
ईरान संकट और भारत के हित: खामनेई के अंतिम संस्कार का न्योता बना कसौटी
स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज बंद होने से देश में उपजे तेल-गैस संकट के बीच ईरान ने पीएम मोदी को दिया आमंत्रण; ऊर्जा सुरक्षा और कूटनीतिक संतुलन की परीक्षा लेगा तेहरान का दौरा.
Siyasat: पश्चिम एशिया में मचे भारी युद्ध और भू-राजनीतिक उथल-पुथल के बीच भारत के सामने एक बड़ी कूटनीतिक परीक्षा आ खड़ी हुई है. ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने देश के दिवंगत सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामनेई के अंतिम संस्कार कार्यक्रम में शामिल होने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को औपचारिक निमंत्रण भेजा है.
नई दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास के जरिए विदेश मंत्रालय को मिला यह न्योता कूटनीतिक गलियारों में भारी चर्चा का विषय बन गया है. 'द फेडरल देश' के शो 'सियासत' में इस विषय पर गहन विश्लेषण करते हुए बताया गया कि यह न्योता भारत के लिए जितनी बड़ी उलझन है, देश की ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) के लिहाज से उतना ही बड़ा अवसर भी साबित हो सकता है.
1. आखिर क्यों उलझन में है भारत?
शो के अनुसार, ईरान का यह आमंत्रण प्रधानमंत्री मोदी के लिए एक बड़ी दुविधा लेकर आया है, जिसके पीछे मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
निधन पर आधिकारिक चुप्पी: इसी वर्ष 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर किए गए हवाई हमले में आयतुल्लाह अली खामनेई की मौत हो गई थी. उस वक्त भारत सरकार ने न तो इस हमले की तीखे शब्दों में आलोचना की थी और न ही पीएम मोदी ने खामनेई के निधन पर कोई सार्वजनिक शोक संदेश जारी किया था.
इजराइल से नजदीकी: सबसे ज्यादा ध्यान खींचने वाली बात यह थी कि ईरान पर हुए इस हमले से ठीक दो दिन पहले पीएम मोदी इजराइल के दौरे पर थे. ऐसे में ईरान के इस सर्वोच्च कार्यक्रम में शामिल होना भारत की संतुलन बनाने की कूटनीति के लिए बेहद संवेदनशील माना जा रहा है.
2. भारत को क्यों जाना चाहिए? (एनर्जी सिक्योरिटी का संकट)
विदेश मामलों के जानकारों के हवाले से शो में इस बात पर जोर दिया गया कि भारत को अपने दीर्घकालिक हितों को देखते हुए इस न्योते को स्वीकार करना चाहिए:
आर्थिक और ईंधन संकट: अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच हुए इस युद्ध के बाद ईरान ने 'स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज' (Strait of Hormuz) को ब्लॉक कर दिया था. इसके कारण भारत में एलपीजी (LPG) और एलएनजी (LNG) का गंभीर संकट खड़ा हो गया, कच्चे तेल की सप्लाई बाधित हुई और देश में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ गए.
चीन का बढ़ता प्रभाव: हॉर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने के दौरान जहां भारत के जहाज फंसे हुए थे, वहीं चीन के जहाजों को ईरान ने आसानी से रास्ता दिया. भारत के लिए ईरान से रिश्ते सुधारना इसलिए जरूरी है ताकि तेल और गैस की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित हो सके.
संयुक्त राष्ट्र (UN) की रिपोर्ट में इजराइल बेनकाब
वीडियो रिपोर्ट में श्रीनिवास मुरलीधर की अध्यक्षता वाले संयुक्त राष्ट्र के स्वतंत्र जांच आयोग की 100 पन्नों की रिपोर्ट का भी हवाला दिया गया. इस रिपोर्ट के मुताबिक, अक्टूबर 2025 में युद्धविराम के बावजूद इजराइली सेना ने फिलिस्तीनी बच्चों को जानबूझकर निशाना बनाया. अक्टूबर 2023 से मार्च 2026 के बीच 20,000 से अधिक बच्चों की मौत हुई और जेलों में उनके साथ जानवरों जैसा व्यवहार किया गया. ऐसे में भारत द्वारा इजराइल के साथ कूटनीतिक संतुलन की समीक्षा लाजमी हो जाती है.
3. कब और कहां होगा अंतिम संस्कार?
आयतुल्लाह अली खामनेई के अंतिम संस्कार से जुड़ी रस्में 4 जुलाई से 9 जुलाई तक चलेंगी. इसकी शुरुआत तेहरान से होगी और समापन 9 जुलाई को खामनेई के गृह शहर मशहद में उन्हें दफनाने के साथ होगा. ईरान ने इस कार्यक्रम के लिए भारत के अलावा चीन, रूस, कतर, फ्रांस और पाकिस्तान जैसे प्रमुख देशों के राष्ट्रप्रमुखों को भी आमंत्रित किया है.
4. कूटनीतिक संबंधों को नया मोड़ देने का अवसर
ईरान में अब दिवंगत खामनेई के बेटे मुस्तफा अली खामनेई को नया सुप्रीम लीडर घोषित कर दिया गया है. जानकारों का मानना है कि जब खुद अमेरिका भी युद्ध को रोकने के लिए परोक्ष रूप से ईरान के साथ समझौते की राह तलाश रहा है, तो भारत को भी पुरानी खटास को पीछे छोड़ते हुए नए सर्वोच्च नेतृत्व के साथ सीधे संवाद की शुरुआत करनी चाहिए.
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