
उत्तराखंड में इंजीनियरिंग पेपर लीक, 2 परीक्षा रद्द, प्रोफेसर पर FIR
उत्तराखंड टेक्निकल यूनिवर्सिटी का बड़ा फैसला; शिवालिक कॉलेज के असिस्टेंट प्रोफेसर पर 90% सवाल व्हाट्सएप पर लीक करने का आरोप, 7 साल के लिए डिबार।
Jantar Mantar: दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट (NEET) और अन्य राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में धांधली को लेकर चल रहे देशव्यापी धरना-प्रदर्शन के बीच उत्तराखंड से एक और बड़े पेपर लीक का मामला सामने आया है। वीर माधो सिंह भंडारी उत्तराखंड टेक्निकल यूनिवर्सिटी (UTU) में इंजीनियरिंग के दो विषय के पेपर कथित तौर पर परीक्षा से पहले ही लीक हो गए। मामला उजागर होने के तुरंत बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने दोनों विषयों की परीक्षाएं रद्द कर दी हैं और आरोपी प्रोफेसर के खिलाफ कानूनी शिकंजा कस दिया है।
असिस्टेंट प्रोफेसर ने व्हाट्सएप ग्रुप पर भेजा था पेपर
मिली जानकारी के मुताबिक, आरोपी शिक्षक आशीष कुमार गुप्ता देहरादून स्थित शिवालिक कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग में सहायक प्रोफेसर हैं और यूनिवर्सिटी के लिए पेपर सेटर के रूप में प्रश्नपत्र तैयार कर रहे थे।
आरोप है कि 8 जुलाई को आयोजित हुई 'मशीन लर्निंग फॉर इंटरनेट ऑफ थिंग्स' परीक्षा से ठीक पहले, प्रोफेसर ने प्रश्नपत्र के 90% से मिलते-जुलते सवाल अपने कॉलेज के 22 छात्रों वाले व्हाट्सएप ग्रुप में भेज दिए थे। शिकायत मिलने पर जब यूनिवर्सिटी ने जांच की, तो पता चला कि एक अन्य पेपर भी पहले से ही लीक हो चुका था।
7 साल के लिए ब्लैकलिस्ट, कॉलेज की भूमिका पर सवाल
उत्तराखंड टेक्निकल यूनिवर्सिटी की वाइस चांसलर (VC) प्रोफेसर तृप्ता ठाकुर ने इस पूरे घटनाक्रम पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा:
"इस शिक्षक ने अपने कॉलेज के महज 22 बच्चों को फायदा पहुंचाने के लिए पूरी परीक्षा प्रणाली से समझौता किया। यूनिवर्सिटी की नैतिक जिम्मेदारी है कि ऐसे शिक्षकों को सिस्टम से बाहर किया जाए। हमने आरोपी प्रोफेसर को अगले 7 वर्षों के लिए परीक्षा संबंधी सभी गतिविधियों से पूरी तरह बैन (Debar) कर दिया है। इसके साथ ही कॉलेज प्रबंधन की ढिलाई पर असंतोष जताते हुए आरोपी शिक्षक पर FIR दर्ज कराई गई है।"
वीसी तृप्ता ठाकुर ने बताया कि दोनों रद्द की गई परीक्षाओं का आयोजन अब अगस्त महीने में कराया जाएगा और जल्द ही नई तिथियों की घोषणा की जाएगी।
देशभर में एनटीए (NTA) और नीट को लेकर बने संवेदनशील माहौल के बीच देहरादून से आई इस खबर ने एक बार फिर शिक्षण संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था और विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। छात्र संगठन अब केवल शिक्षकों पर ही नहीं, बल्कि निजी कॉलेजों की मान्यता रद्द करने की मांग पर अड़ गए हैं।
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