
आखिर क्यों की जा रही है समाजवादी पार्टी में टूट की बात?
द फेडरल के विशेष कार्यक्रम निष्पक्ष में वरिष्ठ पत्रकार सुनीता एरॉन, टीके राजलक्ष्मी और सपा प्रवक्ता सुनील सिंह ने बताया कि यूपी में दल-बदल कानून के तहत पार्टी तोड़ना कितना मुश्किल या कितना संभव है?
Nishpaksh: महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल के सियासी उलटफेर के बाद अब उत्तर प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है. यूपी सरकार के मंत्रियों और भाजपा नेताओं द्वारा समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसदों में बड़ी टूट के दावों को सपा ने पूरी तरह से खारिज करते हुए इसे केवल 'दिवास्वप्न' और प्रोपेगैंडा करार दिया है. 'द फेडरल देश' के विशेष कार्यक्रम 'निष्पक्ष' में होस्ट नीलू व्यास के साथ बातचीत करते हुए समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता सुनील सिंह, वरिष्ठ पत्रकार सुनीता एरॉन और वरिष्ठ पत्रकार व कूटनीतिक विश्लेषक टीके राजलक्ष्मी ने इस पूरे घटनाक्रम पर विस्तार से चर्चा की.
भाजपा बैकफुट पर, इसलिए फैला रही है अफवाहें: सपा
सपा प्रवक्ता सुनील सिंह ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि अयोध्या राम जन्मभूमि के चढ़ावे में हुए कथित घोटाले का पर्दाफाश होने के बाद भाजपा पूरी तरह बैकफुट पर है. अपनी इस कमजोरी को छुपाने के लिए केशव प्रसाद मौर्य और ओम प्रकाश राजभर जैसे नेता सपा सांसदों की टूट का अनर्गल प्रलाप कर रहे हैं. राजभर पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें यूपी में 'बिना पेंदी का लोटा' कहा जाता है और वो खुद नहीं जानते कि वो कब क्या बोल दें.
सुनील सिंह ने स्पष्ट किया, "सपा के सभी 37 सांसद पूरी मजबूती के साथ राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के नेतृत्व में 2027 के विधानसभा चुनाव के लक्ष्य की ओर बढ़ रहे हैं. हमारी पार्टी का एक भी जनप्रतिनिधि असंतुष्ट नहीं है और किसी के भी पाला बदलने की बात पूरी तरह बकवास है".
बलिया और सनातन पांडेय को लेकर क्यों गर्म है सियासत?
चर्चा के दौरान बलिया के सांसद सनातन पांडेय का नाम बार-बार उछले जाने का कारण भी सामने आया. वरिष्ठ पत्रकार सुनीता एरॉन ने इनपुट्स देते हुए बताया कि बलिया में ब्राह्मण मतदाता निर्णायक भूमिका में हैं. कयास लगाए जा रहे हैं कि भाजपा के नीरज शेखर को आगामी चुनाव में टिकट मिलना मुश्किल है, जिसके चलते भाजपा सनातन पांडेय को अपने पाले में लाने की रणनीति के तहत संदेश भिजवा रही है.
हालाँकि, सुनील सिंह ने इस पर पलटवार करते हुए कहा कि बलिया हमेशा से समाजवादियों का गढ़ रहा है. सनातन पांडेय सपा की रीढ़ की हड्डी हैं और देश की सर्वोच्च पंचायत में वो पहली बार सपा के टिकट पर पहुँचे हैं, इसलिए उनके भाजपा के सामने घुटने टेकने का सवाल ही पैदा नहीं होता. उन्होंने रामगोपाल यादव और शिवपाल यादव जैसे वरिष्ठ नेताओं के टूटने की अफवाहों को भी सिरे से खारिज कर दिया.
यूपी और बंगाल की कूटनीति में जमीन-आसमान का फर्क: टीके राजलक्ष्मी
वरिष्ठ पत्रकार टीके राजलक्ष्मी ने इस विषय पर अपनी बेबाक राय रखते हुए कहा कि भाजपा इस समय पेपर लीक जैसे बड़े मुद्दों से घिरी हुई है और विपक्ष के बढ़ते दबाव के कारण आंतरिक रूप से दबाव में है. यही वजह है कि जनता का ध्यान भटकाने के लिए इस तरह की 'रूमर मॉन्गरिंग' (अफवाहें) फैलाई जा रही हैं.
