द्वीप पर कुल 10 विस्फोट हुए, जबकि चाबहार और कोनारक में भी 10 धमाकों की आवाजें सुनी गईं। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चाबहार के एक अस्पताल पर दागे गए हथियार का मलबा गिरा, जबकि शहीद बेहेश्ती पोर्ट, कलंतरी पोर्ट और समुद्री यातायात नियंत्रण टावर को भी नुकसान पहुंचा है। इसके अलावा, बंदर अब्बास में आठ और सीरिक में तीन धमाकों की सूचना है। बुशेहर में दो प्रोजेक्टाइल गिरने और जास्क में भी कई विस्फोट होने की खबर है।
इस बीच, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ सोशल पर चाबहार में हमले के बाद उठती आग की लपटों की तस्वीर साझा की। उन्होंने दावा किया कि यह कार्रवाई एक दिन पहले ईरान द्वारा जहाजों पर किए गए हमले का जवाब है। ट्रंप ने चेतावनी दी कि यदि ऐसी कार्रवाई दोबारा हुई तो अमेरिका का जवाब इससे कहीं अधिक गंभीर होगा।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने भी सैन्य कार्रवाई की पुष्टि की है। एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर जारी बयान में सेंटकॉम ने कहा कि राष्ट्रपति के निर्देश पर अमेरिकी बलों ने ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान फिर से शुरू कर दिया है। अमेरिकी सेना के अनुसार, इन हमलों का उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री आवाजाही की स्वतंत्रता के लिए खतरा पैदा करने की ईरानी क्षमता को कमजोर करना है।
इससे पहले, नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान पत्रकारों से बातचीत में राष्ट्रपति ट्रंप ने संकेत दिए थे कि अमेरिका ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई जारी रखेगा। उन्होंने कहा था कि यदि ईरान अपनी गतिविधियों से बाज नहीं आता, तो उसे कड़ा जवाब दिया जाएगा। वहीं, नाटो ने भी अमेरिका की सैन्य कार्रवाई का समर्थन किया है।

