मोदी कैबिनेट में बड़े फेरबदल की तैयारी, सहयोगियों को मिलेगा बड़ा हिस्सा
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मोदी कैबिनेट में बड़े फेरबदल की तैयारी, सहयोगियों को मिलेगा बड़ा हिस्सा

द फेडरल देश के 'सियासत' शो में बताया गया है कि मानसून सत्र से पहले सरकार में राघव चड्ढा और काकुली घोष समेत कई नए चेहरों की एंट्री हो सकती है।


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Siyasat: क्या लोकसभा के मानसून सत्र से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने केंद्रीय मंत्रिमंडल (कैबिनेट) में कोई बड़ा फेरबदल करने वाले हैं? राजनीतिक गलियारों में यह सुगबुगाहट तब और तेज हो गई जब मोदी सरकार में केरल से एकमात्र ईसाई चेहरा रहे जॉर्ज कुरियन ने अचानक मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। प्रधानमंत्री की सिफारिश पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उनका इस्तीफा स्वीकार भी कर लिया है। डिजिटल न्यूज प्लेटफॉर्म 'द फेडरल देश' के विशेष 'सियासत' कार्यक्रम में मनीष कुमार ने इस पूरे घटनाक्रम और संभावित कैबिनेट विस्तार का बेहद सटीक और विस्तृत राजनीतिक विश्लेषण प्रस्तुत किया है। उन्होंने बताया कि कैसे हाल ही में विपक्ष (खासकर टीएमसी और आम आदमी पार्टी) में हुई ऐतिहासिक टूट के बाद बदले समीकरणों के बीच एनडीए के सहयोगी दल अब मोदी सरकार में बड़ी हिस्सेदारी की उम्मीद लगाए बैठे हैं।



जॉर्ज कुरियन के इस्तीफे के बाद किसकी बारी?
जॉर्ज कुरियन राज्यसभा सदस्य थे जिनका कार्यकाल खत्म हो चुका था और उन्हें सेवा विस्तार नहीं दिया गया। उनके जाने के बाद अब यह तय माना जा रहा है कि पीएम मोदी अपनी कैबिनेट में कुछ नए चेहरों को एंट्री देने वाले हैं, जबकि कुछ पुराने मंत्रियों की छुट्टी होना लगभग तय है।

इस फेरबदल की जद में जो बड़े नाम आ रहे हैं, उनमें शामिल हैं:

रवनीत सिंह बिट्टू: पंजाब से आने वाले मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू का राज्यसभा कार्यकाल समाप्त हो चुका है। हालांकि वे अभी भी पद पर बने हुए हैं, लेकिन कयास हैं कि बीजेपी उन्हें 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव में उतारने की तैयारी कर रही है, जिसके चलते उनका इस्तीफा लिया जा सकता है।

हर्ष मल्होत्रा: मोदी कैबिनेट में शामिल हर्ष मल्होत्रा को हाल ही में दिल्ली बीजेपी का नया प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है। बीजेपी के 'एक व्यक्ति, एक पद' के सिद्धांत के तहत उनकी कैबिनेट से छुट्टी हो सकती है।

पंकज चौधरी: केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी को उत्तर प्रदेश बीजेपी का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है, जिसके चलते वे भी इस सांगठनिक नियम के तहत मंत्री पद छोड़ सकते हैं।

पंजाब और बंगाल से कौन से नए चेहरों को मिल सकती है जगह?
पंजाब में विधानसभा चुनाव को देखते हुए बीजेपी वहां अपना प्रतिनिधित्व शून्य नहीं करना चाहेगी। ऐसे में हाल ही में आम आदमी पार्टी (AAP) छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए पंजाब के सात राज्यसभा सांसदों में से किसी एक को मंत्री बनाया जा सकता है। इस रेस में राघव चड्ढा का नाम सबसे आगे चल रहा है, जिसे आम आदमी पार्टी में बड़ी टूट कराने के 'इनाम' के तौर पर देखा जा रहा है।