राजलक्ष्मी ने कानूनी पहलू को रेखांकित करते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल या महाराष्ट्र की तरह यूपी में सपा को तोड़ना आसान नहीं है. दल-बदल विरोधी कानून के तहत सपा के 37 सांसदों में से कम से कम 25 सांसदों को एक साथ तोड़ना होगा, जो मौजूदा हालात में नामुमकिन है. अगर अपोजिशन को ही तोड़ना है, तो संख्या बल के हिसाब से भाजपा के सांसदों को तोड़ना ज्यादा आसान होगा. उन्होंने यह भी कहा कि देश की जनता मूर्ख नहीं है, वह देख रही है कि किस तरह जोड़-तोड़ की राजनीति की जा रही है और इसका हिसाब जनता आने वाले चुनावों में चुकता करेगी.
1. विपक्षी दलों पर दबाव और माहौल बनाने की रणनीति
वरिष्ठ पत्रकारों के विश्लेषण के अनुसार, भाजपा और उसके सहयोगी दल (जैसे ओम प्रकाश राजभर) अक्सर चुनाव से पहले एक खास तरह का माहौल या नैरेटिव बिल्ड करने की कोशिश करते हैं. हाल ही में महाराष्ट्र (शिवसेना यूबीटी) और पश्चिम बंगाल (टीएमसी) में विपक्षी सांसदों की टूट के बाद, यूपी में भी ऐसा ही संदेश देने की कोशिश की जा रही है ताकि विपक्ष के हौसले पस्त किए जा सकें और यह दिखाया जा सके कि सभी क्षेत्रीय दल कमजोर हो रहे हैं.
2. बलिया सीट का सियासी समीकरण और ब्राह्मण वोट बैंक
चर्चा के दौरान यह विशेष जानकारी सामने आई कि इस पूरी अफवाह का केंद्र यूपी की बलिया लोकसभा सीट है. बलिया में ब्राह्मण मतदाताओं की संख्या काफी निर्णायक है और वहां से सपा के सनातन पांडेय सांसद हैं. राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि भाजपा के नीरज शेखर को आगामी समय में टिकट मिलने में कठिनाई हो सकती है, जिसके चलते भाजपा वहां के मजबूत सपा नेता सनातन पांडेय को अपने पाले में लाने के लिए संदेश भिजवा रही है. इसी जमीनी जोड़-तोड़ की कोशिशों को हवा देकर 25-30 सांसदों के टूटने की अफवाह उड़ाई जा रही है.
3. पेपर लीक और अयोध्या विवाद से ध्यान भटकाना
वरिष्ठ पत्रकार टीके राजलक्ष्मी के अनुसार, भाजपा इस समय उत्तर प्रदेश में पेपर लीक जैसे बड़े युवाओं से जुड़े मुद्दों और अयोध्या में हुए कथित चढ़ावा घोटालों को लेकर चौतरफा घिरी हुई है और बैकफुट पर है. विपक्ष के इस मजबूत हमले और जनता के गुस्से से ध्यान भटकाने के लिए इस तरह की 'रूमर मॉन्गरिंग' (अफवाहों की राजनीति) की जा रही है ताकि मीडिया और जनता का ध्यान मूल मुद्दों से हटकर सपा की कथित टूट पर लग जाए.
क्या सच में टूट सकती है सपा?
कानूनी और व्यावहारिक रूप से ऐसा होना नामकिन के बराबर है. भारत के सख्त दल-बदल विरोधी कानून के अनुसार, सपा के 37 सांसदों में से कम से कम 25 सांसदों को एक साथ पाला बदलना होगा. सपा प्रवक्ता सुनील सिंह के अनुसार, पार्टी का एक भी सांसद असंतुष्ट नहीं है और अखिलेश यादव के नेतृत्व में सभी एकजुट हैं, इसलिए भाजपा के ये दावे सिर्फ 'दिवास्वप्न' हैं.

