राजपथ: यूपी में एनकाउंटर पर रार, बिहार में बंगला जंग और दिल्ली में SIR!
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राजपथ: यूपी में एनकाउंटर पर रार, बिहार में बंगला जंग और दिल्ली में SIR!

यूपी में एनकाउंटर पर अखिलेश यादव का योगी सरकार को खुला चैलेंज, बिहार में मंत्रियों के बीच छिड़ी 'बंगला जंग' और दिल्ली में 24 साल बाद वोटर लिस्ट का महा-ऑपरेशन शुरू।


Rajpath: उत्तर प्रदेश से लेकर बिहार और देश की राजधानी दिल्ली तक, इस समय सियासी पारा अपने चरम पर है। उत्तर प्रदेश में जहां कानून-व्यवस्था और एनकाउंटर नीति को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तलवारें खिंच गई हैं, वहीं बिहार की राजनीति जनता के सरोकारों को छोड़कर सरकारी आवासों यानी बंगलों के इर्द-गिर्द सिमट चुकी है। दूसरी तरफ, दिल्ली में मतदाता सूची को दुरुस्त करने का एक ऐसा 'महा-ऑपरेशन' शुरू होने जा रहा है, जो अगले चुनाव में कई दिग्गजों का खेल बना या बिगाड़ सकता है।

'द फेडरल देश' के खास कार्यक्रम 'राजपथ' में एंकर प्रदीप सहगल ने तीनों बड़ी खबरों का पूरा विश्लेषण किया।


1. योगी की USP पर अखिलेश का करारा वार: 2027 में खुलेगी एनकाउंटर की फाइल!
उत्तर प्रदेश की सियासत में इस समय सबसे बड़ा संग्राम मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सबसे बड़ी यूएसपी (USP)—'क्राइम-फ्री यूपी और बुलडोजर नीति' पर छिड़ गया है। अब तक हुक्मरान छाती ठोककर दावा करते रहे हैं कि योगी आदित्यनाथ ने राज्य से माफिया राज की कमर तोड़ दी है, लेकिन विपक्ष ने अब इस किले की दीवारों में दरार पैदा करने की रणनीति बना ली है।

सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव ने योगी सरकार की एनकाउंटर नीति पर अब तक का सबसे तीखा तंज कसा है। अखिलेश यादव ने सीधे लखनऊ से लेकर दिल्ली तक के हुक्मरानों को खुला चैलेंज देते हुए कहा:

"2027 में हमारी सरकार आने दीजिए, जितने भी 'फेक एनकाउंटर' हुए हैं, उन सबकी फाइलें खोलकर दूध का दूध और पानी का पानी कर देंगे!" — अखिलेश यादव, सपा सुप्रीमो

बुलडोजर नीति पर खड़े हुए सवाल
अखिलेश यादव ने राम मंदिर मामले में सामने आई चंदा चोरी और चढ़ावे की गड़बड़ी का हवाला देते हुए सरकार को घेरा और पूछा कि इस मामले में आखिर बाबा का बुलडोज़र किस गैरेज में पंचर होकर खड़ा है? विपक्ष का सीधा आरोप है कि यह एनकाउंटर नीति अपराधियों को खत्म करने के लिए नहीं, बल्कि पेपर लीक और बेरोजगारी जैसी सरकारी नाकामियों को छिपाने के लिए एक स्क्रिप्ट की तरह इस्तेमाल की जा रही है। सपा सुप्रीमो का यह दांव 2027 के महामुकाबले से पहले योगी सरकार के 'बुलडोजर ब्रांड' के गुब्बारे में सीधे सुई चुभाने जैसा है।

2. बिहार में विकास पीछे, 'बंगला पॉलिटिक्स' आगे!
पड़ोसी राज्य बिहार की बात करें तो वहां इन दिनों राजनीतिक बयानबाजी सड़क, स्कूल, अस्पताल या रोजगार पर नहीं, बल्कि सरकारी बंगलों पर आकर टिक गई है। बिहार की सियासत में इन दिनों गजब का खेल चल रहा है—कौन किस सरकारी आवास में रहेगा और किसका सामान कहां से हटेगा, यही सबसे बड़ी प्रतिष्ठा का प्रतीक बन चुका है।

एक बंगले का दिलचस्प सफर: ताजा विवाद स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार को आवंटित 5, देशरत्न मार्ग स्थित बंगले को लेकर है। पहले चर्चा थी कि इस बंगले को मुख्यमंत्री आवास परिसर में शामिल किया जाएगा। विपक्ष के हंगामे के बाद सरकार पीछे हटी, तो इसे दोनों उपमुख्यमंत्रियों को देने की बात हुई, लेकिन उन्होंने दिलचस्पी नहीं दिखाई। आखिरकार, यह बंगला स्वास्थ्य मंत्री के खाते में गया।

लालू-राबड़ी आवास पर भी घमासान: दूसरी तरफ, लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी के नए आवास में शिफ्ट होने की खबरों और पुराने आवास से कुछ सामान गायब होने के आरोपों ने सियासी गलियारों में नई बहस छेड़ दी है।

जनता के बुनियादी मुद्दे जैसे निवेश, स्वास्थ्य और कानून-व्यवस्था फिलहाल इन आलीशान सरकारी आवासों की दीवारों के पीछे दम तोड़ते नजर आ रहे हैं।

3. दिल्ली में मतदाता सूची का 'महा-ऑपरेशन' (SIR): 24 साल बाद घर-घर दस्तक
अगर आप देश की राजधानी दिल्ली में रहते हैं, तो आज से अगले एक महीने तक के लिए बेहद सावधान हो जाइए। दिल्ली में वोटर लिस्ट का एक बड़ा डिजिटल और जमीनी ऑपरेशन शुरू होने जा रहा है, जिसे चुनाव आयोग की भाषा में SIR कहते हैं।

दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी अशोक कुमार अपनी 13 हजार से ज्यादा बीएलओ (BLO) की फौज लेकर आपके घर दस्तक देने वाले हैं। दिल्ली में ऐसा व्यापक सर्वे आखिरी बार साल 2002 में हुआ था - यानी पूरे 24 साल बाद!

सावधान! इन 5 वजहों से कट सकता है आपका नाम:

बीएलओ के दौरे के दौरान आपका घर पर न मिलना।

बिना सूचना दिए अपना पता या घर बदल लेना।

मतदाता की मृत्यु हो जाना।

वोटर लिस्ट में दो जगह नाम होना।

विदेशी नागरिकता होना।

यदि बीएलओ को आपके घर पर ताला मिलता है, तो वह तीन बार चक्कर लगाएगा और 'एन्यूमरेटर फॉर्म' छोड़ेगा। इसके बाद भी आप नहीं मिले, तो आपका नाम लिस्ट से साफ होना तय है।

महत्वपूर्ण तारीखें (अपनी डायरी में नोट करें)
:

30 जून से 29 जुलाई: बीएलओ का घर-घर जाकर सर्वे।

5 अगस्त: पहली ड्राफ्ट वोटर लिस्ट का प्रकाशन (आपत्ति दर्ज कराने का मौका)।

7 अक्टूबर 2026: दिल्ली की अंतिम और फाइनल वोटर लिस्ट का प्रकाशन।

7 अक्टूबर को आने वाली यह फाइनल लिस्ट दिल्ली की आगामी सियासत में किस राजनीतिक दल का खेल बनाएगी और किसका बिगाड़ेगी, इस पर 'राजपथ' की नजर लगातार बनी रहेगी।


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