वहीं, पश्चिम बंगाल में हुए बड़े उलटफेर के बाद ममता बनर्जी की टीएमसी से अलग हुए 20 लोकसभा सांसदों ने 'नेशनलिस्ट सिटीजंस पार्टी ऑफ इंडिया' (NCPI) नाम का नया दल बनाया है, जो अब एनडीए का हिस्सा बन चुका है। खास बात यह है कि 20 सांसदों के साथ यह दल अब एनडीए में बीजेपी के बाद सबसे बड़ा घटक दल बन गया है, जिसने टीडीपी (16 सांसद) और जेडीयू (12 सांसद) को भी पीछे छोड़ दिया है। इस नए धड़े से काकुली घोष दस्तीदार का नाम मोदी कैबिनेट की रेस में सबसे आगे चल रहा है।

महाराष्ट्र के सहयोगियों का दबाव और मंत्रालयों का मोलतोल
महाराष्ट्र की राजनीति में हुए हालिया बदलावों के बाद एनडीए के भीतर दबाव और बढ़ गया है।

अजीत पवार की एनसीपी: मोदी सरकार को बाहर से समर्थन दे रही सुनेत्रा पवार की एनसीपी से अभी तक केंद्रीय मंत्रिमंडल में किसी को जगह नहीं मिली थी। इस बार फेरबदल में एनसीपी कोटे से एक मंत्री बनना तय माना जा रहा है।

एकनाथ शिंदे की शिवसेना: शिवसेना (UBT) से टूटकर आए 6 सांसदों के बाद शिंदे गुट के पास अब कुल 13 लोकसभा सांसद हो गए हैं (जो जेडीयू के 12 सांसदों से अधिक है)। वर्तमान में शिंदे गुट से प्रतापराव गणपतराव जाधव के पास केवल आयुष मंत्रालय का स्वतंत्र प्रभार है। चूंकि जेडीयू के पास ललन सिंह (कैबिनेट) और रामनाथ ठाकुर (राज्य मंत्री) के रूप में दो पद हैं, इसलिए एकनाथ शिंदे अब जेडीयू की तर्ज पर अपनी पार्टी के लिए एक कैबिनेट और एक राज्य मंत्री पद की मजबूत दावेदारी ठोक सकते हैं।

महिला आरक्षण विधेयक और महिलाओं की बढ़ती हिस्सेदारी
आगामी मानसून सत्र के दौरान मोदी सरकार एक बार फिर डीलिमिटेशन (परिसीमन) विधेयक और महिला आरक्षण संशोधन विधेयक लोकसभा में ला सकती है। इससे पहले अप्रैल में बजट सत्र के दौरान सरकार को इस पर मुंह की खानी पड़ी थी। लेकिन अब विपक्ष में बिखराव (टीएमसी, आप और शिवसेना UBT में टूट) के बाद सरकार के हौसले बुलंद हैं।

इस ऐतिहासिक बिल को पास कराने के अपने इरादे को जाहिर करने के लिए पीएम मोदी कैबिनेट में महिलाओं की संख्या बढ़ा सकते हैं। वर्तमान में मोदी मंत्रिमंडल में केवल 7 महिलाएं हैं (2 कैबिनेट और 5 राज्य मंत्री)। चूंकि सरकार का पूरा फोकस लोकसभा में महिलाओं के लिए 33% सीटें आरक्षित करने पर है, इसलिए प्रतीकात्मक और रणनीतिक रूप से कैबिनेट में भी महिलाओं की हिस्सेदारी बढ़ाई जाना तय है।

2029 से पहले का आखिरी और निर्णायक फेरबदल
साल 2029 के लोकसभा चुनाव और 2027 के कई राज्यों के विधानसभा चुनावों से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह आखिरी बड़ा कैबिनेट फेरबदल होगा। पीएम मोदी की रणनीति साफ है कि वे सरकार से कुछ अनुभवी मंत्रियों को संगठन में भेजकर बीजेपी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की नई टीम को मजबूत करना चाहते हैं, और दूसरी तरफ एनडीए के सभी पुराने व नए सहयोगियों को सरकार में उचित प्रतिनिधित्व देकर 'इंडिया ब्लॉक' को एक अभेद्य चुनौती देना चाहते हैं।


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