राजपथ: राम मंदिर चंदा विवाद में SIT जांच तेज, 80 पर FIR की तैयारी
राम मंदिर चंदे में बड़े सिंडिकेट का पर्दाफाश; SIT राडार पर आए चंपत राय और अनिल मिश्रा, टिन्नू यादव पर लगा 8 महीने की CCTV फुटेज मिटाने का गंभीर आरोप।
Rajpath: 'द फेडरल देश' के खास कार्यक्रम 'राजपथ' में बात सत्ता और सियासत की, जहाँ हर हलचल सीधे देश की राजनीति को प्रभावित करती है। आज 'राजपथ' पर हम बात करेंगे अयोध्या के राम मंदिर चंदा विवाद की, जिसकी जांच अब सीधे ट्रस्ट के सबसे रसूखदार चेहरों तक पहुंच चुकी है। साथ ही बात होगी बिहार एनडीए के भीतर छिड़े उस 'गृह युद्ध' की, जिसने सम्राट चौधरी और उपेंद्र कुशवाहा को आमने-सामने खड़ा कर दिया है, और अंत में नजर डालेंगे भोजपुर के उस एनकाउंटर पर, जो अब सुप्रीम कोर्ट की दहलीज तक पहुंच गया है।
कार्यक्रम 'राजपथ' के तहत तीनों खबरें:
1. राजपथ: अयोध्या राम मंदिर चंदा विवाद में एसआईटी जांच तेज, 80 लोगों पर एफआईआर की तैयारी
अयोध्या। अयोध्या के प्रसिद्ध राम मंदिर में चंदे की हेराफेरी का मामला अब एक बड़े संगठित सिंडिकेट के रूप में सामने आ रहा है। मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) जल्द ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अपनी शुरुआती रिपोर्ट सौंपने वाली है। सूत्रों के मुताबिक, अगले एक से दो दिनों में इस मामले में पहली आधिकारिक एफआईआर (FIR) दर्ज की जा सकती है, जिसमें करीब 80 लोगों को नामजद किए जाने की उम्मीद है।
इस जांच में सबसे बड़ा नाम टिन्नू यादव का सामने आ रहा है, जो राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का बेहद करीबी माना जाता है और मंदिर में दान राशि की गिनती का काम देखता था। टिन्नू यादव पर आरोप है कि उसने सबूत मिटाने के उद्देश्य से हाई-सिक्योरिटी जोन की पूरे 8 महीने की सीसीटीवी फुटेज ही डिलीट करवा दी।
एसआईटी की जांच की आंच अब ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा जैसे रसूखदार चेहरों तक पहुंच चुकी है। दोनों को अयोध्या छोड़कर न जाने की सख्त हिदायत दी गई है। चंपत राय का संबंध राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और विश्व हिंदू परिषद (VHP) से होने के कारण इस मामले ने उत्तर प्रदेश में एक नया राजनीतिक मोड़ ले लिया है। विपक्ष की ओर से समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए आशंका जताई है कि कहीं छोटे मोहरों को बलि का बकरा बनाकर बड़े सफेदपोश आकाओं को बचाने की कोशिश तो नहीं की जा रही है। वहीं, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपक्ष से जांच के लिए 15 दिन का इंतजार करने की अपील की है।
2. राजपथ: बिहार एनडीए में 'उत्तराधिकार' की जंग, उपेंद्र कुशवाहा का नीतीश कुमार पर सीधा हमला
पटना। बिहार विधानसभा चुनाव से पहले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के भीतर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की राजनीतिक विरासत को लेकर गृह युद्ध छिड़ गया है। राष्ट्रीय लोक मोर्चा के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर सीधा हमला बोलते हुए कहा है कि नीतीश बाबू अपनी अगली पीढ़ी का नेतृत्व तैयार करने में पूरी तरह विफल रहे हैं।
कुशवाहा का यह तीखा बयान जेडीयू नेता लल्लन सिंह के उस दावे के बाद आया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि नीतीश कुमार ने खुद बीजेपी नेता और उप-मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को अपना आशीर्वाद दिया है। उपेंद्र कुशवाहा ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा कि नीतीश कुमार को किसी बीजेपी नेता का समर्थन करने के बजाय अपनी पार्टी (JDU) के भीतर से ही किसी चेहरे को आगे बढ़ाना चाहिए था।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह पूरी लड़ाई बिहार के सबसे महत्वपूर्ण 'लवकुश' (कुर्मी-कोयरी) वोट बैंक पर कब्जे की है। उपेंद्र कुशवाहा और सम्राट चौधरी दोनों एक ही समाज से आते हैं। कुशवाहा को डर है कि यदि एनडीए में सम्राट चौधरी इस वोट बैंक के इकलौते नेता बन गए, तो क्षेत्रीय क्षत्रपों की सौदेबाजी की ताकत (Bargaining Power) खत्म हो जाएगी और बिहार की राजनीति पूरी तरह से बीजेपी के नियंत्रण में चली जाएगी।
3. राजपथ: भोजपुर में भरत तिवारी एनकाउंटर मामला पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, अपनों ने ही उठाए सवाल
भोजपुर/पटना। बिहार के भोजपुर में हुए भरत तिवारी एनकाउंटर मामले ने राज्य की कानून-व्यवस्था और सियासत में भूचाल ला दिया है। बिना किसी आपराधिक रिकॉर्ड वाले युवक भरत तिवारी के पुलिस एनकाउंटर का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद, यह मामला अब देश की सर्वोच्च अदालत (Supreme Court) तक पहुंच गया है। मामले में सीबीआई (CBI) जांच की मांग की जा रही है।
इस घटना के बाद सत्ताधारी गठबंधन (NDA) के घटक दल ही आमने-सामने आ गए हैं। जेडीयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने पुलिसिया कार्रवाई पर गहरा संशय व्यक्त करते हुए कहा है कि महज चार पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर देना काफी नहीं है, क्योंकि वीडियो साफ तौर पर मर्डर का शक पैदा करता है। इस बीच, सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का साल 2023 का एक पुराना बयान भी वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने कहा था कि सजा देने का अधिकार सिर्फ कोर्ट को है, पुलिस को नहीं।
मामले की गंभीरता और चौतरफा राजनीतिक दबाव को देखते हुए बिहार सरकार (उप-मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी) ने आनन-फानन में उच्च स्तरीय न्यायिक जांच के आदेश दे दिए हैं। हालांकि, इस घटना ने सत्ता पक्ष के भीतर ही कानून-व्यवस्था की स्थिति पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
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