नटराजन विवाद सुप्रीम कोर्ट पहुंचा; कल होगी दिग्गजों की महाजंग

11 Jun 2026 9:32 PM IST

नामांकन रद्द होने पर EC से राहत न मिलने के बाद कांग्रेस पहुंची शीर्ष अदालत. कल सुनवाई के लिए SC तैयार; इधर जीत का प्रमाण पत्र लेकर BJP ने मनाई निर्विरोध जीत.

Meenakshi Natrajan Rajya Sabha Controversy: मध्य प्रदेश से राज्यसभा चुनाव को लेकर जारी सियासी घमासान अब देश की सर्वोच्च अदालत की चौखट पर पहुंच गया है। कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज होने के बाद चुनाव आयोग से कोई राहत नहीं मिली, जिसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। सुप्रीम कोर्ट इस मामले पर शुक्रवार, 12 जून को सुनवाई करने के लिए तैयार हो गया है। दूसरी ओर, रिटर्निंग ऑफिसर ने मध्य प्रदेश की तीनों राज्यसभा सीटों पर भाजपा के उम्मीदवारों तरुण चुग, रजनीश अग्रवाल और महेश केवट को निर्विरोध विजेता घोषित करते हुए 'सर्टिफिकेट ऑफ विक्ट्री' भी सौंप दिया है।


'द फेडरल देश' की विशेष चर्चा में हमारे पॉलिटिकल एडिटर पुनीत निकोलस यादव और तेलंगाना से सहयोगी शन्मुख सुब्रमण्यम ने इस पूरे कानूनी और राजनीतिक घटनाक्रम की परतों को खोला है।

क्या है नामांकन खारिज होने का पूरा विवाद?
कांग्रेस की ओर से मीनाक्षी नटराजन एकमात्र उम्मीदवार थीं, लेकिन रिटर्निंग ऑफिसर अरविंद शर्मा ने एक तकनीकी त्रुटि का हवाला देते हुए उनका पर्चा खारिज कर दिया। आरोप है कि मीनाक्षी नटराजन ने अपने चुनावी हलफनामे में अपने खिलाफ लंबित एक 'प्राइवेट कंप्लेंट' (निजी शिकायत) की जानकारी छिपाई थी।

हालांकि, कानूनी विशेषज्ञों और कांग्रेस के वरिष्ठ वकीलों का कहना है कि रिटर्निंग ऑफिसर ने यह फैसला लेने में भारी जल्दबाजी दिखाई है:

अधिनियम का उल्लंघन: रिप्रेजेंटेशन ऑफ पीपल्स एक्ट (RP Act) और चुनाव आयोग की रूल बुक के अनुसार, उम्मीदवार को केवल उन्हीं मामलों की जानकारी देना अनिवार्य है जहां वह 'आरोपी' हो, यानी जिसके खिलाफ एफआईआर दर्ज हो चुकी हो या कोर्ट ने संज्ञान लेकर आरोप तय कर दिए हों।

निजी शिकायत का नियम:
मीनाक्षी नटराजन के खिलाफ तेलंगाना में केवल एक प्राइवेट कंप्लेंट की गई थी। इस पर न तो कोई एफआईआर दर्ज थी और न ही कोर्ट ने संज्ञान लिया था। ऐसे में इसे चुनावी हलफनामे में छुपाना कोई 'ठोस कानूनी दोष'नहीं माना जा सकता।

तेलंगाना से जुड़ा है बगावत का तार
चर्चा के दौरान यह बात सामने आई कि मीनाक्षी नटराजन के खिलाफ शिकायत करने वाली महिला तेलंगाना कांग्रेस की ही एक कार्यकर्ता भंडारी श्रीलता हैं। उन्होंने साल 2022 में स्थानीय नेताओं द्वारा किए गए कथित उत्पीड़न के खिलाफ शिकायत की थी।

बाद में साल 2025 में उन्होंने कोर्ट में एक याचिका दायर की, जिसमें तेलंगाना कांग्रेस के अध्यक्ष महेश कुमार गौड़, स्थानीय विधायकों और नेताओं के साथ-साथ मीनाक्षी नटराजन का नाम भी प्रतिवादी के तौर पर शामिल कर दिया। हालांकि, मीनाक्षी नटराजन के वकीलों ने अक्टूबर 2025 में ही कोर्ट में अपना जवाब दाखिल कर स्पष्ट कर दिया था कि उनका इस मामले से कोई सीधा लेना-देना नहीं है। अब इसी पुराने कागज़ को हथियार बनाकर भाजपा ने उनकी उम्मीदवारी को चुनौती दी है।

चुनाव आयोग के रवैये पर विपक्ष के सवाल
कांग्रेस का एक बड़ा डेलिगेशन, जिसमें केसी वेणुगोपाल, जयराम रमेश, विवेक तंखा और भूपेश बघेल जैसे दिग्गज नेता शामिल थे, कल इस मामले को लेकर चुनाव आयोग से मिला था। लेकिन आयोग की ओर से कोई आधिकारिक राहत या जवाब नहीं आया, बल्कि मध्य प्रदेश में भाजपा उम्मीदवारों को निर्विरोध जीत का प्रमाण पत्र भी जारी कर दिया गया।

विपक्षी दलों का आरोप है कि पिछले कुछ समय में चुनाव आयोग का रुख विपक्ष की शिकायतों को लेकर बेहद उदासीन रहा है, जिसके कारण उन्हें हर बार न्याय के लिए अदालत का रुख करना पड़ता है।

सुप्रीम कोर्ट में कल दिग्गजों की जंग
शुक्रवार को होने वाली इस सुनवाई में देश के सबसे बड़े कानूनी धुरंधर आमने-सामने होंगे। मीनाक्षी नटराजन की तरफ से जहां अभिषेक मनु सिंघवी और विवेक तंखा पैरवी करेंगे, वहीं रिटर्निंग ऑफिसर के फैसले का बचाव करने के लिए देश के पूर्व अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी कोर्ट में उतर रहे हैं।

आगे क्या होगा? यदि सुप्रीम कोर्ट रिटर्निंग ऑफिसर के फैसले को गलत और अवैध ठहराता है, तो मध्य प्रदेश की इन तीनों राज्यसभा सीटों पर चुनाव की अधिसूचना को नए सिरे से जारी कर पूरी प्रक्रिया दोबारा करानी पड़ सकती है। अदालत के इस रुख पर न केवल कांग्रेस और भाजपा बल्कि देश की पूरी चुनावी व्यवस्था की नजरें टिकी हुई हैं।