
निष्पक्ष: अभिषेक बनर्जी के घर आधी रात छापा, TMC पर बढ़ा सियासी संकट
मेदिनीपुर में दर्ज धोखाधड़ी के मामले में अभिषेक बनर्जी के घर का ताला तोड़कर अंदर घुसी पुलिस, टीएमसी नेता मदन मित्रा के 5 ठिकानों पर भी ईडी की बड़ी छापेमारी।
TMC Crisis and Raid at Abhishek Banerjee's House: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। पार्टी इस समय एक बड़े आंतरिक और बाहरी संकट से जूझ रही है। इस दोहरे संकट के केंद्र में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे और टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी हैं। इस पूरे सियासी भूचाल और तृणमूल कांग्रेस के भीतर मचे घमासान पर 'फेडरल देश' के विशेष कार्यक्रम 'निष्पक्ष' में एंकर नीलू व्यास ने वरिष्ठ पत्रकार समीर पुरकायस्थ और टीएमसी प्रवक्ता मनोजीत मंडल के साथ विस्तार से चर्चा की।
आधी रात को अभिषेक बनर्जी के घर पुलिस की दबिश
कार्यक्रम की शुरुआत में एंकर नीलू व्यास ने बताया कि शनिवार तड़के करीब 3:00 बजे पश्चिम बंगाल पुलिस, कोलकाता पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों की एक संयुक्त टीम अचानक अभिषेक बनर्जी के कालीघाट (पटुआ पाड़ा) स्थित आवास पर पहुंची और पूरे परिसर को घेर लिया।
इस कार्रवाई की पृष्ठभूमि पर बात करते हुए वरिष्ठ पत्रकार समीर पुरकायस्थ ने बताया कि यह छापेमारी पश्चिम मेदनीपुर जिले के सालबनी थाने में दर्ज एक वित्तीय धोखाधड़ी के मामले से जुड़ी थी। पुलिस अभिषेक बनर्जी के पीए अमित रॉय की तलाश में वहां पहुंची थी, जिनकी मोबाइल टावर लोकेशन अभिषेक बनर्जी के आवास पर मिल रही थी। लगभग डेढ़ घंटे तक चले इस सर्च ऑपरेशन के बाद पुलिस को खाली हाथ लौटना पड़ा और सीज़र लिस्ट 'निल' (शून्य) रही। अभिषेक बनर्जी ने आरोप लगाया है कि पुलिस ने जबरन घर का ताला तोड़ा। इस घटना की खबर मिलते ही ममता बनर्जी भी तुरंत अभिषेक के आवास पर पहुंची थीं।
मदन मित्र पर ED का छापा, अभिषेक को CID का समन
'निष्पक्ष' कार्यक्रम में इस बात पर भी चर्चा हुई कि यह संकट सिर्फ यहीं खत्म नहीं होता। एक तरफ जहां अभिषेक बनर्जी को एक पुराने सिग्नेचर फर्जरी (Signature Forgery) मामले में सीआईडी (CID) ने दोबारा पूछताछ के लिए समन भेजा है, वहीं दूसरी तरफ टीएमसी के कद्दावर नेता और ममता बनर्जी के बेहद करीबी माने जाने वाले मदन मित्र के करीब 4-5 ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 'कैश फॉर जॉब' घोटाले के तहत छापेमारी की है।
पार्टी के अंदर बड़ी बगावत: सुदीप बंदोपाध्याय भी छोड़ सकते हैं साथ?
इस बाहरी कानूनी दवाब के बीच टीएमसी को सबसे बड़ा झटका पार्टी के भीतर से लग रहा है। कार्यक्रम में चर्चा के दौरान यह बात सामने आई कि टीएमसी के बेहद वरिष्ठ सांसद सुदीप बंदोपाध्याय भी पार्टी का साथ छोड़ सकते हैं और वे बीजेपी के संपर्क में हैं।
इस दलबदल और बगावत पर प्रतिक्रिया देते हुए टीएमसी प्रवक्ता मनोजीत मंडल ने तीखा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि सुदीप बंदोपाध्याय जैसे नेताओं की कोई राजनीतिक नैतिकता नहीं बची है और वे सिर्फ अपने व्यक्तिगत हितों और पुराने मामलों से बचने के लिए पाला बदल रहे हैं। मंडल ने पार्टी नेतृत्व पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि ममता बनर्जी ने कई समर्पित और पुराने नेताओं को दरकिनार करके ऐसे लोगों को सिर पर चढ़ाया, जिन्होंने अब संकट के समय पार्टी को धोखा दे दिया। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि जांच एजेंसियों का यह डर और छापे पिछले कई सालों से चल रहे हैं, और टीएमसी इन चुनौतियों से पार पा लेगी।
क्या अकेली पड़ गई हैं ममता बनर्जी? अब 21 जुलाई पर नजरें
चर्चा के अंत में एंकर नीलू व्यास के इस सवाल पर कि "क्या ममता बनर्जी अब बिल्कुल अकेली पड़ गई हैं?", पत्रकार समीर पुरकायस्थ ने विश्लेषण करते हुए कहा कि भले ही वे पूरी तरह अकेली न हों, लेकिन राजनीतिक रूप से बेहद कमजोर और असहज स्थिति में जरूर हैं। इस समय खुद ममता बनर्जी भी पूरी तरह आश्वस्त नहीं हैं कि पार्टी में कौन उनके साथ खड़ा है और कौन नहीं।
विश्लेषकों का मानना है कि टीएमसी इस समय अपने सबसे नाजुक दौर से गुजर रही है। इस पूरे संकट के बीच अब सबकी नजरें 21 जुलाई को होने वाले टीएमसी के पारंपरिक 'शहीद दिवस' (Martyrs' Day) कार्यक्रम पर टिकी हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि ममता बनर्जी इस सालाना रैली के जरिए अपने कार्यकर्ताओं में वापस कितना जोश भर पाती हैं, और विपक्ष के हमलों व दलबदल को रोकने के लिए उनका अगला कदम क्या होता है।

