NEET 2026: अव्यवस्था के चक्रव्यूह में फंसा लाखों युवाओं का भविष्य

1 Jun 2026 8:20 PM IST  ( Updated:2026-06-01 14:52:09  )

साल 2026 में दोबारा नीट पेपर लीक से 22 लाख छात्रों का भविष्य अधर में। प्रयागराज में कंडल मार्च के बाद कोचिंग सील, छात्र नेताओं को किया गया डिटेन।

देशभर में मेडिकल प्रवेश परीक्षा 'नीट' (NEET) को लेकर उपजा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। साल 2024 में हुए पेपर लीक की सीबीआई जांच और आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद भी व्यवस्था में कोई सुधार नजर नहीं आ रहा है। साल 2026 में एक बार फिर नीट परीक्षा का पेपर लीक होने से करीब 22 लाख छात्रों का भविष्य अधर में लटक गया है। इस गंभीर मुद्दे पर 'द फेडरल देश' की विशेष चर्चा में प्रतियोगी छात्रों और राजनीतिक विश्लेषकों ने सरकार की नीतियों और परीक्षा कराने वाली संस्था एनटीए (NTA) पर तीखे सवाल उठाए हैं।


परीक्षा प्रणाली पर खड़े हुए बड़े सवाल
चर्चा में शामिल लखनऊ के प्रतियोगी छात्र शिवम त्रिपाठी ने अपनी पीड़ा साझा करते हुए कहा कि छात्र 45 डिग्री के भीषण तापमान में, स्टेशनों पर रातें गुजारकर परीक्षा केंद्रों तक पहुंचते हैं। लेकिन परीक्षा के कुछ ही दिनों बाद पेपर लीक की खबरें उनके मनोबल को पूरी तरह तोड़ देती हैं।

छात्रों और विशेषज्ञों द्वारा उठाए गए मुख्य बिंदु:

दोषियों को तुरंत जमानत: 2024 के पेपर लीक मामले के मुख्य आरोपी आज जमानत पर बाहर हैं, जिससे अपराधियों में कानून का डर खत्म हो चुका है।

एनटीए (NTA) की जवाबदेही का अभाव: सुप्रीम कोर्ट ने भी माना है कि एनटीए की मौजूदा संरचना में जवाबदेही की भारी कमी है, क्योंकि वहां अधिकांश नियुक्तियां अस्थाई तौर पर की गई हैं।

तकनीकी खामियां: सीबीएसई की ओएसएम (OSM) तकनीक को बिना उचित ट्रायल के लागू कर दिया गया, जिससे लाखों छात्रों के मूल्यांकन में गड़बड़ियां सामने आ रही हैं।

लोकतांत्रिक विरोध को कुचलने का आरोप
प्रयागराज में जब छात्रों और कोचिंग शिक्षकों ने इस अव्यवस्था के खिलाफ शांतिपूर्ण 'कंडल मार्च' निकाला, तो प्रशासन द्वारा कथित तौर पर दमनकारी नीति अपनाई गई।

शिवम त्रिपाठी (प्रयागराज के छात्र नेता आशुतोष पांडे के प्रतिनिधि): "प्रयागराज प्रशासन ने विरोध का समर्थन करने वाले तीन बड़े कोचिंग संस्थानों को सील कर दिया और छात्रों की आवाज उठाने जा रहे छात्र नेताओं को डिटेन (हिरासत में) कर लिया गया। क्या लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखना भी अब अपराध है?"

राजनीतिक सरगर्मी और विपक्ष का हमला
समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता मनोज यादव ने मौजूदा सरकार पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि यह सरकार युवाओं के रोजगार और उनके सुनहरे भविष्य को लेकर कतई गंभीर नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि ब्लैकलिस्टेड कंपनियों को बार-बार परीक्षा कराने का टेंडर दिया जा रहा है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि जो व्यवस्था उनके भविष्य को बर्बाद कर रही है, उसे लोकतांत्रिक तरीके से सबक सिखाने का समय आ गया है।

केवल 'री-एग्जाम' समाधान नहीं
छात्रों का साफ कहना है कि वे परीक्षा के फॉर्म से लेकर, परीक्षा की तिथि और फिर रिजल्ट के लिए केवल आंदोलन ही नहीं करते रह सकते। सरकार को केवल कोचिंग बंद करने या छात्रों को गिरफ्तार करने के बजाय एक पारदर्शी और जवाबदेह व्यवस्था बनानी होगी, ताकि भविष्य में किसी भी नौनिहाल के सपनों का सौदा न हो सके।