TMC में बड़ी बगावत: क्या अकेले पड़ गए बुआ-भतीजे?
लोकसभा और विधानसभा चुनावों के बाद पश्चिम बंगाल में टीएमसी के भीतर बगावत तेज. ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा पर गाज गिरने के बाद बुआ-भतीजे पर उठे सवाल

Rebel In TMC: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर बड़ा भूचाल आता हुआ दिखाई दे रहा है. चुनावों के बाद राज्य की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर की अंदरूनी खींचतान और टूट-फूट की खबरें अब खुलकर सामने आने लगी हैं. पार्टी में हुए एक कथित हस्ताक्षर विवाद के बाद यह कलह चरम पर पहुंच चुकी है. 'द फेडरल देश' की वरिष्ठ पत्रकार नीलू व्यास के साथ विशेष चर्चा में राजनीतिक विश्लेषक शिखा मुखर्जी ने बंगाल के इस बदलते घटनाक्रम पर कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं.
विधायकों की बैठक और विद्रोह के संकेत
चर्चा के दौरान यह बात सामने आई कि हाल ही में ममता बनर्जी द्वारा बुलाई गई विधायकों की एक महत्वपूर्ण बैठक में भारी उदासीनता देखने को मिली.
पार्टी के भीतर मचे इस घमासान के मुख्य कारण और बिंदु इस प्रकार हैं:
बैठक से दूरी: पार्टी के कुल विधायकों में से महज 20 विधायक ही ममता बनर्जी की बैठक में पहुंचे, जिसे पार्टी सुप्रीमो के खिलाफ एक बड़े मौन विद्रोह के रूप में देखा जा रहा है.
नेताओं का निष्कासन: पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में टीएमसी नेतृत्व ने ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा जैसे प्रमुख नेताओं को बाहर का रास्ता दिखा दिया है.
हस्ताक्षर में फर्जीवाड़ा: पार्टी से निकाले जाने के बाद इन बागी नेताओं ने दावा किया है कि टीएमसी के विधायकों के हस्ताक्षरों में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा किया गया है.
अभिषेक बनर्जी के खिलाफ गुस्सा या ममता से नाराजगी?
आमतौर पर यह माना जा रहा है कि टीएमसी के वरिष्ठ और जमीनी नेता ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी के कामकाज के तरीके से नाराज हैं और उन पर पार्टी को 'हाईजैक' करने के आरोप लग रहे हैं. हालांकि, राजनीतिक विश्लेषक शिखा मुखर्जी का मानना है कि कहानी कुछ और ही है.
शिखा मुखर्जी (वरिष्ठ पत्रकार): "अभिषेक बनर्जी को तो महज एक बहाना बनाया जा रहा है. असल में नेताओं का यह गुस्सा और नाराजगी खुद पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी के खिलाफ है. जो लोग जमीन पर मेहनत करके ऊपर आए हैं, उन्हें लगता है कि ममता बनर्जी अपने भतीजे के स्नेह में अंधी हो चुकी हैं और इसी वजह से पुराने वफादार नेता पार्टी से दूर हो रहे हैं."
क्या बंगाल में चलेगा 'महाराष्ट्र मॉडल'?
इस समय राजनीतिक गलियारों में यह अटकलें बेहद तेज हैं कि क्या पश्चिम बंगाल में भी महाराष्ट्र जैसा 'शिवसेना मॉडल' दोहराया जाएगा, जहां पार्टी के भीतर दो-तिहाई बहुमत की फूट कराकर सत्ता पलट दी गई थी?
चर्चा में यह स्पष्ट किया गया कि बंगाल में यह खेल इतना आसान नहीं होगा:
मुस्लिम विधायकों का रुख: टीएमसी के पास वर्तमान में 34 मुस्लिम विधायक हैं, जो किसी भी परिस्थिति में भाजपा (BJP) का दामन नहीं थामेंगे.
भाजपा की सावधानी: राज्य में भाजपा के स्थानीय नेता भी अन्य दलों से आने वाले भ्रष्ट नेताओं को शामिल करने के पक्ष में नहीं हैं, क्योंकि इससे उनके कैडर में नाराजगी बढ़ती है और उन पर 'वाशिंग मशीन' होने के आरोप लगते हैं.
विकल्पों की तलाश: बागी नेताओं का एक धड़ा भाजपा के बजाय कांग्रेस या अन्य क्षेत्रीय दलों के संपर्क में भी है और वे केवल अपनी राजनीतिक सुरक्षा का आकलन कर रहे हैं.
ममता बनर्जी के लिए आत्ममंथन का समय
पार्टी में मचे इस घमासान पर ममता बनर्जी ने फिलहाल सार्वजनिक तौर पर कोई आधिकारिक बयान या तीखी प्रतिक्रिया नहीं दी है. वह इस समय 'वेट एंड वॉच' की स्थिति में हैं और नुकसान का आकलन कर रही हैं. लेकिन जमीनी हकीकत यही बताती है कि यदि ममता बनर्जी ने जल्द ही अपने संगठन को नहीं संभाला, तो आने वाले समय में नगर निगम और स्थानीय निकायों के चुनावों में टीएमसी को भारी नुकसान झेलना पड़ सकता है.

