यूएस-ईरान शांति से ग्लोबल मार्केट चमका, सोना-चांदी बना सकते हैं नया हाई
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यूएस-ईरान शांति से ग्लोबल मार्केट चमका, सोना-चांदी बना सकते हैं नया हाई

यूएस-ईरान शांति समझौते से वैश्विक बाजारों में तेजी, कच्चे तेल के दाम घटने से भारत को राहत, एक्सपर्ट मनोज कुमार जैन ने कहा- 2027 तक सोना-चांदी बनाएंगे नया हाई।


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Janpath : अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध विराम और शांति समझौते की घोषणा होते ही दुनियाभर के वित्तीय बाजारों ने इसका जोरदार स्वागत किया। 'द फ़ेडरल देश' के हमारे बेहद खास कार्यक्रम 'जनपथ' में हमने इस विषय पर विस्तार से चर्चा की हैं, जिसने रातों-रात दुनिया के आर्थिक और कूटनीतिक समीकरणों को पूरी तरह बदल कर रख दिया है। अमेरिका और ईरान के बीच हुए ऐतिहासिक शांति समझौते और सामरिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य के दोबारा खुलने से वैश्विक वित्तीय बाजारों में जबरदस्त हलचल है। एक तरफ जहां अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें औंधे मुंह गिरी हैं, वहीं भारतीय शेयर बाजार और घरेलू करेंसी रुपये में ऐतिहासिक मजबूती देखी जा रही है।



एशियाई और अमेरिकी बाजारों का हाल: सोमवार को जापान का निक्केई (Nikkei 225) 5.5 प्रतिशत और दक्षिण कोरिया का कोस्पी (Kospi) 5.7 प्रतिशत तक उछल गया। अमेरिकी फ्यूचर्स मार्केट में भी एसएंडपी 500 और नैस्डैक में 1 से 1.8 प्रतिशत की तेजी देखी गई।

भारतीय बाजार को बूस्ट: घरेलू मोर्चे पर बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स 736 अंक चढ़कर 76,264 पर और निफ्टी 231 अंक की बढ़त के साथ 23,853 के स्तर पर बंद हुआ। बाजार में इस तेजी की मुख्य वजह पश्चिम एशिया का तनाव खत्म होना और कच्चे तेल के दामों में आई भारी गिरावट है।

कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट (Crude Oil Crash)
इस शांति समझौते का सबसे बड़ा और तात्कालिक असर ऊर्जा बाजार पर पड़ा है।

अंतरराष्ट्रीय दाम: ब्रेंट क्रूड के दाम 4 प्रतिशत से अधिक टूटकर $83.75 प्रति बैरल पर आ गए, जबकि अमेरिकी डब्ल्यूटीआई (WTI) क्रूड लगभग 5 प्रतिशत गिरकर $80.87 प्रति बैरल पर बंद हुआ। युद्ध के चरम पर यही कीमतें $120 से $125 प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं।

घरेलू कमोडिटी बाजार (MCX): भारत के मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर क्रूड ऑयल फ्यूचर्स 5.32 प्रतिशत की भारी गिरावट के साथ ₹7,544 प्रति बैरल पर आ गया, जो कि मार्च के बाद का इसका सबसे निचला स्तर है।

भारत के मैक्रो-इकोनॉमिक आउटलुक पर सीधा असर
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का लगभग 80 से 85 प्रतिशत हिस्सा आयात करता है। ऐसे में खाड़ी देशों में शांति और तेल का सस्ता होना भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए किसी वरदान से कम नहीं है।

महंगाई पर लगाम और कम होता इंपोर्ट बिल: एक्सिस डायरेक्ट के रिसर्च हेड राजेश पालवीया के अनुसार, ब्रेंट क्रूड में आई इस गिरावट से भारत का आयात बिल (Import Bill) काफी कम हो जाएगा। इससे माल ढुलाई और परिवहन लागत घटेगी, जिसका सीधा असर देश में खुदरा महंगाई को कम करने में दिखेगा।

बैलेंस ऑफ पेमेंट (BoP) और मजबूत होता रुपया: जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वीके विजयकुमार ने बताया कि इस समझौते और क्रूड के क्रैश होने से वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत के बैलेंस ऑफ पेमेंट की चिंता पूरी तरह खत्म हो गई है। यही वजह है कि भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले 58 पैसे मजबूत होकर 94.60 के स्तर पर पहुंच गया, जो मई के बाद इसका सबसे मजबूत स्तर है।

सप्लाई चेन और शिपिंग ऑपरेशन्स: सामान्य होने में लगेगा वक्त
रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (Strait of Hormuz), जहां से दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत तेल गुजरता है, अब व्यापार के लिए दोबारा खुल रहा है। हालांकि, एक्सपर्ट्स ने चेतावनी दी है कि जमीनी स्थिति सामान्य होने में थोड़ा समय लगेगा।

बारूदी सुरंगों (Mines) का खतरा: लिपो ऑयल एसोसिएट्स के एंड्रयू लिपो ने बीबीसी को बताया कि इस जलमार्ग में बिछाई गई समुद्री माइंस को साफ करने में कुछ हफ्तों से लेकर 6 महीने तक का समय लग सकता है।

टैंकरों का बैकलाग: पूर्व अमेरिकी नौसेना रियर एडमिरल मार्क मोंटगोमरी के अनुसार, जहाजों की सुचारू आवाजाही और सामान्य पंपिंग बैलेंस को पूरी तरह पटरी पर लौटने में कम से कम 30 से 45 दिन का समय लगेगा।

सोना और चांदी: 2027 तक नए 'लाइफटाइम हाई' का अनुमान
आमतौर पर भू-राजनीतिक तनाव कम होने पर सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोने और चांदी में गिरावट आती है, लेकिन इस बार बाजार का मिजाज अलग है। बीते हफ्ते की भारी गिरावट के बाद सोमवार को सोने का अगस्त वायदा ₹2,242 उछलकर ₹1,52,770 प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया, जबकि चांदी ₹6,066 की तेजी के साथ ₹2.52 लाख प्रति किलोग्राम पर बंद हुई।

एक्सपर्ट की राय: पृथ्वी फिनमार्ट के कमोडिटी और करेंसी हेड मनोज कुमार जैन ने 'द फेडरल देश' से बात करते हुए कहा कि डॉलर में कमजोरी और आने वाले समय में ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदों के चलते बुलियन मार्केट (सोना-चांदी) का सेंटीमेंट मजबूत बना रहेगा। उन्होंने अनुमान लगाया कि सोना और चांदी साल 2027 तक अपना एक नया 'लाइफटाइम हाई' (Lifetime High) छू सकते हैं। उन्होंने निवेशकों को सलाह दी कि वे बाजार में एकमुश्त पैसा लगाने के बजाय एसआईपी (SIP) के जरिए धीरे-धीरे निवेश करें।

अगला कदम: भारत के लिए चुनौतियां और रणनीतियां
एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस शांति समझौते से जहां भारतीय बाजारों में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की वापसी का रास्ता साफ हुआ है, वहीं भारत को अपनी पश्चिम एशियाई कूटनीति को नए सिरे से तैयार करना होगा। खाड़ी देशों में स्थिरता से न केवल व्यापार बढ़ेगा, बल्कि वहां रहने वाले लाखों भारतीयों द्वारा भेजे जाने वाले रेमिटेंस (धन प्रेषण) में भी सुधार होगा। हालांकि, इजरायल का इस समझौते को लेकर संशय अभी भी एक ऐसा पहलू है जिस पर वैश्विक बाजारों की नजर बनी रहेगी।


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