राम मंदिर घोटाला, पंजाब चुनाव व दिल्ली EV नीति पर 'राजपथ' का महा-विश्लेषण

15 Jun 2026 6:55 PM IST

अयोध्या में चढ़ावे पर घमासान, पंजाब में वक्त से पहले चुनाव की आहट और दिल्ली में नई ईवी पॉलिसी को लेकर 'द फेडरल देश' के विशेष कार्यक्रम में बड़ा खुलासा।

Rajpath : 'द फेडरल देश' के मुख्य समाचार कार्यक्रम 'राजपथ' में आज देशभर की तीन सबसे बड़ी और नीतिगत खबरों का विस्तृत विश्लेषण किया गया. जहाँ एक तरफ अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे की हेराफेरी को लेकर देश में एक बड़ा सियासी संग्राम खड़ा हो गया है, वहीं दूसरी तरफ पंजाब के सियासी गलियारों में तय समय से पहले विधानसभा चुनाव कराए जाने की सुगबुगाहट तेज़ है. इसी बीच, प्रदूषण को कम करने के लिए दिल्ली सरकार द्वारा लाई जा रही नई ईवी पॉलिसी की ज़मीनी हकीकत पर भी 'राजपथ' ने बड़ा सवाल खड़ा किया है.



1. राम मंदिर घोटाला: 15 हजार की तनख्वाह और करोड़ों की बेनामी संपत्ति पर अखिलेश का प्रहार

'राजपथ' में हुए बड़े खुलासे के मुताबिक, अयोध्या के भव्य राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित किए गए चढ़ावे और दानपात्रों में ₹200 करोड़ से अधिक की कथित हेराफेरी का मामला सामने आया है. इस महाघोटाले में सबसे चौंकाने वाला पहलू मंदिर परिसर में नोट गिनने और चढ़ावे की निगरानी करने वाले उन कर्मचारियों की जीवनशैली (Lifestyle) है, जिनकी किस्मत रातों-रात बदल गई.


जांच के दौरान यह बात सामने आई है कि जिन कर्मचारियों की मासिक तनख्वाह महज़ 14 से 15 हजार रुपये थी, उनके पास आलीशान गाड़ियाँ, मकान और जमीनों के सौदे पाए गए हैं. अयोध्या में इस बात की सबसे तेज़ चर्चा है कि कैसे एक पूर्व ऑटो चालक आज करोड़ों की बेनामी संपत्ति के आरोपों के घेरे में है.


इस मुद्दे को लेकर समाजवादी पार्टी (सपा) के मुखिया अखिलेश यादव ने योगी सरकार और मंदिर ट्रस्ट को सीधे तौर पर कटघरे में खड़ा किया है. अखिलेश यादव ने कड़ा तंज कसते हुए कहा:


"राम मंदिर के चढ़ावे में चोरी के बाद अब अधिकारियों को साधुओं और मंदिर की जांच करनी पड़ रही है, इससे बड़ा दुर्भाग्य और क्या होगा? अगर सरकार गंभीर है तो कैमरे और लाइट बंद कर दे, प्रभु श्रीराम के सामने चोर अपने आप सारा चढ़ावा वापस रख जाएगा."


इस तीखे हमले के बाद सत्ता पक्ष (भाजपा) भी तुरंत एक्शन में आया है. भाजपा नेताओं का कहना है कि विपक्ष इस संवेदनशील मुद्दे पर सिर्फ राजनीति कर रहा है. योगी सरकार में किसी भी भ्रष्टाचारी को बचाने का कोई सवाल ही नहीं उठता और आस्था के साथ खिलवाड़ करने वाले रसूखदारों के खिलाफ ऐसी सख्त कार्रवाई होगी जिसे पूरी दुनिया देखेगी. फिलहाल, एसआईटी (SIT) इस मामले के हर एक एंगल को बारीकी से खंगाल रही है.


2. पंजाब का सियासी गणित: क्या समय से पहले होंगे विधानसभा चुनाव?

'राजपथ' में पंजाब की राजनीति को लेकर भी एक बड़ी इनसाइड स्टोरी सामने आई है. पंजाब के सियासी गलियारों में इन दिनों यह चर्चा बेहद गरम है कि जो विधानसभा चुनाव फरवरी 2027 में होने थे, वे अब समय से पहले यानी इसी साल नवंबर 2026 में ही कराए जा सकते हैं. हालांकि चुनाव आयोग ने अभी इस पर कोई आधिकारिक मुहर नहीं लगाई है, लेकिन इसके पीछे 'महाकुंभ' और 'देशव्यापी जनगणना' जैसे बड़े प्रशासनिक कारणों को मुख्य वजह माना जा रहा है.


