
भारत के खिलाफ पाकिस्तान को दी थी तकनीकी मदद, चीन ने पहली बार खोले राज
चीन ने पहली बार स्वीकार किया है कि भारत-पाक संघर्ष के दौरान उसने पाकिस्तान के J-10CE लड़ाकू विमानों को तकनीकी सहायता दी थी।
चीन ने पहली बार सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया है कि उसने पिछले साल भारत और पाकिस्तान के बीच हुए सैन्य संघर्ष के दौरान पाकिस्तान को तकनीकी सहायता दी थी। भारत-पाकिस्तान के बीच मई 2025 में चार दिनों तक चले संघर्ष के एक साल बाद चीन की ओर से यह आधिकारिक पुष्टि सामने आई है।यह खुलासा ऐसे समय में हुआ है जब क्षेत्रीय सुरक्षा और चीन-पाकिस्तान सैन्य सहयोग को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार चर्चा हो रही है।
ऑपरेशन सिंदूर के बाद बढ़ा था तनाव
भारत और पाकिस्तान के बीच बीते साल 7 से 10 मई तक भीषण सैन्य संघर्ष देखने को मिला था। यह टकराव पहलगाम आतंकी हमले के बाद शुरू हुआ, जिसके जवाब में भारत ने “ऑपरेशन सिंदूर” के तहत पाकिस्तान में कई सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया था।चार दिनों तक चले संघर्ष के बाद 10 मई को दोनों देश युद्धविराम यानी सीजफायर पर सहमत हुए थे।
चीन ने मानी पाकिस्तान को तकनीकी मदद
साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन के सरकारी ब्रॉडकास्टर सीसीटीवी ने गुरुवार को झांग हेंग का एक इंटरव्यू प्रसारित किया।झांग हेंग चीन की एविएशन इंडस्ट्री कॉर्पोरेशन ऑफ चाइना (AVIC) के चेंगदू एयरक्राफ्ट डिजाइन एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट में इंजीनियर हैं। यह संस्थान चीन के लड़ाकू विमानों और मानवरहित हवाई वाहनों (UAV) के विकास में अहम भूमिका निभाता है।इंटरव्यू में झांग ने कहा कि संघर्ष के दौरान चीन ने पाकिस्तान को उसके J-10CE लड़ाकू विमानों के लिए तकनीकी सहायता उपलब्ध कराई थी।
पाकिस्तान के पास हैं चीन के J-10CE लड़ाकू विमान
पाकिस्तान वायु सेना चीन निर्मित J-10CE लड़ाकू विमानों का संचालन करती है। इन विमानों का निर्माण AVIC की एक सहयोगी कंपनी ने किया है।भारत-पाक संघर्ष के दौरान ये लड़ाकू विमान सक्रिय रूप से तैनात थे और पाकिस्तानी वायु सेना भारतीय फाइटर जेट्स का मुकाबला करने के लिए चीनी तकनीकी सहायता का इस्तेमाल कर रही थी। हालांकि इससे पहले भी पाकिस्तान को चीन की सैन्य मदद को लेकर कई रिपोर्ट सामने आई थीं, लेकिन चीन की ओर से पहली बार इस पर प्रत्यक्ष और आधिकारिक स्वीकारोक्ति हुई है।
‘यह हमारे लिए मानसिक और शारीरिक परीक्षा थी’ झांग हेंग ने इंटरव्यू में संघर्ष के दौरान के हालात का भी जिक्र किया।उन्होंने कहा “हम सहायता केंद्र पर अक्सर उड़ान भरते लड़ाकू विमानों की आवाज और हवाई हमले के सायरन सुनते थे। मई में तापमान 50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता था। यह संघर्ष हमारे लिए मानसिक और शारीरिक दोनों तरह की बड़ी परीक्षा था।”उन्होंने बताया कि उनकी टीम का मुख्य उद्देश्य मौके पर जाकर तकनीकी सहायता देना और यह सुनिश्चित करना था कि पाकिस्तान के लड़ाकू विमान पूरी युद्ध क्षमता के साथ काम कर सकें।
‘मौके पर जाकर दी गई सहायता’
झांग ने कहा कि उनकी टीम को सबसे ज्यादा प्रेरणा इस बात से मिली कि वे सीधे मौके पर जाकर सहायता प्रदान कर रहे थे। उनके अनुसार “हम यह सुनिश्चित करना चाहते थे कि उपकरण अपनी पूरी क्षमता के साथ प्रदर्शन करें। यह सिर्फ J-10CE की पहचान नहीं थी, बल्कि दिन-रात साथ काम करते हुए बने गहरे सहयोग का भी प्रतीक था।” दूसरे चीनी अधिकारी ने भी की पुष्टि चेंगदू एयरक्राफ्ट डिजाइन एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट के एक अन्य कर्मचारी जू दा ने भी पाकिस्तान को मौके पर सहायता देने की बात स्वीकारी। उन्होंने कहा “हमने J-10CE की देखभाल की और उसे उपयोगकर्ता को सौंपा। हमें लगता है कि इस विमान ने संघर्ष के दौरान अच्छा प्रदर्शन किया और अपेक्षित नतीजे दिए।”
क्या है चीन का J-10CE लड़ाकू विमान?
J-10CE, चीन के J-10C लड़ाकू विमान का निर्यात संस्करण है। इसे 4.5 पीढ़ी का आधुनिक लड़ाकू विमान माना जाता है और यह J-10 श्रृंखला का सबसे उन्नत मॉडल है।इस विमान में एक्टिव इलेक्ट्रॉनिकली स्कैन्ड ऐरे (AESA) रडार लगा है और यह आधुनिक हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलों समेत कई उन्नत हथियार प्रणालियों से लैस है।चीन के बाहर पाकिस्तान ही इस विमान का एकमात्र ज्ञात विदेशी ऑपरेटर है।
पाकिस्तान की सैन्य निर्भरता बढ़ी
स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) के अनुसार, 2021 से 2025 के बीच पाकिस्तान द्वारा आयात किए गए हथियारों में लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा चीन से आया।पाकिस्तान वायु सेना JF-17 लड़ाकू विमान का भी बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करती है, जिसे चीन और पाकिस्तान ने संयुक्त रूप से विकसित किया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत-पाक संघर्ष में चीन की तकनीकी भागीदारी की यह स्वीकारोक्ति दक्षिण एशिया के सामरिक समीकरणों और भारत-चीन-पाकिस्तान संबंधों पर व्यापक असर डाल सकती है।

