
अल नीनो और खाड़ी संकट का दोहरा वार, पर भारत का अन्न भंडार तैयार
मौसम विभाग की सुस्त मानसून की चेतावनियों के बीच राहत की खबर, सरकार के पास सुरक्षित है 817 लाख टन खाद्यान्न का ऐतिहासिक बफर स्टॉक।
Siyasat : पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और देश पर मंडराते अल नीनो (El Niño) के साए के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक बेहद राहत भरी खबर है। मौसम विभाग द्वारा सुस्त मानसून और सूखे जैसी स्थिति की चेतावनियों के बावजूद, भारत सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) इस बार किसी भी मौसमी या वैश्विक संकट से निपटने के लिए पूरी तरह मुस्तैद हैं। देश के पास अनाज का इतना बड़ा बैकअप मौजूद है कि आम जनता की थाली और जेब पर इसकी आंच आना नामुमकिन है।
इसी गंभीर आर्थिक और कृषि संकट के विभिन्न पहलुओं को लेकर 'द फेडरल देश' के विशेष कार्यक्रम 'सियासत' में विस्तृत पड़ताल की गई है। पूरी रिपोर्ट आप नीचे दिए गए वीडियो में देख सकते हैं:
संकट से निपटने के लिए भारत का 'अभेद्य किला'
वित्त मंत्रालय की हालिया मंथली इकोनॉमिक रिपोर्ट के आंकड़े देश को एक बड़ा आर्थिक भरोसा देते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत ने संभावित सूखे या खाद्यान्न संकट से निपटने के लिए पहले ही पुख्ता इंतजाम कर लिए हैं:
ऐतिहासिक बफर स्टॉक: अप्रैल 2026 के अंत तक सरकारी एजेंसियों के पास 817.53 लाख टन खाद्यान्न (गेहूं और चावल) का बंपर स्टॉक सुरक्षित था।
जलाशयों की बेहतर स्थिति: देश के प्रमुख जलाशयों में पानी का स्तर पिछले 10 वर्षों के औसत से भी बेहतर स्थिति में है, जिससे पीने के पानी और सिंचाई का संकट काफी हद तक टल गया है।
फसलों की रिकॉर्ड बुआई: गर्मी की फसलों (जायद) की बुआई में इस बार अच्छी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
कृषि मंत्रालय का 'एडवांस कंटिंजेंसी प्लान' एक्टिव
भले ही जून के महीने में दो दशकों (20 साल) की सबसे कम बारिश देखी जा रही हो, लेकिन केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने खुद मोर्चा संभाल लिया है। कृषि मंत्रालय ने संभावित कम बारिश वाले जिलों के लिए एक एडवांस एक्शन प्लान जमीन पर उतार दिया है:
वैकल्पिक खेती की तैयारी: जिन इलाकों में मानसून सुस्त रहेगा, वहां किसानों को तुरंत कम समय में तैयार होने वाली (Short-duration) वैकल्पिक फसलें मुहैया कराई जाएंगी। इसके साथ ही, कपास उत्पादन और दलहन (दालों) में आत्मनिर्भरता बढ़ाने के लिए पानी बचाने की आधुनिक तकनीकों (जैसे ड्रिप इरीगेशन और वॉटर हार्वेस्टिंग) को बढ़ावा दिया जा रहा है।
वैश्विक झटकों को झेलने में सक्षम है भारतीय अर्थव्यवस्था
एक तरफ जहां लेबनान संकट के बाद ईरान द्वारा 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (Strait of Hormuz) को प्रभावित करने से वैश्विक ऊर्जा बाजार में दबाव है, वहीं भारत का घरेलू आर्थिक ढांचा इस बार काफी मजबूत है।
आरबीआई (RBI) की मॉनिटरी पॉलिसी कमेटी और वित्त विशेषज्ञ मान रहे हैं कि भारतीय कृषि अब 'क्लाइमेट-रेजिलिएंट' (मौसम के अनुकूल) हो चुकी है। फसलों के विविधीकरण (Crop Diversification) और सरकार की मुस्तैदी के चलते ग्रामीण अर्थव्यवस्था में मांग (Demand) कमजोर नहीं होगी, जिससे देश की विकास दर की रफ्तार लगातार बनी रहेगी।
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