दिल्ली हाईकोर्ट का आदेश फाइलों में दबाया! 21 मौतों का जिम्मेदार कौन?

4 Jun 2026 7:25 PM IST

मालवीय नगर हादसे के बाद जागी MCD-दमकल; हाईकोर्ट के जनवरी के आदेश की उड़ाई थी धज्जियां। मुंडका कांड जैसी मजिस्ट्रेट जांच क्या महज नाटक? सुबह पीड़ितों से मिलीं CM रेखा गुप्ता।

Malviya Nagar Fire Incident: दिल्ली देश की राजधानी है, यहाँ लोगों के पास देने के लिए अपनी जान तो है लेकिन वक़्त नहीं है। और सच तो यह है कि वक़्त हर दुःख को हल्का कर देता है। यही वजह है कि बुधवार, 3 जून की सुबह मालवीय नगर में हुए भीषण अग्निकांड में जब 21 लोगों की मौत हुई, तो दिल्ली के शासन-प्रशासन ने ठीक वैसा ही पुराना राग अलापना शुरू कर दिया जैसा मई 2022 में मुंडका हादसे (30 मौतें) के वक्त अलापा था। वक़्त बदला, सरकार बदली लेकिन नहीं बदली तो सिर्फ प्रशासन की लापरवाही और भ्रष्टाचार।


इस घटना के बाद दिल्ली सरकार, MCD और दिल्ली पुलिस की तरफ से जांच के नाम पर एक बार फिर इतने बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, मानो अब सब सुधर जाएगा। लेकिन सच यह है कि भ्रष्टाचार रूपी बरगद के पेड़ की जड़ें समय के साथ ऊपर से नीचे की ओर फैलती ही जा रही हैं। 2022 में मुंडका की अवैध इमारत और फैक्ट्री में लगी आग के बाद भी तत्कालीन 'ईमानदार सरकार' ने मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए थे, कुछ कर्मचारियों को बलि का बकरा बनाया गया था, लेकिन जमीनी हकीकत आज भी शून्य है। अब मालवीय नगर में भी जवाबदेही तय करने और कठोर कार्रवाई का वही पुराना खोखला दावा दोहराया जा रहा है।

6 महीने पहले आया था दिल्ली हाईकोर्ट का आदेश; MCD और दमकल की कथित रिश्वतखोरी ने बनाया 'लाक्षागृह'
इस पूरे अग्निकांड की सबसे बड़ी खोजी हकीकत यह है कि अगर दिल्ली के शासन-प्रशासन को जरा भी शर्म होती, तो यह हादसा कभी होता ही नहीं।

हाईकोर्ट के आदेश की अनदेखी: दिल्ली हाईकोर्ट ने इसी साल जनवरी में राजधानी के सभी होटलों और रेस्तरां में अग्नि सुरक्षा (Fire Safety) पुख्ता करने का सख्त आदेश दिया था।

5 मई को आखिरी रिमाइंडर
: इसके खिलाफ याचिकाकर्ता ने सोए हुए अधिकारियों को जगाने के लिए लगातार कई अनुस्मारक (Reminders) भेजे, जिसमें आखिरी रिमाइंडर 5 मई को भेजा गया था।

फाइलों में दबा आदेश: इसके बावजूद MCD, दमकल विभाग और स्थानीय पुलिस की कथित रिश्वतखोरी, घोर लापरवाही और पूर्ण उदासीनता के कारण यह आदेश फाइलों में ही दबा रहा, जिसका नतीजा 21 बेगुनाह जिंदगियों की आहुति के रूप में सामने आया है।

सुबह पीड़ितों से मिलीं मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता; रात भर में ही होटलों पर लटके ताले, तीमारदार सड़क पर आए
बुधवार को राहत कार्य में बाधा न आए, इसलिए दूरी बनाने वाली मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता गुरुवार सुबह आखिरकार मैक्स अस्पताल पहुंचीं और उन्होंने वहां भर्ती पीड़ितों व उनके परिजनों से मुलाकात की।

दूसरी तरफ, बुधवार रात को दिल्ली सरकार द्वारा अवैध होटलों के खिलाफ बड़े पैमाने पर मुहीम चलाने की घोषणा का जमीन पर उलटा और अमानवीय असर देखने को मिला। अपनी गर्दन फंसती देख रात को ही मालवीय नगर और हौज रानी गांव में स्थित तमाम अवैध होटलों के मालिकों ने आनन-फानन में अपने होटलों पर ताले जड़ दिए। इसका खामियाजा मैक्स और अन्य अस्पतालों में इलाज कराने आए गंभीर मरीजों के तीमारदारों को भुगतना पड़ा, जिन्हें आधी रात को होटलों से बाहर निकाल दिया गया और वे सड़कों पर भटकने को मजबूर हो गए।

ग्राउंड ज़ीरो पर पहुँचे फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स; एम्स और मैक्स अस्पताल से आई मृतकों की सूची
गुरुवार को जांच को आगे बढ़ाते हुए दिल्ली फॉरेंसिक साइंस लैबोरेट्री (FSL) के वैज्ञानिकों की टीम होटल 'फ्लरिश स्टेज' पहुंची और आग लगने के वैज्ञानिक कारणों व सबूतों को इकट्ठा किया।
अस्पतालों से जारी आधिकारिक सूची के अनुसार, इस हादसे में कुल 21 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें 12 विदेशी नागरिक शामिल हैं।