CBSE को पहले से थी खामियों की खबर, फिर भी लागू कर दिया OSM, छात्रों के भविष्य से खिलवाड़?
12वीं बोर्ड परीक्षा में ऑन-स्क्रीन मार्किंग को लागू करने के लिए सीबीएसई इतना बेकरार क्यों थी? आखिर क्यों बगैर ठोस ट्रायल के वो भी विशेषज्ञों के इस सुझाव की ऑन-स्क्रीन मार्किंग को इस वर्ष लागू ना किया जाए, सीबीएसई इसे लागू करने को लेकर इतनी जल्दबाजी में क्यों थी?
क्या सीबीएसई को ऑन-स्क्रीन मार्किंग में खामियों को लेकर पहले ही चेतावनी मिल गई थी? क्या ट्रायल के दौरान ही विशेषज्ञों ने सीबीएसई को ऑन-स्क्रीन मार्किंग में आ रही दिक्कतों को लेकर आगाह किया था? क्या ट्रायल में शामिल लोगों ने ऑन-स्क्रीन मार्किंग को लागू करने से पहले एक साल तक परीक्षण का सुझाव दिया था? तो सवाल उठता है कि सीबीएसई बोर्ड को 12वीं बोर्ड परीक्षा में ऑन-स्क्रीन मार्किंग को लागू करने की इतनी जल्दबाजी क्यों थी?
12वीं बोर्ड परीक्षा में ऑन-स्क्रीन मार्किंग को लागू करने के लिए सीबीएसई इतना बेकरार क्यों थी? आखिर क्यों बगैर ठोस ट्रायल के... वो भी विशेषज्ञों के इस सुझाव की ऑन-स्क्रीन मार्किंग को इस वर्ष लागू ना किया जाए... सीबीएसई इसे लागू करने को लेकर इतनी जल्दबाजी में क्यों थी? ये कुछ ऐसी खबरें सामने आ रही है जो कि पूरे सिस्टम... शिक्षा मंत्रालय और सीबीएसई को कटघरे में खड़ा कर रहा है.
CBSE की 12वीं बोर्ड परीक्षा के नतीजे आने के बाद हजारों छात्रों ने अपने अंकों को लेकर सवाल उठाए. किसी ने कहा कि उसकी कॉपी पूरी जांची नहीं गई, तो किसी ने आरोप लगाया कि कुछ उत्तरों को देखा ही नहीं गया. अब सामने आई जानकारी से पता चलता है कि जिस ऑन-स्क्रीन मार्किंग को लेकर विवाद हो रहा है, उसकी खामियों की चेतावनी CBSE को परीक्षा शुरू होने से पहले ही मिल चुकी थी. दरअसल, इस साल CBSE ने पहली बार Answer Sheets की जांच के लिए ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम लागू किया. इस व्यवस्था में कॉपी की जांच करने वाले परीक्षक कागज की कॉपी की बजाय उसकी स्कैन की गई डिजिटल कॉपी कंप्यूटर पर देखकर नंबर देते हैं.
लेकिन इस सिस्टम को लागू करने से पहले जनवरी में दिल्ली के पांच स्कूलों में तीन दिन का ट्रायल किया गया था. इस ट्रायल में प्रिंसिपल, टीचर्स, परीक्षक और विषय से जुड़े विशेषज्ञ शामिल हुए थे. ट्रायल के दौरान ऑन-स्क्रीन मार्किंग में कई तकनीकी और मूल्यांकन संबंधी समस्याएं सामने आई थीं. न्यूज रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ मामलों में मुख्य परीक्षक द्वारा बढ़ाए गए अंक सिस्टम में घटे हुए दिखाई दिए. कई जगह स्क्रीन पर दिख रहे अंक और आधिकारिक मार्किंग स्कीम में अंतर पाया गया. कुछ प्रश्नों के सभी हिस्सों के अंक नहीं दिख रहे थे. सिस्टम कई बार फ्रीज हो रहा था और मूल्यांकन का काम अपने आप सेव भी नहीं हो रहा था. यहां तक कि खाली पन्नों और बिना उत्तर वाले सवालों पर भी अंक मिल जा रहा था.
