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दिल्ली में ₹650 करोड़ का हेल्थ स्कैम, राम मंदिर चंदा चोरी पर वकीलों का बहिष्कार!

आप सांसद संजय सिंह ने खोला रेखा गुप्ता सरकार के घोटाले का कच्चा-चिट्ठा; अयोध्या के वकीलों ने चंपत राय का केस लड़ने से किया इनकार; बिहार एनकाउंटर पर मांझी के बयान से मचा हड़कंप।


Rajpath: उत्तर प्रदेश के सियासी संग्राम, बिहार के एनकाउंटर विवाद से लेकर देश की राजधानी दिल्ली तक, इस समय भ्रष्टाचार और सामाजिक न्याय के मुद्दों पर जमकर राजनीतिक रार मची हुई है। 'द फेडरल देश' के खास बुलेटिन में आज हम तीन ऐसी बड़ी खबरों का पूरा कच्चा-चिट्ठा खोलेंगे, जिसने लखनऊ, पटना से लेकर दिल्ली तक के हुक्मरानों की नींद उड़ा दी है।




1. दिल्ली में ₹650 करोड़ का 'हेल्ड स्कैम': बाजार से 20 गुना महंगे दामों पर हुई खरीदारी
दिल्ली की राजनीति में इस समय ₹650 करोड़ के एक बहुत बड़े स्वास्थ्य घोटाले (Health Scam) ने हड़कंप मचा दिया है। आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने सीधे तौर पर दिल्ली की मौजूदा रेखा गुप्ता सरकार (BJP) को कटघरे में खड़ा करते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं।

"दिल्ली की बीजेपी सरकार की नाक के नीचे सरकारी खजाने को ऐसा हेल्थ टॉनिक पिलाया गया, जिससे अच्छे-अच्छों का हाजमा खराब हो जाए। आम आदमी पार्टी ने रेखा गुप्ता की 16-17 महीने पुरानी सरकार में स्वास्थ्य विभाग के इस महा-घोटाले का भंडाफोड़ किया है।" - संजय सिंह, सांसद, AAP

घोटाले की पूरी क्रोनोलॉजी:
अस्पतालों के लिए एक्सरे मशीनें, मरीजों के बेडशीट और अन्य मेडिकल उपकरण जरूरत से कई गुना ज्यादा और बाजार मूल्य से 10 से 20 गुना अधिक कीमतों पर खरीदे गए।

एक्सरे मशीनें: जिन मशीनों की बाजार कीमत महज ₹45 करोड़ थी, उनके लिए सरकारी खजाने से ₹148 करोड़ का भारी-भरकम भुगतान किया गया। यानी अकेले एक्सरे मशीनों में ₹100 करोड़ का सीधा खेल हुआ (बिलों में 230% का जंप)।

ओआरएस (ORS) पैकेट का खेल
: जो ओआरएस पैकेट बेहद सस्ते मिलते हैं, सरकार ने उसके 50 लाख पैकेट खरीदे और कीमत लगाई गई ₹15 प्रति पैकेट। जहां खर्च ₹1.25 करोड़ होना था, उसे बढ़ाकर ₹5.25 करोड़ कर दिया गया।

बेडशीट और अन्य उपकरण: ₹150 की बेडशीट को ₹450 (200% मुनाफा) में खरीदा गया, जबकि सी-आर्म रेडियोलॉजिकल इक्विपमेंट की कीमतों में 340% की बढ़ोतरी कर सरकारी खजाने को चूना लगाया गया।

आप सांसद संजय सिंह ने ईडी और सीबीआई जैसी जांच एजेंसियों पर तंज कसते हुए पूछा है कि विपक्ष पर जरा सा आरोप लगते ही आसमान सिर पर उठाने वाली एजेंसियां आज इस ₹650 करोड़ के महा-घोटाले पर मौन क्यों हैं?

2. राम मंदिर चंदा चोरी मामला: अयोध्या के वकीलों का 'बहिष्कार का चक्रव्यूह'
अयोध्या में राम मंदिर के चंदे और चढ़ावे की कथित चोरी का मामला अब बीजेपी के लिए गले की फांस बनता जा रहा है। आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल द्वारा 'चंदा चोरों के सामाजिक बहिष्कार' के आह्वान का जमीन पर गहरा असर दिखने लगा है।

इस धर्मयुद्ध की पहली बड़ी चिंगारी खुद अयोध्या से फूटी है, जहां अयोध्या बार एसोसिएशन (फैजाबाद) के वकीलों ने ऐतिहासिक स्टैंड लिया है। वकीलों ने साफ कर दिया है कि वे राम मंदिर के चंदे में हेराफेरी करने वाले आरोपियों और ट्रस्टियों (चंपत राय, अनिल मिश्रा, गोपाल राव) का केस लड़ना तो दूर, उनकी सूरत देखना भी पसंद नहीं करेंगे। वकीलों ने मांग की है कि ये ट्रस्टी तुरंत फैजाबाद छोड़ दें।

"सरकार भले ही इन चंदा चोरों के साथ खड़ी हो, लेकिन जो राम के नहीं हुए, वो राष्ट्र के क्या ही होंगे!" - अरविंद केजरीवाल, प्रमुख, AAP

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विपक्ष ने बीजेपी की सबसे मजबूत 'राम मंदिर पिच' पर ऐसी गुगली फेंकी है, जिसने संघ परिवार और विश्व हिंदू परिषद (VHP) को पूरी तरह बैकफुट पर ला दिया है।

3. बिहार में 'भरत तिवारी एनकाउंटर' पर अगड़ा बनाम पिछड़ा की जंग
बिहार के भोजपुर में हुआ भरत तिवारी एनकाउंटर अब महज एक पुलिस कार्रवाई नहीं रह गया है, बल्कि यह एनडीए (NDA) गठबंधन के भीतर और पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश की सियासत में भी एक नया मोर्चा बनता दिख रहा है।

जीतन राम मांझी की 'क्लीन चिट' से विवाद तेज
बिहार सरकार ने इस एनकाउंटर की न्यायिक जांच के लिए एक आयोग गठित कर दिया है। लेकिन जांच शुरू होने से पहले ही केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने पुलिस कार्रवाई को सही ठहराते हुए इसे 'अगड़ा बनाम पिछड़ा' की ऐतिहासिक बहस से जोड़ दिया है। मांझी ने गया जिले में 25 साल पहले हुए दलितों-पिछड़ों के उत्पीड़न का हवाला देते हुए पूछा कि "क्या तब पिछड़े-दलितों के साथ अन्याय नहीं हुआ था? आज हंगामा सिर्फ इसलिए कट रहा है क्योंकि मारा गया अपराधी (भरत तिवारी) अगड़ी जाति से आता है।"

यूपी चुनाव पर असर की आशंका:
जहां एक तरफ मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और बीजेपी के अन्य वरिष्ठ नेता संयम बरतते हुए न्यायिक जांच रिपोर्ट का इंतजार करने की बात कर रहे हैं, वहीं मांझी के इस तीखे बयान से एनडीए की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि उत्तर प्रदेश में ब्राह्मण मतदाताओं का एक वर्ग पहले से ही कुछ मुद्दों को लेकर नाराज चल रहा है। ऐसे में मांझी का यह बयान यूपी में स्वर्ण (विशेषकर ब्राह्मण) मतदाताओं को नाराज कर सकता है और 2027 के चुनाव में विपक्ष इसे बड़ा मुद्दा बनाने की तैयारी में है।


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