ममता का किला ढहने के कगार पर, टीएमसी सांसदों-पार्षदों में मची भगदड़

28 May 2026 8:57 PM IST  ( Updated:2026-05-28 15:29:14  )

पश्चिम बंगाल चुनाव में करारी हार के बाद बिखरने लगी तृणमूल कांग्रेस, काकोली घोष समेत कई बड़े नेताओं ने छोड़े पद, बीजेपी के संपर्क में कई टीएमसी सांसद।

TMC After Losing West Bengal: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर बड़ा संकट खड़ा हो गया है। ममता बनर्जी का दो दशकों में तैयार किया गया राजनीतिक किला अब ढहने के कगार पर पहुंच गया है। पार्टी के नेता और सांसद लगातार पद छोड़ रहे हैं। टीएमसी की वरिष्ठ नेता काकोली घोष ने पार्टी के तमाम पदों से इस्तीफा दे दिया है, जिससे राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है।


बीजेपी के संपर्क में 20 टीएमसी सांसद
काकोली घोष भले ही अभी लोकसभा सांसद बनी हुई हैं, लेकिन उनके इस कदम ने पार्टी की अंदरूनी कलह को उजागर कर दिया है। इसी बीच भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने बड़ा दावा किया है। बीजेपी नेताओं के मुताबिक टीएमसी के 10 से 20 सांसद उनके लगातार संपर्क में हैं। इसके अलावा जमीनी स्तर पर काम करने वाले सैकड़ों कॉरपोरेटर्स और पार्षदों के भी पार्टी छोड़ने की खबरें आ रही हैं।

बिना विचारधारा की पार्टी का हश्र
'द फेडरल' से बात करते हुए वरिष्ठ पत्रकार समीर पुरकायस्थ ने बताया कि टीएमसी का कोई मजबूत वैचारिक आधार (आईडियोलॉजिकल बेस) नहीं रहा है। इस पार्टी का गठन पूर्व कांग्रेस नेताओं को मिलाकर हुआ था, जिनका मुख्य मकसद केवल वामपंथी सरकार को हटाना था। साल 2011 में सत्ता हासिल करने के बाद पार्टी में ऐसे लोगों की एंट्री हुई जो सिर्फ मलाई काटना चाहते थे।

कटमनी और सिंडीकेट कल्चर ने डुबोई लुटिया
पार्टी के भीतर लंबे समय से 'कटमनी' और 'सिंडीकेट कल्चर' हावी रहा है। इस भ्रष्टाचार के तंत्र ने जनता के बीच टीएमसी की छवि को पूरी तरह बर्बाद कर दिया। साल 2021 के चुनाव से पहले खुद ममता बनर्जी और महुआ मोइत्रा जैसे नेताओं ने इस मुद्दे को उठाया था। लेकिन चुनाव जीतने के बाद इस सिंडीकेट कल्चर को रोकने का कोई प्रयास नहीं किया गया, जिससे जनता में भारी नाराजगी पैदा हुई।

जांच एजेंसियों के डर से मची है भगदड़
बीजेपी की नई सरकार आने के बाद से केंद्रीय जांच एजेंसियों (CBI और ED) की कार्रवाई तेज हो गई है। राज्य में कई टीएमसी पार्षद और नेता भ्रष्टाचार के आरोपों में गिरफ्तार भी हो चुके हैं। ऐसे में खुद को बचाने के लिए टीएमसी नेताओं के बीच बीजेपी में शामिल होने की होड़ मची है। नेता अब अपनी सुरक्षा के लिए बीजेपी की 'वाशिंग मशीन' का सहारा ढूंढ रहे हैं।

निकाय चुनाव के लिए बीजेपी को चाहिए चेहरे
विशेषज्ञों के मुताबिक बीजेपी को राज्य में सरकार चलाने के लिए विधायकों की जरूरत नहीं है, क्योंकि उनके पास 208 सीटों का पूर्ण बहुमत है। लेकिन इस साल के अंत में राज्य की 128 नगर पालिकाओं और नगर निगमों के चुनाव होने हैं। इन निकाय चुनावों के लिए बीजेपी को करीब 3,000 अनुभवी उम्मीदवारों की जरूरत है। जमीनी स्तर पर संगठन मजबूत करने के लिए बीजेपी टीएमसी के पार्षदों को अपने पाले में ला रही है।

केंद्र में अपनी स्थिति मजबूत करेगी बीजेपी
बीजेपी को इस समय केंद्र सरकार चलाने के लिए सहयोगी दलों जैसे टीडीपी (TDP) पर निर्भर रहना पड़ रहा है। अगर पश्चिम बंगाल से टीएमसी के 15 से 20 सांसद पाला बदलकर बीजेपी में आ जाते हैं, तो दिल्ली की सत्ता में बीजेपी की स्थिति और अधिक मजबूत हो जाएगी। यही वजह है कि बीजेपी अब 'अच्छी टीएमसी' और 'खराब टीएमसी' का सर्टिफिकेट देखकर नेताओं की एंट्री करा रही है।

मैदान छोड़कर गायब हैं 'स्ट्रीट फाइटर' ममता
टीएमसी की सबसे बड़ी कमजोरी यह है कि हार के बाद उसका शीर्ष नेतृत्व जनता के बीच से गायब है। हमेशा 'स्ट्रीट फाइटर' के रूप में पहचानी जाने वाली ममता बनर्जी इस समय मैदान में दिखाई नहीं दे रही हैं। राज्य में चल रहे बुलडोजर और अतिक्रमण विरोधी अभियानों के खिलाफ भी टीएमसी कोई मजबूत विरोध नहीं दर्ज करा पा रही है। बंगाल की राजनीति फेसबुक लाइव या ट्विटर से नहीं, बल्कि जमीन पर उतरकर ही बचाई जा सकती है।