राम मंदिर दान विवाद: SIT की रिपोर्ट आई, फिर भी केस दर्ज करने में देरी क्यों?
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राम मंदिर दान विवाद: SIT की रिपोर्ट आई, फिर भी केस दर्ज करने में देरी क्यों?

कुंभ के बाद बढ़े चढ़ावे की गिनती और सुरक्षा में भारी लापरवाही की पुष्टि; सिंधी समाज ने मांगा 210 किलो चांदी की ईंटों का हिसाब, चौतरफा दबाव में सरकार।


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Ram Mandir SIT: अयोध्या के भव्य राम मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे और कीमती धातुओं की कथित चोरी का मामला अब उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बड़े भूचाल का रूप ले चुका है. विशेष जांच टीम (SIT) की अंतरिम रिपोर्ट आने के बाद जहां कई गंभीर वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताएं उजागर हुई हैं, वहीं मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी (सपा) ने इस मुद्दे पर सरकार को पूरी तरह से घेर लिया है.


'द फेडरल देश' के डिजिटल शो 'जनपथ' में हुई एक गर्मागर्म बहस के दौरान समाजवादी पार्टी की राष्ट्रीय प्रवक्ता शौर्या सिंह और लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार नितिन श्रीवास्तव ने इस पूरे मामले की परतें खोलीं और सरकार की नीयत पर गंभीर सवाल खड़े किए.


"कलम, स्याही और एडमिनिस्ट्रेशन सब आपका..." शौर्या सिंह के तीखे बाण
शो में चर्चा के दौरान जब एंकर मनीष ने सवाल उठाया कि एसआईटी के गठन और अनियमितताओं की पुष्टि के बावजूद उत्तर प्रदेश पुलिस ने अब तक इस मामले में कोई एफआईआर (FIR) दर्ज क्यों नहीं की? इस पर सपा प्रवक्ता शौर्या सिंह ने सरकार और व्यवस्था पर सीधा प्रहार किया.

शौर्या सिंह ने तंज कसते हुए कहा:

"एफआईआर तो तब दर्ज होगी जब निष्पक्षता होगी. यहाँ एक कहावत सटीक बैठती है— कलम भी आपकी, स्याही भी आपकी, किताब भी आपकी, कागज भी आपका और एडमिनिस्ट्रेशन भी आपका! स्कूल भी आपका, सिलेबस भी आपका... चोर, लुटेरे, डकैत भी आपके और पुलिस भी आपकी! तो ये एफआईआर करेंगे किसके ऊपर? हमारे या आपके ऊपर तो नहीं कर सकते ना? एफआईआर करेंगे तो इनके अपने ही लोग इसमें फंसेंगे."

सपा प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि अगर इस मामले में निष्पक्ष एफआईआर दर्ज हुई, तो ऐसे-ऐसे बड़े नाम निकलकर सामने आएंगे जिससे भारतीय जनता पार्टी की "सो-कॉल्ड (कथित) सनातनी पार्टी" होने के दावों की धज्जियां उड़ जाएंगी.

छोटे कर्मचारियों को मोहरा बनाने का आरोप
शौर्या सिंह ने ज़मीनी हकीकत का हवाला देते हुए कहा कि अयोध्या में कुछ पंडितों और छोटे कर्मचारियों के घरों से पैसे मिलने या उनकी संपत्तियां बढ़ने की बातें सामने आ रही हैं. लेकिन ये छोटे लोग सिर्फ "कठपुतली" हैं. असली खेल उन "बड़ी मछलियों" का है जिनके चंगुल में ये छोटे कर्मचारी पीस रहे हैं. उन्होंने मांग की कि कंस्ट्रक्शन कमेटी के हेड नृपेंद्र मिश्रा समेत पूरे ट्रस्ट और सिस्टम की घपलेबाजी पर जांच होनी चाहिए और इन जिम्मेदार लोगों को तुरंत निष्कासित किया जाना चाहिए.

