वेस्ट एशिया शांति से शेयर बाजार में बूम क्रूड गिरने पर क्या बोले एक्सपर्ट
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वेस्ट एशिया शांति से शेयर बाजार में बूम क्रूड गिरने पर क्या बोले एक्सपर्ट

द फेडरल देश पर जानिए एस एसेट मैनेजमेंट के सीआईओ वैभव अग्रवाल का पूरा विश्लेषण। कच्चे तेल में गिरावट, आईटी सेक्टर पर जीरो वेट और NSE के मेगा आईपीओ पर बड़ी राय।


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Iran - US Deal: अमेरिका और ईरान के बीच ऐतिहासिक शांति समझौते पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हस्ताक्षर के बाद वैश्विक भू-राजनीतिक (Geopolitical) परिदृश्य पूरी तरह बदल गया है। इस समझौते का सबसे बड़ा और सकारात्मक असर भारतीय शेयर बाजार पर देखने को मिल रहा है। पिछले 4-5 महीनों से निराशा के दौर से गुजर रहा घरेलू बाजार अब एक बार फिर रफ्तार पकड़ चुका है।


'द फेडरल देश' के विशेष कार्यक्रम में एसेल्ट एसेट मैनेजमेंट के फाउंडर और सीआईओ (CIO) वैभव अग्रवाल ने वेस्ट एशिया शांति समझौते, कच्चे तेल की कीमतों और भारतीय बाजार के भविष्य को लेकर बेहद बारीक और महत्वपूर्ण विश्लेषण साझा किया है।


पिछले 2 साल से क्यों सुस्त था भारतीय बाजार?
एक्सपर्ट वैभव अग्रवाल के मुताबिक, पिछले दो सालों से भारतीय शेयर बाजार एक सीमित दायरे (Range-bound) में फंसा हुआ था। इसके पीछे मुख्य रूप से चार बड़े कारण जिम्मेदार थे:

नॉमिनल जीडीपी (Nominal GDP) में गिरावट: भारत में महंगाई दर (Inflation) 3% से नीचे आने के कारण नॉमिनल जीडीपी ग्रोथ जो पहले 12 से 15% हुआ करती थी, वह घटकर 8 से 9% पर आ गई। इसका सीधा असर कॉर्पोरेट अर्निंग्स पर पड़ा।

विदेशी बाजारों में तगड़ी अर्निंग्स: अमेरिका, ताइवान और साउथ कोरिया जैसे देशों में एआई (AI) और सेमीकंडक्टर क्रांति के कारण अर्निंग्स ग्रोथ बेहद मजबूत थी। इस वजह से विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने भारत के बजाय वहां पैसा लगाना बेहतर समझा।

कमजोर भारतीय रुपया: टर्किश लीरा के बाद पिछले दो सालों में भारतीय रुपया दुनिया की सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली मुद्राओं में से एक रहा, जिसने विदेशी निवेशकों को डराया।

घरेलू निवेशकों का सुरक्षा कवच: विदेशी निवेशकों (FIIs) की रिकॉर्ड तोड़ बिकवाली के बावजूद भारतीय बाजार को घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) और रिटेल म्यूचुअल फंड (SIP) के लगातार फ्लो ने संभाल कर रखा, अन्यथा बाजार क्रैश हो सकता था।

अब बाजार के लिए क्या बदल गया है?
वैभव अग्रवाल के अनुसार, जून 2026 के मौजूदा हालातों में बाजार के लिए तीन बेहद सकारात्मक संकेत उभरकर सामने आए हैं:

मजबूत कॉर्पोरेट अर्निंग्स (Q4 Results)
: चौथी तिमाही के नतीजे उम्मीद से काफी बेहतर रहे हैं। निफ्टी लार्जकैप कंपनियों में करीब 10% और मिडकैप सेगमेंट में करीब 20% की शानदार प्रॉफिट ग्रोथ दर्ज की गई है।

कच्चे तेल (Crude Oil) का गिरना: भारत अपनी जरूरत का 85% कच्चा तेल आयात करता है। वेस्ट एशिया में तनाव खत्म होने से कच्चे तेल के दाम $80-$85 प्रति बैरल से गिरकर $70 के नीचे आ गए हैं। यह भारतीय अर्थव्यवस्था और बाजार के लिए संजीवनी जैसा है।