किस पार्टी का गेम बनेगा और किसका बिगड़ेगा?


आम आदमी पार्टी (AAP): राजनीति के जानकार मानते हैं कि अगर चुनाव वक्त से पहले नवंबर 2026 में होते हैं, तो इसका सबसे बड़ा फायदा सत्ताधारी आम आदमी पार्टी को मिल सकता है, क्योंकि सरकार के खिलाफ किसी भी तरह की सत्ता विरोधी लहर (Anti-Incumbency) को मजबूत होने का मौका ही नहीं मिलेगा. दिल्ली के सियासी झटकों के बाद पंजाब ही 'आप' का सबसे मजबूत गढ़ है, जहाँ भगवंत मान सरकार मुफ्त बिजली-पानी जैसे मुद्दों को भुनाकर दोबारा वापसी की कोशिश में जुट गई है.


कांग्रेस: मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस भी आलाकमान को भनक लगते ही फुल चुनावी मोड में आ गई है. पार्टी ने सांगठनिक फेरबदल से लेकर एक स्पेशल 'मॉनिटरिंग कमेटी' (Monitoring Committee) तक बना दी है, ताकि समय रहते संगठन को दुरुस्त कर आम आदमी पार्टी को कड़ी चुनौती दी जा सके.


भाजपा व अन्य: पंजाब में इस बार मुकाबला बहुकोणीय होने जा रहा है, और राजनीति का सीधा नियम है कि जब मुकाबला त्रिकोणीय या बहुकोणीय होता है, तब चंद वोटों से बड़े-बड़ों का गणित बिगड़ जाता है.


3. दिल्ली की नई EV पॉलिसी: 'पहले इलेक्ट्रिक गाड़ी खरीदो, चार्जिंग स्टेशन बाद में ढूंढो'

'राजपथ' के अंतिम हिस्से में देश की राजधानी दिल्ली की नई ईवी पॉलिसी (EV Policy 2026-30) पर गंभीर सवाल उठाए गए. दिल्ली सरकार का दावा है कि इस पॉलिसी के तहत पेट्रोल दोपहिया वाहनों और सीएनजी ऑटो को धीरे-धीरे विदा करके दिल्ली को प्रदूषण मुक्त बनाया जाएगा. यह बयान सुनने में और सरकारी फाइलों में तो बहुत अच्छा लग रहा है, लेकिन लाख टके का सवाल ये है कि जिन सड़कों पर चार्जिंग का इंतजाम ही अधूरा है, वहाँ इलेक्ट्रिक गाड़ियां आखिर चार्ज कहाँ होंगी?


दिल्ली की एक बहुत बड़ी आबादी फ्लैट्स, सोसायटियों और किराये के मकानों में रहती है, जहाँ लोगों को पार्किंग की जगह मिल जाए तो वो खुद को खुशकिस्मत समझते हैं. ऐसे में खुद का चार्जिंग पॉइंट लगाना तो अभी दूर की बात है. सरकार का रवैया कुछ ऐसा दिख रहा है कि पहले इलेक्ट्रिक गाड़ी खरीद लो, चार्जिंग का इंतजाम बाद में देखेंगे!


दिलचस्प बात ये भी है कि एक तरफ पूरी तरह इलेक्ट्रिक बनने का सपना दिखाया जा रहा है, और दूसरी तरफ हाइब्रिड गाड़ियों को टैक्स में छूट देने का प्रस्ताव भी है, यानी एक तरफ डाइट पर भेजा जा रहा है और दूसरी तरफ मिठाई का डिब्बा भी थमाया जा रहा है. ऑटो चालक, डिलीवरी बॉय और छोटे कारोबारी भी पूछ रहे हैं कि नई ईवी खरीदने के लिए सस्ता लोन या वित्तीय मदद कहाँ है, क्योंकि सिर्फ सब्सिडी से गाड़ी की पूरी लागत नहीं निकलती. बिना मजबूत चार्जिंग नेटवर्क और बिजली ढांचे के इस नीति को लागू करना वैसा ही है, जैसे पहले मंज़िल तय कर ली जाए और रास्ता बाद में खोजा जाए.


'राजपथ' का जनता से सीधा सवाल: क्या आपको लगता है कि राम मंदिर घोटाले में एसआईटी की जांच से सच सामने आ पाएगा? क्या समय से पहले चुनाव होने पर पंजाब में भगवंत मान अपनी सत्ता बचा पाएंगे? और क्या दिल्ली सरकार चार्जिंग स्टेशन बनाए बिना पेट्रोल-सीएनजी गाड़ियों को बंद करने में जल्दबाज़ी कर रही है?