
उद्धव सेना में फिर बगावत की आहट: संपर्क से बाहर हुए सांसद संजय जाधव
शिवसेना (UBT) में एक और टूट की आशंका। मातोश्री की बैठक से नदारद रहे सांसद जाधव। तीन सांसदों के पाला बदलने की चर्चा से महाराष्ट्र की राजनीति में फिर मचा हड़कंप।
Shivsena UBT : एकनाथ शिंदे की बगावत के करीब चार साल बाद उद्धव ठाकरे की शिवसेना एक बार फिर बड़े संकट की ओर बढ़ती दिख रही है। ताजा खबरों के मुताबिक, पार्टी के कम से कम तीन सांसदों ने हाल ही में विपक्षी नेताओं के साथ 'शिष्टाचार' मुलाकातें की हैं। इसके बाद से ही कयास लगाए जा रहे हैं कि क्या उद्धव सेना में एक और बड़ी टूट होने वाली है।
मातोश्री की बैठक से गायब रहे जाधव
पार्टी में फूट की चर्चा तब तेज हुई जब मराठवाड़ा के दिग्गज नेता और तीन बार के सांसद संजय जाधव मातोश्री में हुई अहम बैठक में नहीं पहुँचे। इसके बाद सेना भवन में हुई पदाधिकारियों की बैठक से भी वे नदारद रहे। सूत्रों का दावा है कि जाधव पिछले कुछ समय से पार्टी नेतृत्व की पहुंच से बाहर हैं, जिससे चिंता और बढ़ गई है।
नेताओं ने दी सफाई, पर शक बरकरार
वरिष्ठ नेता अंबादास दानवे ने इन खबरों को हवा देने से रोकने की कोशिश की है। उन्होंने दावा किया कि जाधव एक पारिवारिक समारोह में व्यस्त हैं और पार्टी पूरी तरह एकजुट है। हालांकि, दिल्ली में जिस तरह से सांसदों की मेल-मुलाकातें बढ़ी हैं, उसने पार्टी के भीतर ही संदेह पैदा कर दिया है। राजनीतिक हलकों में इसे 'ऑपरेशन टाइगर' का नाम दिया जा रहा है।
बीजेपी और शिंदे गुट से बढ़ी नजदीकियां
हिंगोली के सांसद नागेश पाटिल आष्टीकर और यवतमाल-वाशिम के सांसद संजय देशमुख ने हाल ही में केंद्रीय मंत्री प्रतापराव जाधव के डिनर में शिरकत की थी। वहीं, संजय जाधव की अमित शाह से मुलाकात की खबरों ने आग में घी डालने का काम किया है। चर्चा है कि ये सांसद शिंदे गुट के बजाय सीधे बीजेपी नेतृत्व के संपर्क में हो सकते हैं।
नेतृत्व से संवाद की कमी बनी वजह?
सांसदों की नाराजगी के पीछे पार्टी के काम करने के तरीके और नेतृत्व से संवाद की कमी को बड़ी वजह माना जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, कुछ सांसद इस बात से खफा हैं कि चुनाव प्रचार के दौरान शीर्ष नेतृत्व ने जमीनी स्तर पर कम सक्रियता दिखाई। स्थानीय निकाय चुनावों में पार्टी के खराब प्रदर्शन ने इस असंतोष को और बढ़ा दिया है।
असमंजस में पार्टी का भविष्य
फिलहाल अरविंद सावंत और अनिल देसाई जैसे नेताओं को छोड़कर सांसदों का एक बड़ा वर्ग दूसरे विकल्प तलाश रहा है। कई सांसदों ने अब सीधे जवाब देने के बजाय चुप्पी साध ली है। यदि ये सांसद पाला बदलते हैं, तो यह उद्धव ठाकरे के लिए एक और बड़ा राजनीतिक झटका साबित होगा। आने वाले कुछ दिन महाराष्ट्र की राजनीति के लिए बेहद निर्णायक होने वाले हैं।
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