होर्मुज जलडमरूमध्य संकट से आर्थिक नुकसान
पीएम मोदी ने होर्मुज जलडमरूमध्य में चल रहे मौजूदा तनाव का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वहां जहाजों को रोकने से पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था प्रभावित हुई है। इस संकट के कारण वैश्विक स्तर पर कमरतोड़ महंगाई और मंदी का खतरा बढ़ गया है। तनाव की वजह से भारत समेत कई देशों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है।
ट्रंप के सामने भारतीय नाविकों की मौत का मुद्दा
प्रधानमंत्री ने अमेरिकी सेना की कार्रवाई में भारतीय नाविकों की मौत का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने पीएम मोदी ने इस पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इस तनावपूर्ण स्थिति में कई निर्दोष भारतीय नागरिकों ने अपनी जान गंवाई है। वैश्विक समुद्री व्यापार से जुड़े नाविकों की सुरक्षा करना हम सभी की साझी जिम्मेदारी है।
नाविकों की सुरक्षा के लिए पुख्ता इंतजाम जरूरी
पीएम मोदी ने कहा कि हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि समुद्री मार्ग पूरी तरह सुरक्षित रहें। नाविक बिना किसी डर या भय के समुद्र में अपना काम पूरा कर सकें। उन्होंने साफ किया कि नाविकों की सुरक्षा से समझौता वैश्विक व्यापार को संकट में डाल सकता है। इसलिए सभी देशों को इस दिशा में मिलकर कड़े कदम उठाने होंगे।
आपसी भरोसा ही सबसे बड़ी रणनीतिक ताकत है
फ्रांस के एवियन में आयोजित जी7 आउटरीच सत्र में पीएम मोदी ने अपने विचार साझा किए। उन्होंने मंगलवार को कहा कि आज के समय में आपसी भरोसा ही सबसे बड़ी रणनीतिक ताकत है। आज दुनिया में ऊर्जा, खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य, साइबर सुरक्षा और आर्थिक सुरक्षा आपस में जुड़ी हुई हैं। मानवता की प्रगति के लिए देशों के बीच मजबूत साझेदारी होना बहुत जरूरी है।
संकीर्ण स्वार्थों के कारण भरोसे की भारी कमी
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर भी अपनी बात साझा की। उन्होंने लिखा कि आज दुनिया पहले से कहीं ज्यादा एक-दूसरे पर निर्भर हो गई है। ऐसे समय में व्यापार और तकनीक का इस्तेमाल संकीर्ण स्वार्थों के लिए किया जा रहा है। इसी कारण से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आपसी भरोसे की भारी कमी पैदा हो रही है।
दुनिया संसाधनों की नहीं बल्कि भरोसे की कमी से जूझ रही पीएम मोदी ने कहा कि हमारी साझेदारियों का भविष्य आपसी भरोसे की मजबूती पर टिका है। दुख की बात यह है कि दुनिया संसाधनों की कमी से नहीं जूझ रही है। दुनिया इस समय सबसे ज्यादा आपसी भरोसे की कमी से परेशान है। उन्होंने सभी देशों से इस भरोसे को फिर से मजबूत करने की अपील की।
भारत की सोच के केंद्र में 'मानवता पहले' का सिद्धांत
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत हमेशा से 'वसुधैव कुटुंबकम' की भावना पर चलता रहा है। भारत पूरी दुनिया को अपना एक बड़ा परिवार मानता है। हमारे अनुभव बताते हैं कि विकास तभी प्रभावी होता है जब वह जनता से जुड़ा हो। भारत ने हमेशा 'मानवता पहले' के सिद्धांत का पूरी निष्ठा से पालन किया है।
वैश्विक मंचों पर भारत की बड़ी पर्यावरण पहल
भारत की यही मानवीय सोच उसकी सभी अंतरराष्ट्रीय पहलों की मजबूत नींव है। इसमें इंटरनेशनल सोलर अलायंस और डिजास्टर रेजिलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर गठबंधन शामिल हैं। इसके साथ ही ग्लोबल बायोफ्यूल्स अलायंस, मिशन 'लाइफ' और 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान भी शामिल हैं। यह सभी अभियान पर्यावरण और मानवता की सुरक्षा के लिए शुरू किए गए हैं।
संकट के समय सबसे पहले मदद पहुंचाता है भारत अपनी इसी समावेशी सोच के कारण भारत आपदाओं में सबसे पहले मदद पहुंचाता है। चाहे श्रीलंका में चक्रवात हो या फिर अफगानिस्तान में आया विनाशकारी भूकंप। मोजाम्बिक में आई बाढ़ हो या जमैका में आया भीषण तूफान। भारत ने हमेशा संकट के समय आगे बढ़कर दुनिया की मदद का हाथ थामा है।
सर्व जन हिताय और सर्व जन सुखाय का मूल मंत्र
भारत की सतत विकास यात्रा के बारे में भी प्रधानमंत्री ने विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि 'सर्व जन हिताय, सर्व जन सुखाय' का मंत्र देश का आधार है। इसी सोच से वित्तीय समावेशन, स्वास्थ्य सुरक्षा और डिजिटल पहचान में अच्छे परिणाम मिले हैं। इसी के कारण तकनीक आधारित सशक्तिकरण और महिला नेतृत्व वाले विकास को गति मिली है।
दूसरों को सक्षम बनाना ही साझेदारी की असली परीक्षा
पीएम मोदी ने कहा कि किसी साझेदारी की असली परीक्षा क्षमता निर्माण में है। परीक्षा यह नहीं है कि हम दूसरों के लिए क्या बनाते हैं। असली परीक्षा यह है कि हम उन्हें खुद के लिए क्या बनाने में सक्षम करते हैं। भारत की विकास साझेदारियां हमेशा से इसी मानवीय भावना को दर्शाती हैं।