
राजपथ: शिवसेना यूबीटी में बड़ी टूट और कोटा में राहुल गांधी का प्रहार
द फेडरल के राजपथ कार्यक्रम में मनीष कुमार ने बताया कि महाराष्ट्र में 'ऑपरेशन टाइगर' और कोटा में शिक्षा व्यवस्था पर राहुल गांधी के हमलों की क्या है इनसाइड स्टोरी.
Rajpath: पश्चिम बंगाल में टीएमसी के भीतर मचे घमासान के बाद अब महाराष्ट्र की सियासत से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली शिवसेना (UBT) एक बार फिर गहरे संकट में घिर गई है। 'द फेडरल देश' के विशेष कार्यक्रम 'राजपथ' में मनीष कुमार के साथ इस पूरे घटनाक्रम और देश की शिक्षा व्यवस्था को लेकर कोटा में राहुल गांधी के तीखे हमलों का विस्तृत विश्लेषण किया गया।
1. महाराष्ट्र में 'ऑपरेशन टाइगर' सफल? शिवसेना (UBT) में महाविस्फोट
महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा भूचाल आ चुका है। यह लगभग तय माना जा रहा है कि शिवसेना (UBT) के 9 में से 6 सांसदों ने अलग गुट बनाने का फैसला कर लिया है, जिससे उद्धव ठाकरे और उनकी पार्टी की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ती जा रही हैं।
बैठक से नदारद रहे 6 सांसद: शिवसेना यूबीटी संसदीय दल की इस महत्वपूर्ण बैठक में 9 लोकसभा सांसदों में से केवल तीन सांसद—अरविंद सावंत, राजभाऊ वाजे और अनिल देसाई ही शामिल हुए। संजय राउत खुद राज्यसभा सदस्य के तौर पर इस बैठक में मौजूद थे।
व्हिप के उल्लंघन पर कड़ा रुख: संजय राउत ने साफ कहा कि जो सांसद बैठक में नहीं आए, उन्होंने पार्टी व्हिप का उल्लंघन किया है। पार्टी ने अब इन बागी सांसदों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है। उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी करके जवाब मांगा जाएगा और उनकी सदस्यता रद्द करने पर भी विचार हो रहा है।
राउत ने दी खुली चुनौती: राउत ने बागी सांसदों पर निशाना साधते हुए कहा कि कल जब वे लोकसभा स्पीकर से मिले थे, तो उसकी तस्वीर सार्वजनिक हुई थी। उन्होंने चुनौती दी कि अगर अन्य 6 सांसद भी स्पीकर से मिले हैं, तो उनकी तस्वीर दिखाई जाए। राउत ने इसे रणनीति नहीं, बल्कि 'विश्वासघात' करार दिया।
नेतृत्व पर से क्यों उठा भरोसा?
बागी सांसदों का तर्क है कि उन्हें आशंका थी कि भविष्य में पार्टी कांग्रेस के और करीब जा सकती है या उसके साथ विलय जैसे हालात बन सकते हैं। हालांकि, इस पर कई राजनीतिक सवाल उठ रहे हैं कि जब महाविकास अघाड़ी के तहत ये दल सरकार चला रहे थे, तब यह वैचारिक संकट क्यों नहीं उठा? पहले मुख्यमंत्री पद जाना, फिर पार्टी का नाम-चुनाव चिन्ह छिनना, फिर विधायक टूटना और अब सांसदों के स्तर पर यह नई चुनौती उद्धव ठाकरे के अस्तित्व के संकट को गहरा करती जा रही है। अब सवाल यह है कि टीएमसी और शिवसेना यूबीटी के बाद अगली बारी किसकी है?
2. ओम बिरला के गढ़ कोटा में गरजे राहुल गांधी: 'शिक्षा व्यवस्था है एक्सटॉर्शन मशीन'
एक तरफ जहाँ लोकसभा स्पीकर ओम बिरला टीएमसी और शिवसेना यूबीटी के बागी सांसदों के अलग गुट को मान्यता देने को लेकर चर्चाओं में हैं, वहीं दूसरी तरफ नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी उन्हीं के संसदीय क्षेत्र कोटा (राजस्थान) में छात्रों के बीच पहुंचे।
'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम: नीट (NEET) पेपर लीक और सीबीएसई की ऑन-स्क्रीन मार्किंग से परेशान छात्रों के बीच राहुल गांधी ने संवाद किया। देशभर से डॉक्टर, इंजीनियर और आईएएस-आईपीएस बनने का सपना लेकर कोटा आने वाले छात्रों के दर्द को उन्होंने करीब से समझा।
सिलेक्शन नहीं, रिजेक्शन सिस्टम है: राहुल गांधी ने भारत की शिक्षा व्यवस्था पर बड़ा हमला बोलते हुए कहा कि हमारा एजुकेशन सिस्टम सिलेक्शन सिस्टम नहीं बल्कि 'रिजेक्शन सिस्टम' है। उन्होंने इसे एक 'एक्सटॉर्शन मशीन' (वसूली मशीन) करार दिया।
आर्थिक बोझ पर प्रहार: राहुल ने साफ किया कि यह कोई राजनीतिक कार्यक्रम नहीं है और वे यहाँ कांग्रेस-बीजेपी की बात करने नहीं आए हैं, बल्कि वे छात्रों और उनके परिवारों पर पड़ने वाले भारी आर्थिक बोझ और परेशानी की चर्चा करना चाहते हैं।
भले ही राहुल गांधी इसे गैर-राजनीतिक कार्यक्रम कहें, लेकिन पेपर लीक, वैकेंसी न निकलने और बेरोजगारी को लेकर उनका हर एक बयान सीधे तौर पर सरकार और उसके पूरे एजुकेशन सिस्टम को कटघरे में खड़ा करता है।
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