'चाइना प्लस वन' थीम का फायदा
: वैश्विक स्तर पर मैन्युफैक्चरिंग के लिए चीन के विकल्प के तौर पर भारत पहली पसंद बनकर उभरा है। डिफेंस, पावर और इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग (EMS) सेक्टर्स में इसका साफ असर दिख रहा है।

निवेश की रणनीति: किस सेक्टर में बनेगा पैसा, कहाँ है खतरा?
मार्केट आउटलुक को लेकर वैभव अग्रवाल का नजरिया बहुत साफ है। उनका मानना है कि अब पूरा इंडेक्स एक साथ नहीं भागेगा, बल्कि बाजार 'स्टॉक स्पेसिफिक' (Stock Specific) रहेगा।

IT सेक्टर से पूरी दूरी (Zero Weight)
निवेशकों को सबसे बड़ी चेतावनी देते हुए वैभव अग्रवाल ने कहा कि वे आईटी (IT) सेक्टर पर पूरी तरह से 'जीरो वेट' (नकारात्मक) हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) इस पूरे सेक्टर को बहुत बड़े पैमाने पर बाधित (Disrupt) कर रहा है, जिससे पारंपरिक आईटी कंपनियों की ग्रोथ बेहद धीमी हो गई है।

डिफेंस और मिसाइल सेगमेंट में बड़ी ग्रोथ
बदलते दौर में डिफेंस सेक्टर के पास अगले 5 से 10 साल के लिए अर्निंग्स की बेहतरीन विजिबिलिटी है। विशेषकर ड्रोन, एंटी-ड्रोन तकनीक और मिसाइल कंपोनेंट बनाने वाली छोटी और मिडकैप कंपनियों में जबरदस्त स्कोप है, हालांकि इस समय इनके वैल्यूएशन थोड़े महंगे जरूर हैं।

इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग (EMS)
सरकार की पीएलआई (PLI) स्कीम के बाद भारत में कंपोनेंट डिजाइनिंग और इलेक्ट्रॉनिक्स सप्लाई करने वाली कंपनियों में 30% से 40% की सालाना ग्रोथ देखी जा रही है, जो निवेश के लिहाज से एक बेहतरीन क्लस्टर है।

NSE का आगामी IPO: भारत का सबसे पसंदीदा लॉन्ग-टर्म कंपाउंडर
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) द्वारा आईपीओ के लिए ड्राफ्ट पेपर फाइल किए जाने पर वैभव अग्रवाल बेहद उत्साहित दिखे। उन्होंने कहा:

"एनएससी का आईपीओ भारत का सबसे पसंदीदा और क्वालिटी लॉन्ग-टर्म कंपाउंडिंग वाला आईपीओ साबित होने जा रहा है।"

75% के भारी-भरकम एबिटा (EBITDA) मार्जिन और 35-40% के रिटर्न ऑन इक्विटी (ROE) के साथ यह एक शुद्ध मोनोपॉली बिजनेस है। इस आईपीओ में दुनिया भर के बड़े और घरेलू पेंशन फंड्स का ऐतिहासिक निवेश देखने को मिलेगा। हालांकि जेप्टो (Zepto) जैसे अन्य बड़े आईपीओ आने से शॉर्ट-टर्म में लिक्विडिटी पर थोड़ा असर पड़ सकता है, लेकिन बाजार इसे आसानी से सोख लेगा।

म्यूचुअल फंड निवेशकों के लिए बड़ी सलाह: SIP कभी न रोकें
बाजार के उतार-चढ़ाव को देखकर अपनी एसआईपी (SIP) रोकने वाले रिटेल निवेशकों को वैभव अग्रवाल ने इतिहास का हवाला देते हुए एक बुनियादी सीख दी।

उन्होंने कहा कि चाहे 2008 का वैश्विक मंदी का दौर हो, डिमोनेटाइजेशन हो या फिर कोविड-19 का क्राइसिस—इतिहास गवाह है कि जब भी मैक्रो स्थितियां सबसे खराब दिखती हैं, निवेश करने का वही सबसे सही और सुनहरा समय होता है। महंगाई को मात देने के लिए इक्विटी ही एकमात्र जरिया है। गिरावट से डरने के बजाय निवेशकों को अपनी एसआईपी जारी रखनी चाहिए या बाजार गिरने पर टॉप-अप करना चाहिए, क्योंकि यही अनुशासन अगले 3 से 5 साल में छप्परफाड़ रिटर्न कमा कर देता है।


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