ईरान पर लगातार 10वीं रात अमेरिकी हमला, होर्मुज को लेकर बढ़ा तनाव
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ईरान पर लगातार 10वीं रात अमेरिकी हमला, होर्मुज को लेकर बढ़ा तनाव

अमेरिका ने लगातार 10वीं रात ईरान के सैन्य ठिकानों पर हमला किया। होर्मुज जलडमरूमध्य, हूती खतरे और बढ़ते तनाव से वैश्विक ऊर्जा संकट गहराया।


अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव लगातार तेज होता जा रहा है। अमेरिकी सेना ने लगातार दसवीं रात ईरान के कई रणनीतिक ठिकानों पर हवाई हमले किए। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) का कहना है कि इन हमलों का उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यावसायिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही बहाल करना और ईरान की सैन्य क्षमताओं को कमजोर करना है।इन हमलों से पहले ईरान पर अमेरिका के सहयोगी देशों कुवैत, जॉर्डन और बहरीन पर हमले करने का आरोप लगा था। साथ ही हाल के संघर्ष में एक और अमेरिकी सैनिक की मौत के बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है।

होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अमेरिका की कार्रवाई

अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने सोशल मीडिया पर जारी बयान में कहा कि ताजा हवाई हमले उन सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर किए गए हैं, जिनका इस्तेमाल ईरान कथित तौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यावसायिक जहाजों पर हमले के लिए करता है।अमेरिका का दावा है कि इन अभियानों का मकसद अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार को सुरक्षित बनाना और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण इस समुद्री मार्ग को फिर से सामान्य करना है।

किन ठिकानों को बनाया गया निशाना?

CENTCOM के मुताबिक, अमेरिकी हमलों में ईरान के कई अहम सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया, जिनमें शामिल हैं सैन्य कमांड सेंटर,एयर डिफेंस सिस्टम,तटीय निगरानी केंद्र, समुद्री सैन्य क्षमताएं, मिसाइल और ड्रोन लॉन्च साइट, कम्युनिकेशन नेटवर्क।अमेरिका ने यह भी बताया कि पिछले सप्ताह ईरान के एक बंदरगाह पर पुलों और एक निगरानी टावर को भी निशाना बनाया गया था।

ईरान में कई शहरों पर हमले

ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी के अनुसार, अमेरिकी हमलों में तबरीज के पास एक व्यक्ति की मौत हो गई।इसके अलावा जिन क्षेत्रों पर हमले किए गए, उनमें शामिल हैं। बंदर इमाम खोमेनी (खुजेस्तान प्रांत), सिरिक (होर्मोजगन प्रांत), जास्क (होर्मोजगन प्रांत), कोनारक (सिस्तान और बलूचिस्तान प्रांत), चाबहार बंदरगाह (सिस्तान और बलूचिस्तान प्रांत)। ये सभी इलाके ईरान की समुद्री सुरक्षा और रणनीतिक गतिविधियों के लिहाज से महत्वपूर्ण माने जाते हैं।

कूटनीतिक कोशिशें भी जारी

सैन्य कार्रवाई के बीच कूटनीतिक स्तर पर भी हलचल तेज हो गई है। ईरान के गृह मंत्री बातचीत के लिए पाकिस्तान पहुंचे हैं। पाकिस्तान को इस संघर्ष में एक संभावित मध्यस्थ के रूप में देखा जा रहा है।हालांकि, अमेरिका और ईरान के बीच पिछले महीने हुआ अंतरिम युद्धविराम समझौता टूट चुका है और दोनों देशों के बीच फिर से संघर्ष शुरू हो गया है।

वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर बढ़ा खतरा

लड़ाई तेज होने के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही लगभग ठप हो गई है। यह समुद्री मार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है, इसलिए इसका असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर साफ दिखाई देने लगा है।तनाव बढ़ने के कारण हाल के सप्ताहों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

हूती विद्रोहियों की नई धमकी

इस बीच यमन में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने भी संघर्ष को और गंभीर बना दिया है। हूती समूह ने दावा किया है कि वह लाल सागर में सऊदी अरब के जहाजों की आवाजाही रोकने की योजना बना रहा है।लाल सागर तेल निर्यात के लिए एक अहम वैकल्पिक समुद्री मार्ग माना जाता है। यदि यहां भी तनाव बढ़ता है, तो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर और बड़ा असर पड़ सकता है।

पूरे पश्चिम एशिया पर मंडरा रहा संकट

लगातार हो रहे सैन्य हमलों, समुद्री मार्गों पर बढ़ते खतरे और क्षेत्रीय देशों की बढ़ती भागीदारी ने पश्चिम एशिया के संकट को और गहरा कर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द कूटनीतिक समाधान नहीं निकला, तो इसका असर केवल क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार भी गंभीर रूप से प्रभावित हो सकते हैं।

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  • 21 July 2026 9:51 AM IST

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