CJP मंच पर उत्तराखंड का दागी सिपाही: अभिजित दिपके पर उठे गंभीर सवाल
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CJP मंच पर उत्तराखंड का 'दागी' सिपाही: अभिजित दिपके पर उठे गंभीर सवाल

उत्तराखंड पुलिस की वर्दी पहनकर CJP मंच से भड़काऊ भाषण देने वाला शेर सिंह निकला निलंबित सिपाही; हरिद्वार में दर्ज है जमीन कब्जाने और गैंगस्टर से सांठगांठ का आपराधिक इतिहास।


CJP Protest: राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक के खिलाफ चल रहा कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का आंदोलन अब एक नए और बड़े विवाद के केंद्र में आ गया है। शुक्रवार को प्रदर्शन के दौरान उस वक्त हड़कंप मच गया जब उत्तराखंड पुलिस की वर्दी पहने एक व्यक्ति ने CJP प्रमुख अभिजित दिपके के साथ मंच साझा किया और युवाओं को भड़काऊ अंदाज में संबोधित किया। हालांकि, मामले के तूल पकड़ते ही उत्तराखंड पुलिस ने इस तथाकथित पुलिसकर्मी की पोल खोलकर रख दी है।


अभिजित दिपके ने बताया था 'मिसाल', शाम ढलते ही खुला सच
शुक्रवार को मंच से CJP प्रमुख अभिजित दिपके ने गर्व के साथ पुलिस की वर्दी पहने इस शख्स को जनता से रूबरू कराया और इसे एक बड़ी 'मिसाल' के रूप में पेश किया।


मंच से शेर सिंह ने अपने भाषण के दौरान कहा था:

"क्या हमारे उत्तराखंड में पर्चून की दुकान पर मिलते हैं पेपर? पर्चून की दुकान पर पटवारी का! गुरुकुल में देखा है हमने!... और आज से उत्तराखंड पुलिस की नौकरी से शेर सिंह जी रिजाइन करता है! लगाओ, लगाओ आज के बाद अभिजीत भाई को, हम बताएंगे तुम्हें लोकतंत्र..."

इस खुलासे के बाद से राजनीतिक गलियारों और सोशल मीडिया पर अभिजित दिपके की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं कि क्या CJP ने बिना किसी बुनियादी पड़ताल के एक विवादित चेहरे को मंच दे दिया, या फिर आंदोलन की सुर्खियां बटोरने के लिए यह सब जानबूझकर किया गया?


कुमाऊँ रेंज की IG निवेदिता कुकरेती का बड़ा खुलासा
मामले की गंभीरता को देखते हुए कुमाऊँ रेंज की आईजी निवेदिता कुकरेती ने आधिकारिक बयान जारी कर इस शख्स का कच्चा-चिट्ठा खोल दिया।

पुलिस के खुलासे के मुताबिक:

निलंबन (Suspension): मंच पर वर्दी पहनकर घूमने वाला शेर सिंह वर्तमान में उत्तराखंड पुलिस का एक निलंबित कांस्टेबल है। वह 28 जून 2026 से पिथौरागढ़ से अनाधिकृत (Unauthorized) रूप से अनुपस्थित चल रहा था, जिसके बाद 20 जुलाई 2026 को उसे निलंबित कर दिया गया था।

गैंगस्टर और आपराधिक इतिहास: इस सिपाही के तार कुख्यात गैंगस्टर प्रवीण वाल्मीकि जैसे अपराधियों से जुड़े हैं। यह भोले-भाले लोगों को डरा-धमकाकर जमीनों पर कब्जा करने के संगठित अपराध में शामिल था।

जेल की हवा और बर्खास्तगी: इसके खिलाफ हरिद्वार में एफआईआर संख्या 415/2025 दर्ज है। 15 सितंबर 2025 को इसे गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था, जहां से यह महीनों बाद जमानत (Bail) पर बाहर आया था। पुलिस विभाग की ओर से इसे सेवा से बर्खास्त (Dismissal) करने की प्रक्रिया पहले से ही गतिमान है।

उत्तराखंड पुलिस ने साफ कर दिया है कि उसके द्वारा दिए गए ताजा अनर्गल और भ्रामक बयानों को लेकर अब अलग से सख्त वैधानिक और विभागीय कार्रवाई की जा रही है। बहरहाल, इस खुलासे के बाद जंतर-मंतर के छात्र आंदोलन और CJP की भूमिका पर गंभीर सवालिया निशान खड़े हो गए हैं।


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