क्या राम रहीम BJP का चुनावी तुरुप का इक्का है? पूरी कहानी
डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम एक बार फिर 30 दिनों की पैरोल पर जेल से बाहर आ गया है। 2017 में रेप केस में 20 साल की सजा मिलने के बाद यह 16वीं बार है जब उसे राहत मिली है।

हर चुनाव से पहले ही क्यों खुल जाते हैं राम रहीम के लिए जेल के दरवाज़े? क्या बलात्कार का दोषी राम रहीम वोट बैंक की राजनीति का सबसे बड़ा हथियार बन चुका है? क्या भाजपा के लिए पंजाब और हरियाणा की राजनीति में वो अब भी गेमचेंजर है? क्या कानून सबके लिए बराबर है या रसूखदारों के लिए अलग रास्ते हैं? आखिर क्यों बार-बार पैरोल पर बाहर आता है राम रहीम? राम रहीम, बीजेपी का लाड़ला क्यों है?
हरियाणा की रोहतक स्थित सुनारिया जेल का गेट एक बार फिर खुला और बाहर निकला डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह। रेप केस में 20 साल की सजा काट रहा राम रहीम एक बार फिर 30 दिनों की पैरोल पर जेल से बाहर आ चुका है। 2017 में दोषी ठहराए जाने के बाद यह 16वीं बार है जब उसे जेल से अस्थायी राहत मिली है। मुद्दा यह नहीं है कि वो जेल से बाहर आया है, विषय यह है कि वह हर बार कब बाहर आता है।
जब चुनाव करीब हों, जब पंजाब में राजनीतिक हलचल तेज हो जब हरियाणा में सत्ता हासिल करने की पूरजोर कोशिश हो तब अचानक राम रहीम की पैरोल मंजूर हो जाती है। यही वजह है कि अब उसकी हर रिहाई को सिर्फ कानूनी प्रक्रिया नहीं, बल्कि राजनीतिक रणनीति की नजर से देखा जाने लगा है। इस बार मामला गंभीर इसलिए है क्योंकि अगले साल पंजाब विधानसभा चुनाव होने हैं। पंजाब के मालवा क्षेत्र की 30 से 40 सीटों पर डेरा सच्चा सौदा का गहरा प्रभाव माना जाता है। खासकर दलित, पिछड़े वर्ग और गरीब ग्रामीण वोटरों के बीच राम रहीम की पकड़ आज भी मजबूत मानी जाती है।
गुरमीत राम रहीम सिर्फ एक धार्मिक संगठन का प्रमुख नहीं था। उसने डेरा सच्चा सौदा को एक विशाल सामाजिक और राजनीतिक नेटवर्क में बदल दिया। लाखों अनुयायी, अरबों की संपत्ति, फिल्में, म्यूजिक एल्बम, राजनीतिक अपीलें और नेताओं के साथ खुले मंच साझा करना। राम रहीम ने खुद को एक धर्मगुरु से कहीं बड़ा ब्रांड बना लिया था। लेकिन 25 अगस्त 2017 को सब कुछ बदल गया।सीबीआई की विशेष अदालत ने दो साध्वियों से रेप के मामले में राम रहीम को दोषी करार दिया और 20 साल की सजा सुनाई। फैसले के बाद पंचकूला हिंसा भड़क उठी। 30 से ज्यादा लोगों की मौत हुई। उस दिन देश ने देखा कि एक तथाकथित बाबा की राजनीतिक और सामाजिक ताकत कितनी बड़ी हो चुकी थी।
राम रहीम को कब और कितनी दफा राहत मिली और किस शासन में मिली यह जानना भी अहम है। 2017 में रेप केस में दोषी करार, 20 साल की सजा। 2020 में पहली बार पैरोल। फरवरी 2022 में पंजाब विधानसभा चुनाव से ठीक पहले 21 दिन की फरलो। जून 2022 में फिर एक महीने की पैरोल। अक्टूबर 2022 में हरियाणा के आदमपुर उपचुनाव से पहले 40 दिन की पैरोल। जनवरी 2023 में फिर पैरोल। जुलाई 2023 में फिर राहत। नवंबर 2023 में चुनावी माहौल के बीच पैरोल। जनवरी 2024 में लोकसभा चुनाव से पहले राहत। अगस्त 2024 में हरियाणा चुनाव से पहले फरलो।जनवरी 2025 में दिल्ली चुनावों से पहले पैरोल। अब पंजाब में चुनावी तैयारियों के बीच 30 दिन की पैरोल। अब भाजपा पर क्यों सवाल उठाए जाते हैं, इस सवाल का जवाब इस टाइमलाइन में छिपी है। राम रहीम को जब जब राहत मिली उस वक्त हरियाणा में बीजेपी की सरकार थी।ऐसे में विपक्ष पूछता है आखिर इतनी मेहरबानी क्यों?
सवाल यह है कि.राम रहीम, बीजेपी का लाडला क्यों है। इस सवाल का जवाब ऐसे समझा जा सकता है। 2017 में रेप केस में 20 साल की सजा मिलने के बाद 16 बार पैरोल या फरलो मिल चुकी है। खास बात यह है कि उसकी ज्यादातर रिहाई पंजाब, हरियाणा या लोकसभा चुनावों से पहले हुई, जिससे भाजपा पर राजनीतिक फायदे के आरोप लगते हैं। डेरा सच्चा सौदा का पंजाब के मालवा क्षेत्र और हरियाणा में दलित, पिछड़े और ग्रामीण वोटरों के बीच मजबूत प्रभाव माना जाता है। करीब 30-40 सीटों पर डेरे का असर चुनावी नतीजों को प्रभावित कर सकता है। कई चुनावों में डेरा समर्थकों का झुकाव भाजपा की तरफ देखा गया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा इस सामाजिक और धार्मिक नेटवर्क को अपने पक्ष में बनाए रखना चाहती है।
क्या राम रहीम अब भी राजनीतिक ताकत है? इस सवाल का जवाब हां में है। भले ही वह जेल में हो लेकिन डेरा सच्चा सौदा का नेटवर्क आज भी बेहद मजबूत माना जाता है। हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक उसके समर्थकों का बड़ा आधार मौजूद है। डेरा सिर्फ धार्मिक संस्था नहीं बल्कि सामाजिक ढांचा भी है। नशा मुक्ति अभियान, रक्तदान शिविर, गरीबों के लिए भोजन के जरिए इसने बड़ा जनाधार बनाया और आगे चलकर यही जनाधार राजनीतिक ताकत में बदल गया। राम रहीम भले जेल में हो लेकिन उसका एक संदेश का असर हजारों गांवों तक जाता है। यही वजह है कि राजनीतिक दल उसे पूरी तरह नजरअंदाज नहीं कर पाते।
पंजाब में आम आदमी पार्टी के नेता राम रहीम के मुद्दे पर बीजेपी की घेराबंदी करते हैं, वो कहते हैं कि डेरा सच्चासौदा के जरिए बीजेपी अपनी जमीन तैयार कर रही है। लेकिन राम रहीम के पैरोल पर पंजाब सरकार में मंत्री अमन अरोड़ा ने हैरान करने वाला जवाब दिया।
अगर 20 साल की सजा काट रहा एक दोषी बार-बार जेल से बाहर आता रहे और हर बार चुनावी मौसम उसके साथ खड़ा दिखाई दे तो सवाल उठना लाजिमी है। यही वजह है कि देश का एक बड़ा वर्ग आज पूछ रहा है आखिर क्यों है राम रहीम सत्ता की राजनीति का इतना अहम चेहरा? आखिर वो क्यों है बीजेपी का लाडला?

