इबोला वायरस का कहर: 80 मौतों के बाद WHO ने घोषित की ग्लोबल इमरजेंसी
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इबोला वायरस से बचाव कार्य में जुटे स्वास्थ्यकर्मी और सदस्य समूह।

इबोला वायरस का कहर: 80 मौतों के बाद WHO ने घोषित की ग्लोबल इमरजेंसी

साउथ अफ्रीकी देशों में एक बार फिर इबोला कहर। कांगो और युगांडा में 80 मरीजों की मौत के बाद विश्व स्वास्थ्य संगठन ने घोषित किया वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल।


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वैश्विक स्वास्थ्य के मोर्चे पर एक बेहद चिंताजनक खबर सामने आ रही है। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन यानी विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने अफ्रीकी देशों कांगो और युगांडा में तेजी से पैर पसार रहे इबोला वायरस के प्रकोप को देखते हुए, इसे आधिकारिक तौर पर एक ग्लोबल इमरजेंसी घोषित कर दिया है। इस जानलेवा और संक्रामक बीमारी के चलते पिछले कुछ समय में कई लोगों की दर्दनाक मौत होने के गंभीर मामले दर्ज किए जा चुके हैं।

वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (WHO) ने रविवार को एक बड़ा कदम उठाते हुए कांगो और युगांडा दोनों ही देशों में फैले इस खतरनाक इबोला प्रकोप को 'इंटरनेशनल पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी' (अंतरराष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल) के रूप में अधिसूचित किया है। हालांकि इसके साथ ही विश्व स्वास्थ्य संगठन ने स्थिति की तकनीकी गंभीरता को स्पष्ट करते हुए यह भी साफ कर दिया है कि बंडिबुग्यो वायरस के माध्यम से फैला यह वर्तमान संक्रमण अभी उस स्तर पर नहीं पहुंचा है, जिसे पूर्ण महामारी यानी 'पेंडेमिक' घोषित किए जाने के कड़े अंतरराष्ट्रीय मानकों पर पूरी तरह खरा माना जा सके।

संयुक्त राष्ट्र की इस शीर्ष स्वास्थ्य एजेंसी द्वारा जारी की गई आधिकारिक रिपोर्ट के मुताबिक, शनिवार की समयसीमा तक कांगो देश के इटुरी प्रांत के भीतर कम से कम तीन बड़े स्वास्थ्य क्षेत्रों, जिनमें बुनिया, रवामपारा और मोंगब्वालू शामिल हैं, भारी तबाही देखी गई है। इन इलाकों में अब तक इबोला के कारण कम से कम 80 संदिग्ध मौतें हो चुकी हैं, जबकि अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं (लैब) में जांच के बाद 8 मामलों में इस वायरस की पूरी तरह से पुष्टि की जा चुकी है। इसके अलावा प्रशासन के सामने कुल 246 संदिग्ध केस भी आ चुके हैं, जिनकी सघन निगरानी की जा रही है।

क्या है इबोला वायरस और यह इंसानों में कैसे फैलता है?

इबोला वास्तव में एक अत्यंत खतरनाक और घातक वायरस के कारण होने वाली एक अत्यंत गंभीर बीमारी है। चिकित्सा वैज्ञानिकों का कहना है कि यह संक्रमण आम आबादी में फैलने के लिहाज से दुर्लभ जरूर है। परंतु इसकी प्रकृति इतनी अधिक गंभीर और आक्रामक होती है कि यह बहुत से मामलों में सीधे तौर पर जानलेवा और अत्यंत घातक साबित होती है।

जहां तक इसके फैलने के माध्यम का सवाल है तो यह वायरस किसी भी संक्रमित व्यक्ति के शरीर के भीतर मौजूद विभिन्न प्रकार के तरल पदार्थों, जैसे कि पीड़ित के खून, उल्टी, पसीना या वीर्य के सीधे और जैविक संपर्क में आने के कारण एक स्वस्थ व्यक्ति के शरीर में प्रवेश कर जाता है। इस प्रकार यह बहुत तेजी से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में अपनी चेन बना लेता है। चिकित्सा जगत के पास अभी तक इस वायरस को शरीर में पूरी तरह नष्ट करने का कोई अचूक या पक्का इलाज तो उपलब्ध नहीं है। लेकिन राहत की बात यह है कि इसकी रोकथाम के लिए चिकित्सा जगत द्वारा तैयार की गई प्रभावी वैक्सीन जरूर उपलब्ध है।

चार फ्रंटलाइन स्वास्थ्यकर्मियों ने भी गंवाई जान

इस संकट की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस महामारी से प्रभावित क्षेत्र में दिन-रात मरीजों की सेवा में जुटे 4 फ्रंटलाइन स्वास्थ्यकर्मियों (हेल्थकेयर वर्कर्स) की भी वायरल हेमोरेजिक बुखार के घातक लक्षणों की चपेट में आने के कारण मौत हो जाने की पुष्टि हुई है।

इसके साथ ही एक और हैरान करने वाली बात सामने आई है कि कांगो देश से यात्रा करके लौटे दो अलग-अलग व्यक्तियों में क्रमशः 15 मई 2026 और 16 मई 2026 को युगांडा की राजधानी कंपाला के भीतर दो प्रयोगशाला-पुष्टि (लैब-कन्फर्म) मामले दर्ज किए गए हैं। चौंकाने वाला तथ्य यह है कि इन दोनों ही संक्रमित मरीजों का आपस में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कोई भी स्पष्ट संबंध या पुराना संपर्क दर्ज नहीं किया गया है, जो इस बात का संकेत है कि वायरस चुपचाप अपनी जगह बना रहा है।

इस बेहद नाजुक और गंभीर मोड़ पर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के महानिदेशक, अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य विनियम यानी आईएचआर (IHR) के विशेष नीतिगत प्रावधानों के अंतर्गत बहुत जल्द ही एक उच्च स्तरीय इमरजेंसी कमेटी की आपातकालीन बैठक बुलाने की तैयारी कर रहे हैं।


चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि इस जानलेवा और आक्रामक वायरस के बढ़ते संक्रमण से निपटने के लिए इस समय वैश्विक स्तर पर एक बहुत मजबूत और साझा कोऑर्डिनेशन (अंतरराष्ट्रीय समन्वय) की सख्त जरूरत है। ऐसा होने पर ही इस प्रकोप की वास्तविक गंभीरता, इसके फैलने की गति और इसके भविष्य के रास्तों को सही ढंग से समझा जा सकेगा, जिसके आधार पर अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर कड़ी निगरानी रखने और वायरस की रोकथाम के सभी मानवीय प्रयासों को पूरी तरह से सफल बनाया जा सकेगा।

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