सीबीआई और ईडी जांच की मांग
सपा प्रवक्ता ने कहा कि यह सिर्फ देश का नहीं बल्कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर का मामला है, क्योंकि विदेशों से भी श्रद्धालुओं ने अपनी आस्था के तहत राम मंदिर में चढ़ावा चढ़ाया है. इसलिए इसकी जांच केवल लोकल पुलिस या एसआईटी के भरोसे नहीं छोड़ी जा सकती. इस महाघोटाले की निष्पक्ष जांच के लिए सीबीआई (CBI) और ईडी (ED) को लगाया जाना चाहिए, हालांकि उन्होंने यह भी अंदेशा जताया कि मौजूदा दौर में ये केंद्रीय एजेंसियां भी सरकार से प्रभावित हैं.

वरिष्ठ पत्रकार का खुलासा: 210 किलो चांदी गायब, चंदे में 'डकैती'
शो में मौजूद वरिष्ठ पत्रकार नितिन श्रीवास्तव ने इस घोटाले के कुछ और चौंकाने वाले तकनीकी पहलू सामने रखे:

210 किलो चांदी की ईंटें लापता: 'विश्व सिंधी सेवा संगम' ने साल 2021 में मंदिर निर्माण के लिए 210 किलो चांदी की ईंटें दान की थीं, जो अब रिकॉर्ड से गायब हैं. संगठन अब सरकार और ट्रस्ट से अपनी चांदी का हिसाब मांग रहा है.

800 कैमरों के बावजूद 'डकैती
': नितिन श्रीवास्तव ने सवाल उठाया कि जिस मंदिर की सुरक्षा में 800 सीसीटीवी कैमरे लगे हों, जहां केंद्रीय सुरक्षा बल और एनएसजी तैनात हो, और जहां खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हर 15 दिन में मॉनिटरिंग करते हों, वहां करोड़ों का चढ़ावा और कुंभ मेले के दौरान आया दान गायब हो जाना सामान्य चोरी नहीं बल्कि एक सुनियोजित 'डकैती' है.

जमीनों का 10 गुना दाम पर सौदा: पत्रकार ने आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह के हवाले से बताया कि ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के कार्यकाल में 2 करोड़ की जमीनों को 18 से 20 करोड़ रुपये और 9 करोड़ की जमीन को 55 करोड़ रुपये में खरीदकर ट्रस्ट के पैसे का भारी दुरुपयोग किया गया.

विश्व हिंदू परिषद (VHP) भी बैकफुट पर, उठाई FIR की मांग
इस मामले का सबसे दिलचस्प पहलू यह रहा कि पहली बार राम मंदिर आंदोलन की मुख्य सूत्रधार रही विश्व हिंदू परिषद (VHP) को भी इस मुद्दे पर अपना मुंह खोलना पड़ा है. वीएचपी के कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार ने भी जनता के बढ़ते दबाव को देखते हुए इस मामले में तत्काल एफआईआर दर्ज करने की मांग की है, जिससे सरकार पर चौतरफा दबाव बढ़ गया है.

श्रद्धालुओं की आस्था को ठेस: राम मंदिर में घटने लगी भीड़
चर्चा के निष्कर्ष में यह बात सामने आई कि इस घोटाले का सबसे बड़ा नुकसान श्रद्धालुओं की आस्था को हुआ है. पिछले 10 दिनों में अयोध्या के राम मंदिर में आने वाले दर्शनार्थियों की संख्या और चढ़ावे (दान) की रकम में भारी गिरावट आई है. लोग अब राम मंदिर ट्रस्ट को दान देने से कतरा रहे हैं और पास ही स्थित हनुमानगढ़ी मंदिर में भीड़ डाइवर्ट हो रही है.

उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों से ठीक पहले, समाजवादी पार्टी इस 'आस्था के घोटाले' को जनता के बीच ले जाने की पूरी तैयारी में है, जिसने योगी सरकार की 'जीरो टॉलरेंस' वाली छवि पर एक बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है.


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