जेफरीज का खुलासा: खुदरा निवेशकों की SIP बनी विदेशी फंड्स का एग्जिट रूट

22 May 2026 10:06 PM IST

म्यूचुअल फंड में बढ़ता रिकॉर्ड निवेश क्या FPIs को दे रहा है भारतीय शेयर बाजार से आसानी से मुनाफावसूली कर डॉलर लेकर निकलने का मौका? जानिए जेफरीज का विश्लेषण।

Indian Stock Market And West Asia: भारतीय शेयर बाजार में पिछले कुछ समय से जारी उतार-चढ़ाव और रुपए की लगातार गिरती कीमत को लेकर वैश्विक ब्रोकरेज हाउस 'जेफरीज' (Jefferies) ने एक बेहद चौंकाने वाला विश्लेषण पेश किया है। जेफरीज के मुख्य एनालिस्ट महेश नंदुलकर द्वारा तैयार की गई इस रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय खुदरा निवेशकों द्वारा म्यूचुअल फंड में हर महीने किया जा रहा रिकॉर्ड सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) निवेश, अनजाने में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs और FIIs) के लिए भारतीय बाजार से सुरक्षित और आसान निकास (Exit Route) का जरिया बन गया है। इस पूरे घटनाक्रम और इसके प्रभावों का विस्तृत विश्लेषण 'द फेडरल देश' के मुख्य एंकर मनीष कुमार ने अपने हालिया विशेष बुलेटिन में पेश किया है।

रुपए की कमजोरी का असली सच

आमतौर पर माना जाता है कि जब भी रुपया कमजोर होता है, तो उसके पीछे देश का चालू खाता घाटा (Current Account Deficit - CAD) मुख्य वजह होता है। लेकिन जेफरीज के दिग्गज एनालिस्ट महेश नंदुलकर ने इस पारंपरिक धारणा को सिरे से खारिज कर दिया है। नंदुलकर के विश्लेषण के अनुसार, भारत का चालू खाता घाटा पूरी तरह से नियंत्रण में है और वित्त वर्ष 2024 से 2026 के बीच यह देश की जीडीपी (GDP) का महज 0.8 प्रतिशत रहा है, जो कि ऐतिहासिक रूप से काफी निचला स्तर है।

इसके बावजूद, मई 2025 से लेकर अब तक भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले करीब 14% तक कमजोर हो चुका है। जेफरीज का कहना है कि रुपए में इस ऐतिहासिक गिरावट की असली वजह व्यापार घाटा नहीं, बल्कि विदेशी निवेशकों द्वारा भारतीय शेयर बाजार से की जा रही ताबड़तोड़ बिकवाली है।

शॉक एब्जॉर्बर बने रिटेल निवेशक, विदेशी फंड्स उठा रहे फायदा

इस पूरे चक्र को समझाते हुए एंकर मनीष कुमार ने बताया कि कैसे घरेलू निवेशकों का पैसा बाजार के लिए एक 'शॉक एब्जॉर्बर' (Shock Absorber) का काम कर रहा है। हाल ही में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी लोकसभा में इस बात की सराहना की थी कि भारतीय खुदरा निवेशक विदेशी बिकवाली के बीच बाजार में एक मजबूत सुरक्षा कवच की तरह खड़े हैं। उन्होंने संसद में कहा था कि विदेशी निवेशक आएं या जाएं, लेकिन भारतीय रिटेलर्स ने बाजार को जो झटके झेलने की क्षमता दी है, उसकी सराहना की जानी चाहिए।

हालांकि, जेफरीज की रिपोर्ट इसका दूसरा और चिंताजनक पहलू दिखाती है। आंकड़े बताते हैं कि अप्रैल 2026 में म्यूचुअल फंड एसआईपी के जरिए 31,115 करोड़ रुपये का अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड निवेश आया है, और सिर्फ एक महीने में 50 लाख नए एसआईपी खाते खुले हैं। तुलना के लिए, ठीक 10 साल पहले अप्रैल 2016 में यह आंकड़ा महज 3,122 करोड़ रुपये था।

एसआईपी, ईपीएफओ (EPFO) और एनपीएस (NPS) के जरिए घरेलू निवेशकों का यह पैसा हर महीने लगातार बाजार में आ रहा है। विदेशी निवेशक इसी स्थिति का नाजायज फायदा उठा रहे हैं। वे जानते हैं कि बाजार में खरीदारी के लिए घरेलू पैसा मौजूद है, इसलिए वे भारी मुनाफावसूली करके अपने शेयर बेच रहे हैं। चूंकि उनके शेयर खरीदने के लिए भारतीय फंड्स तैयार खड़े हैं, इसलिए विदेशी निवेशकों को बिना किसी मार्केट क्रैश के आसानी से डॉलर लेकर बाहर निकलने का मौका मिल रहा है।

78 अरब डॉलर की भारी निकासी

जेफरीज के आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2024-25 और 2025-26 के दौरान विदेशी संस्थागत निवेशकों, प्राइवेट इक्विटी फंड्स और विदेशी प्रमोटरों ने भारतीय बाजार से लगभग 78 अरब डॉलर की भारी-भरकम राशि निकाल ली है। यह ट्रेंड मौजूदा वित्त वर्ष 2026-27 में भी बदस्तूर जारी है। जब विदेशी निवेशक शेयर बेचकर डॉलर खरीदते हैं, तो डॉलर की मांग बढ़ती है और रुपया लगातार दबाव में आता जाता है।

खुदरा निवेशकों को 'शॉक' और आगे की राह

एंकर मनीष कुमार ने बुलेटिन के अंत में खुदरा निवेशकों की मौजूदा स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि सितंबर 2024 के बाद से बाजार में जारी सुस्ती के कारण छोटे निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो पर वह रिटर्न नहीं मिल रहा है, जिसकी उम्मीद में उन्होंने निवेश शुरू किया था।

हालांकि, विशेषज्ञों और जेफरीज की रिपोर्ट के अनुसार, छोटे निवेशकों को इस स्थिति में घबराने या अपनी एसआईपी रोकने की जरूरत नहीं है। मौजूदा समय में वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव, अंतरराष्ट्रीय टैरिफ वॉर और 'स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज' (Strait of Hormuz) के ब्लॉक होने जैसी बाहरी बाधाओं के कारण बाजार पर दबाव है। विशेषज्ञों की राय है कि निवेशकों को लंबी अवधि (Long Term) का नजरिया रखना चाहिए, क्योंकि इन वैश्विक संकटों के टलते ही भारतीय बाजार एक बार फिर संभलेगा और घरेलू निवेशकों को बेहतर मुनाफा देगा।