ट्रायल में शामिल लोगों ने सुझाव दिया था कि इस नई व्यवस्था को लागू करने से पहले कम से कम एक साल तक अलग-अलग जगहों पर इसका परीक्षण किया जाए और खामियों को दूर किया जाए. लेकिन इन सुझावों के बावजूद हैरानी की बात ये है कि CBSE ने इसे सीधे बोर्ड परीक्षा में लागू कर दिया और छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर दिया. 4 लाख के करीब छात्रों ने फिर से कॉपी जांच के लिए आवेदन किया है जिन्हें लगता है कि उन्हें जो बोर्ड परीक्षा में नंबर मिले वो कम है.
13 मई को जब 12वीं के नतीजे घोषित हुए तो कई छात्रों ने शिकायत की कि उनकी कॉपियों के कुछ उत्तर जांचे ही नहीं गए. कुछ छात्रों ने यह भी आरोप लगाया कि स्कैन की गई कॉपियां धुंधली थीं, जिससे उत्तर पढ़ना मुश्किल था. अब ये मामला दिल्ली हाईकोर्ट जा पहुंचा है जहां याचिकाकर्ताओं ने सीबीएसई की ऑन स्क्रीन मार्किंग प्रणाली में कथित तकनीकी खामियों, जांच में गड़बड़ियों और शिकायत निवारण की कमजोर व्यवस्था का मुद्दा उठाया गया है. CBSE का कहना है कि ट्रायल के बाद सिस्टम में कई सुधार किए गए थे. लेकिन छात्रों और शिक्षकों की शिकायतों ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या ये सुधार पर्याप्त थे?
मंगलवार 2 जून को केंद्र सरकार ने CBSE के तात्कालीन अध्यक्ष राहुल सिंह और सचिव हिमांशु गुप्ता को उनके मौजूदा पदों से तबादला कर दिया गया है. ये समझना जरूरी है बर्खास्त नहीं किया गया है. सरकार ने पूरे मामले की जांच के लिए एस राधा चौहान की अध्यक्षता में एक सदस्यीय पैनल का गठन किया है जो कि सीबीएसई द्वारा On-Screen Marking सर्विसेज सिस्टम के प्रक्योरमेंट से जुड़े मामले की जांच करेगी. लेकिन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान अपने पद पर बने रहेंगे. केवल अधिकारियों पर गाज गिरी है. गाज भी नहीं गिरी है बल्कि तबादला की गई है जबकि कांग्रेस नेता लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी समेत पूरा विपक्ष धर्मेंद्र प्रधान को हटाने की मांग कर रहा है.
CBSE ने छात्रों की शिकायतें दर्ज करने के लिए एक विशेष पोर्टल भी शुरू किया है, जो 6 जून 2026 तक खुला रहेगा. लेकिन ऑन स्क्रीन मार्किंग के लिए CBSE ने हैदराबाद की कंपनी Coempt Edu Teck को डिजिटल स्कैनिंग और ऑन-स्क्रीन मूल्यांकन का ठेका दिया था. जिस प्रकार से इस कंपनी को टेंडर दिया गया उसे लेकर अब सवाल उठ रहे हैं.
CBSE की ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली में खामियों को उजागर करने वाला Whistleblower झारखंड के 17 वर्षीय छात्र सार्थक सिद्धांत मंगलवार को कांग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह की अध्यक्षता वाली संसद की शिक्षा से जुड़ी स्थाई समिति के बुलावे पर पेश हुए. सार्थक सिद्धांत 12वीं बोर्ड परीक्षा में शामिल हुए थे और OSM प्रणाली से प्रभावित छात्रों में शामिल हैं. इस बैठक में हटाये गए सीबीएसई के चेयरमैन राहुल सिंह, स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव संजय कुमार, शिक्षा मंत्रालय के दूसरेअधिकारी और बोर्ड के प्रतिनिधि भी मौजूद थे. उनके सामने सार्थक सिद्धांत ने कलई खोल दी. देश के आजाद होने के बाद ये पहला मौका जब 17 वर्ष का कोई युवा संसदीय समिति के सामने पेश हुआ है. समिति के अध्यक्ष दिग्विजय सिंह ने कहा कि सार्थक सिद्धांत ने समिति के सामने अपना प्रेजेंटेशन दिया है. सार्थक सिद्धांत ने लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधीसे भी मुलाकात की है जिसकी तस्वीरे खुद राहुल ने सोशल मीडिया पर साझा किया है.
बहरहाल CBSE के चेयरमैन और सचिव का तबादला तो कर दिया गया पर शिक्षा मंत्री का क्या? जिनके इस्तीफे की मांग पर विपक्ष अड़ा हुआ है.

