
JNU प्रोफेसर जोया हसन का भाषण आखिरी पल में रद्द, सरदार पटेल स्कूल कार्यक्रम पर मचा बवाल
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में राजनीति अध्ययन केंद्र की प्रोफेसर एमेरिटा प्रोफेसर जोया हसन, कार्यक्रम में बतौर चीफ गेस्ट शामिल होने वाली थीं। बाद में कार्यक्रम का आयोजन नए चीफ गेस्ट के साथ हुआ।
दिल्ली के लोधी स्टेट स्थित सरदार पटेल स्कूल में स्वतंत्रता दिवस को लेकर को होने वाला एक कार्यक्रम विवादों में घिर गया। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में राजनीति अध्ययन केंद्र की प्रोफेसर एमेरिटा और सामाजिक विज्ञान स्कूल की पूर्व डीन, प्रोफेसर जोया हसन, कार्यक्रम में बतौर चीफ गेस्ट शामिल होने वाली थीं लेकिन उनका भाषण अंतिम समय में कैंसिल कर दिया गया। इसके बाद नए चीफ गेस्ट के साथ कार्यक्रम का आयोजन हुआ।
आरोप है कि विश्व हिंदू परिषद की ओर से हसन को बतौर मुख्य अतिथि के बुलाने का विरोध किया गया जिसके चलते यह कदम उठाया गया।
नए चीफ गेस्ट के साथ हुआ कार्यक्रम
हसन को स्कूल के स्वतंत्रता दिवस और स्कॉलरशिप अवॉर्ड समारोह के लिए चीफ गेस्ट के तौर पर बुलाया गया था। उन्हें झंडा फहराना था और स्टूडेंट्स को संबोधित करना था। स्कूल की तरफ से जारी इनविटेशन में कहा गया था कि कार्यक्रम सुबह 10 बजे शुरू होना था।
विवाद के बीच यह कार्यक्रम स्कूल के ऑडिटोरियम में हुआ। गुजरात एजुकेशन सोसाइटी (GES) की प्रेसिडेंट और स्कूल की एल्युम्ना श्वेता कल्याणवाला को हसन की जगह चीफ गेस्ट बनाया गया। GES स्कूल को मैनेज करने वाली पेरेंट बॉडी है।
सोशल मीडिया पर लोगों ने उठाए सवाल
सोशल मीडिया पर इसे लेकर लोग नाराजगी जाहिर कर रहे हैं।
इकोनॉमिस्ट जयती घोष ने एक्स पर लिखा, “यह सरकार आखिर कितनी डरी हुई है? प्रख्यात विद्वान प्रोफेसर जोया हसन को दिल्ली पुलिस ने सरदार पटेल विद्यालय के स्वतंत्रता दिवस समारोह में ‘बहुलतावाद’ (Pluralism) विषय पर बोलने से रोक दिया। पुलिस ने स्कूल प्रशासन पर दबाव डाला और कार्यक्रम रद्द करवाने के लिए मजबूर किया। स्कूल के इतिहास में यह पहली बार है जब ऐसा कोई कार्यक्रम रद्द किया गया है।"
घोष के मुताबिक, "स्कूल के गेट पर विरोध कर रहे वीएचपी के कुछ प्रदर्शनकारियों की संख्या पुलिस बल की तुलना में बहुत कम थी। जब सरकारी प्रशर काम नहीं आया तो ये सख्त तरीका अपनाया गया। " उन्होंने सवाल उठाया, "हमारे देश के सबसे प्रतिष्ठित सामाजिक वैज्ञानिकों में से एक की ओर से स्कूली बच्चों को बहुलतावाद पर दिया जाने वाला एक व्याख्यान आखिर हमारे मौजूदा नेताओं के लिए इतना असहनीय क्यों है?"
दिल्ली यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर अपूर्वानंद ने सोशल मीडिया दिल्ली पुलिस की भूमिका सवाल उठाते हुए लिखा, "दिल्ली पुलिस को VHP के उपद्रवियों को रोकना चाहिए था, लेकिन पुलिस ने स्कूल को प्रोफ़ेसर ज़ोया हसन का भाषण रद्द करने पर मजबूर कर दिया। फिर भी वे चाहते हैं कि उन्हें एक प्रोफेशनल फ़ोर्स के तौर पर सम्मान मिले। जिन बच्चों को प्रोफ़ेसर हसन से मिलने से रोका गया, वे खुद ही पता लगा लेंगे कि वह कौन हैं।'

